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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव जमीन सौदों को लेकर चर्चा में हैं. दरअसल, एक अंग्रेजी अखबार में आरोप लगाया गया है कि सीएम मोहन यादव और उनके परिवार के लोगों ने सरकारी योजनाओं का फायदा उठाने के लिए बड़े पैमाने पर जमीनें खरीदी हैं. इसके बाद मंत्रियों की संपत्ति से जुड़े नियमों पर बात हो रही है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर को भी नेता को मंत्री बनने के बाद किन नियमों को पालन करना होता है और वो अपने बिजनेस में किन बातों का ध्यान रखना होता है.
सरकार के कोड ऑफ कंडक्ट के अनुसार, राज्य में सभी मंत्रियों को मुख्यमंत्री को और केंद्रीय मंत्रियों को प्रधानमंत्री को हर साल संपत्ति की जानकारी देनी होती है. वहीं, मुख्यमंत्रियों को जानकारी पीएम या गृह मंत्री को देनी होती है. मंत्रियों को ओर से अचल संपत्ति, शेयर और डिबेंचर, नकद, ज्वेलरी की अनुमानित जानकारी देनी होगी. इसके साथ ही मंत्री बनने के बाद उसे अपने बिजनेस के संचालन, प्रबंधन से अपने सभी रिलेशन खत्म कर लेने चाहिए. जब तक कोई व्यक्ति मंत्री रहता है तो उसे हर साल 31 अगस्त तक प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को पिछले फाइनेंशियल ईयर के लिए अपनी संपत्तियों और देनदारियों की जानकारी देनी होगी.
– साथ ही मंत्री को प्रबंधन में अपनी हिस्सेदारी को ट्रांसफर कर देना चाहिए, लेकिन वो अपने पति या पत्नी को नहीं होना चाहिए. अगर कोई ऐसा व्यापार है, जिसमें सरकार के साथ मिलकर काम करना हो या फिर लाइसेंस, परमिट, पट्टा, कोटा, टेंडर जैसा काम है तो उससे खुद को दूर कर लेना चाहिए.
इसके अलावा सरकार से कोई अचल संपत्ति खरीदने या सरकार को कोई अचल संपत्ति बेचने से परहेज करना होगा. अगर कोई संपत्ति सामान्य प्रक्रिया से अधिग्रहित किया जाती है तो अलग बात है. साथ ही मंत्री बनने के बाद कोई भी व्यापार शुरू करने या नए व्यापार में शामिल करने से बचना चाहिए.
परिवार वाले क्या नहीं कर सकते?
उनके परिवार के लोग भी ऐसा व्यापार ना करें, जो सरकार से जुड़ा हो या फिर परमिट, लाइसेंस, पट्टों आदि से जुड़ा ना हो. अगर कोई परिवार का कोई सदस्य कोई अन्य व्यवसाय स्थापित करता है या उसके संचालन एवं प्रबंधन में शामिल होता है, तो मंत्री को इसकी जानकारी पीएम और सीएम को देनी होगी.
मंत्री को क्या नहीं करना चाहिए?
– स्वयं या अपने परिवार के किसी सदस्य के माध्यम से किसी भी उद्देश्य के लिए, चाहे वह राजनीतिक, धर्मार्थ या अन्य कोई उद्देश्य हो, कोई योगदान (चंदा) स्वीकार नहीं करना चाहिए. किसी पंजीकृत संस्था, धर्मार्थ निकाय, किसी सार्वजनिक प्राधिकरण की ओर से मान्यता प्राप्त संस्थान या किसी राजनीतिक दल के लिए कोई धनराशि अथवा चेक उसे प्रस्तुत किया जाता है, तो उसे उस संगठन को भेज देना चाहिए जिसके लिए वह निर्धारित है. धन जुटाने की किसी गतिविधि से स्वयं को नहीं जोड़ना चाहिए.
साथ ही केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के मंत्री और उनके पार्टनर पीएम की बिना स्वीकृति के भारत या विदेश में किसी विदेशी सरकार या किसी विदेशी संगठन के अधीन काम नहीं कर सकते. अगर कोई पहले से है तो उसकी जानकारी देनी होगी. किसी भी विदेशी मिशन में रोजगार पूर्ण प्रतिबंधित होना चाहिए.
गिफ्ट को लेकर क्या है नियम?
किसी मंत्री को निकट संबंधियों से प्राप्त उपहारों को छोड़कर कोई मूल्यवान उपहार स्वीकार नहीं करना चाहिए. न ही उसके परिवार के किसी सदस्य को ऐसे किसी व्यक्ति से कोई उपहार स्वीकार करना चाहिए जिसके साथ मंत्री के आधिकारिक संबंध या लेन-देन हों. मंत्री को ऐसा कोई लोन नहीं लेना चाहिए और न ही अपने परिवार के किसी सदस्य को ऐसा लोन लेने की अनुमति देनी चाहिए, जिसकी प्रकृति ऐसी हो कि उससे उसके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में असुविधा उत्पन्न हो या उस पर प्रभाव पड़ने की संभावना हो.
विदेश में मिलने वाले गिफ्ट को लेकर क्या है नियम?
कोई मंत्री विदेश यात्रा के दौरान या भारत में विदेशी गणमान्य व्यक्तियों से उपहार प्राप्त कर सकता है. ऐसे उपहार दो कैटेगरी में आते हैं. पहली कैटेगरी में वे उपहार शामिल होंगे, जो प्रतीकात्मक प्रकृति के हों, जैसे तलवार, पोशाक आदि. ये अपने पास रख सकता है. दूसरी कैटगरी में वे उपहार शामिल होंगे जो प्रतीकात्मक प्रकृति के नहीं हैं. अगर किसी गिफ्ट का मूल्य 5,000 रुपये से कम है, तो मंत्री उसे अपने पास रख सकता है. ज्यादा है तो सरकार को देना होगा.
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