सरकार ने वित्त और राजस्व सचिव तुहिन कांत पांडेय (Tuhin Kanta Pandey) को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) का नया चेयरमैन नियुक्त किया है. वह माधबी पुरी बुच की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल इस महीने खत्म हो रहा है. माधबी पुरी बुच ने 2 मार्च को SEBI चेयरपर्सन का पद संभाला था और सेबी की पहली महिला चेयरपर्सन बनी थीं.
कौन हैं तुहिन कांत पांडे?
ओडिशा कैडर के 1987 बैच के भारतीय प्रशासनिक अधिकारी (IAS) पांडे हाल ही में हुए एक फेरबदल में केंद्रीय बजट 2025 से नया राजस्व सचिव नियुक्त किया गया था. राजस्व सचिव नियुक्त होने के पहले पांडेय निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव थे. वह सरकारी विनिवेश (Disinvestment) प्रोसेस में बड़ी भूमिका निभा चुके हैं. सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी बिक्री (Privatization) को लेकर कई बड़े फैसले किए हैं.
कौन-कौन से पद पर रह चुके हैं तुहिन कांत पांडे?
तुहिन कांत पांडेय ने भारत की आर्थिक नीतियों, विनिवेश और सार्वजनिक क्षेत्र के प्रबंधन में अहम भूमिका निभाई है. सरकारी फाइनेंस और इनवेस्टमेंट को संभालने का उनका अनुभव उन्हें सेबी का चेयरमैन बनाने के लिए एक मजबूत विकल्प बनाता है. पांडेय हाल के सालों में कुछ खास पद पर कार्य कर चुके हैं.
कहां से की है पढ़ाई?
तुहिन कांत पांडेय ने पंजाब विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर तथा ब्रिटेन के बर्मिंघम विश्वविद्यालय से एमबीए की डिग्री ली है. उन्होंने राज्य और केंद्र दोनों सरकारों में काम किया है और कई विभागों में जिम्मेदारी संभाली है. इसके अलावा, संबलपुर, ओडिशा में जिला कलेक्टर, वाणिज्य मंत्रालय में उप सचिव स्वास्थ्य, परिवहन और वाणिज्यिक कर क्षेत्रों में भूमिकाएं रही हैं.
कितनी होगी सैलरी?
SEBI के नए चेयरमैन के तौर पर तुहिन कांत पांडेय की नियुक्ति को मंजूरी कैबिनेट की तरफ से दे दी गई है. वह पदभार संभालने के बाद तीन साल या अगले आदेश तक इस पद पर बने रहेंगे. सेबी चेयरमैन को सरकार के सचिव के बराबर सैलरी मिलती है. इसके अलावा, सेबी चेयरमैन ₹5,62,500 मंथली का फिक्स्ड सैलरी भी चुन सकते हैं, जिसमें सरकारी वाहन और घर की सुविधा नहीं दी जाएगी.
क्या करता है सेबी?
SEBI यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India) शेयर बाजार और पूंजी बाजार का नियामक (Indian stock market regulator) है. यह निवेशकों की हितों की रक्षा के लिए समय-समय पर नियमों में बदलाव करता है. साथ ही पूंजी बाजार और शेयर बाजार की निगरानी रखता है, ताकि किसी भी गड़बड़ी पर एक्शन ले सके. इसका काम धोखाधड़ी के रोकना और पारदर्शिता बनाए रखना है.
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