कच्चे तेल की कीमत जुलाई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जिससे भारत …और पढ़ें
कच्चा तेल जुलाई के बाद पहली बार 100 डॉलर पार
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कच्चे तेल की कीमत जुलाई के बाद पहली बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। तेल कंपनियों की मौजूदा प्राथमिकता वैश्विक अस्थिरता के बीच क्रूड की आपूर्ति बनाए रखना है।
अंतरराष्ट्रीय जानकारों का अनुमान है कि कीमतें फिलहाल 100 डॉलर या इससे ऊपर बनी रह सकती हैं। इससे भारत के भुगतान संतुलन, रुपये की कीमत और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है और अपनी जरूरत का करीब 88 फीसद हिस्सा आयात करता है। कच्चे तेल के 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने का सीधा मतलब आयात बिल में इजाफा, चालू खाता घाटा (सीएडी) का बढ़ना और रुपये पर दबाव है।
वित्त मंत्रालय का एक पुराना आकलन है कि हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत का वार्षिक आयात बिल करीब 13-14 अरब डॉलर बढ़ जाता है। इसका सीधा असर भुगतान संतुलन (अंतरराष्ट्रीय कारोबार में डॉलर के देश मे आने और देश से बाहर जाने का अंतर) पर होता है और इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
इस साल रुपये की कीमत में भारी गिरावट के लिए कच्चे तेल की कीमतों को ही कारण बताया जाता है। बुधवार को कच्चे तेल के 100 डॉलर पार करने के साथ रुपया भी 34 पैसे टूटकर 95.08 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।
इसका सबसे पहले असर सरकारी तेल कंपनियों पर होने की संभावना है। सितंबर महीने की अब तक की औसत कीमत पर सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 23 रुपये प्रति लीटर की हानि हो रही है। जबकि घरेलू एलपीजी पर अंडर-रिकवरी 200 रुपये प्रति सिलेंडर चल रही है। वैसे यह अप्रैल, 2026 के मुकाबले काफी कम है।
सरकार की पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में भारत ने औसतन 102.11 डॉलर प्रति बैरल की दर से कच्चा तेल खरीदा है। यह अगस्त 2026 के मुकाबले 10 फीसद से भी ज्यादा है। अगस्त में औसत खरीद मूल्य 90.19 डॉलर प्रति बैरल था।
जुलाई में यह 82.04 डॉलर, जून में 83.22 डॉलर, मई में 106.23 डॉलर और अप्रैल में 114.48 डॉलर प्रति बैरल रहा। साफ है कि चार महीने बाद भारत फिर 100 डॉलर से ज्यादा कीमत चुका रहा है।
इस वजह से ही चालू वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल-जुलाई के दौरान आयात बिल 56 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 63.4 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि आयात की मात्रा लगभग पिछले साल के समान (8.19 करोड़ टन) ही रही है।
अप्रैल-जून तिमाही में ही बिल करीब 50 अरब डॉलर हो चुका था। वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का कच्चा तेल आयात बिल 121.8 अरब डॉलर रहा था, जो इसके पिछले वर्ष के 137.2 अरब डॉलर से कम था।
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