कोलकाता के तारातल्ला में एक निर्माणाधीन गोदाम का शेड ढह गया। हादसे के वक्त वहां करीब 50 से 60 मजदूर काम कर रहे थे, जो मलबे के विशाल ढेर के नीचे फंस गए …और पढ़ें
कोलकाता के तारातल्ला में निर्माणाधीन गोदाम का शेड ढहा।
हादसे में कई मजदूर मलबे में फंसे।
सेना और बचाव दल राहत कार्य में जुटे, कंट्रोल रूम स्थापित।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। कोलकाता के तारातला इलाके में बुधवार को निर्माणाधीन गोदाम ढहने के हादसे में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई है, जबकि 18 लोगों को जीवित बाहर निकाला गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद बताया कि मलबे के नीचे अब भी 12 से 15 लोगों के फंसे होने की आशंका है। राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है।
घटनास्थल पर सेना, एनडीआरएफ, दमकल और पुलिस की टीमें संयुक्त रूप से अभियान चला रही हैं। भारी कंक्रीट ढांचे और लोहे की बीमों को हटाने के लिए कई क्रेन तथा 50 टन क्षमता वाली हाइड्रोलिक क्रेन लगाई गई हैं। अब तक 18 लोगों को बाहर निकाला गया है, जिनमें से कई गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों को एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है।-1782296455974.jpg)
मलबे के भीतर से आ रहीं लोगों की आवाजें
बचावकर्मियों को मलबे के भीतर से लोगों की आवाजें सुनाई देने की भी जानकारी मिली है। पुलिस ने लापता लोगों की तलाश के लिए स्निफर डाग की भी मदद ली है। प्रशासन ने रातभर बचाव अभियान जारी रखने की तैयारी की है। इसके लिए बड़े जेनरेटर, अस्थायी मेडिकल कैंप और अतिरिक्त एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, करीब डेढ़ वर्ष से निर्माणाधीन यह गोदाम बुधवार दोपहर अचानक ढह गया। हादसे के समय वहां बड़ी संख्या में श्रमिक काम कर रहे थे। घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है।-1782296469775.jpg)
मलबे के नीचे अभी भी कई मजदूर
मिली जानकारी के अनुसार मलबे के नीचे से अभी भी दबे हुए मजदूरों की दर्दनाक चीखें सुनाई दे रही हैं, जिससे अपनों की तलाश में जुटे लोगों का कलेजा कांप उठा है। राज्य सरकार ने स्थिति पर नजर रखने के लिए नवान्न में कंट्रोल रूम खोल दिया है।
राज्य सरकार ने स्थिति पर नजर रखने के लिए नवान्न में कंट्रोल रूम खोल दिया है। जिसके नंबर 1070, 8697981070, 033-22143526/22535185 हैं। इसके अलावा मौके पर पहुंचे राज्य के मंत्री इंद्रनील खां और भाजपा नेता राकेश सिंह ने कहा कि फिलहाल प्राथमिकता जिंदगियां बचाना है।
वहीं आशंका जताई जा रही है कि मंगलवार को हुई भारी बारिश के कारण निर्माणाधीन ढांचा कमजोर हो गया था, हालांकि सुरक्षा मानकों में लापरवाही को लेकर भी गंभीर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।