तीरंदाजी : कंपाउड वर्ग में महिला, पुरुष और मिश्रित टीम बनी चैंपियन, चिकिता-साहिल जाधव की मिश्रित जोड़ी को ओलंपिक टिकट मिला भारतीय धनुर्धरों की स्वर्णिम हैट्रिक
टीम स्पर्धाओं में खेलते समय हमें पूरा भरोसा था। मुझे अपने साथियों पर भरोसा है और उन्हें स्वयं पर भरोसा है। हम किसी भी हालात में अपना श्रेष्ठ निशाना लगाएंगे।
-साहिल
हम एक-दूसरे को आगे बढ़ाते रहे और लगातार कहते रहे कि हमें सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है। अगर हमारे में से किसी का एक खराब शॉट, यानी नौ अंक का निशाना भी लगा तो हमने एक-दूसरे का हौसला बढ़ाया।
-पृथिका
महिला टीम का स्वर्ण पदक जीतने के बाद मिश्रित टीम के फाइनल के लिए मेरे पास ज्यादा समय नहीं था। मैं जल्दबाजी में थी और हमें खुद को तैयार करने के लिए बस थोड़ा समय मिला।
-चिकिता
प्रतिस्पर्धा बहुत अच्छी रही, सेमीफाइनल और फाइनल दोनों मुकाबलों में। हमने टीम के रूप में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और स्वर्ण पदक जीता इसलिए मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।
-ज्योति
Nagoya, Agency. भारतीय धनुर्धरों ने एशियाई खेलों में बुधवार को यादगार बना दिया। कंपाउंड तीरंदाजों ने दबाव में शानदार संयम दिखाते हुए टीम स्पर्धाओं में स्वर्णिम क्लीन स्वीप कर दिया। देश की पुरुष, महिला और मिश्रित टीम ने अपने-अपने खिताब बरकरार रखते हुए स्वर्ण पदक की हैट्रिक लगाई।
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पहले देश बना भारत : इस शानदार प्रदर्शन में चिकिता तनीपार्थी और साहिल जाधव की मिश्रित जोड़ी का स्वर्ण पदक जीतना खास रहा क्योंकि इसके साथ भारत ने ओलंपिक कोटा स्थान भी हासिल किया। भारत इस तरह 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के कंपाउंड मिश्रित टीम वर्ग के लिए क्वालीफाई करने वाला पहला देश बन गया। कंपाउंड तीरंदाजी को लॉस एंजिलिस खेलों में पहली बार ओलंपिक में शामिल किया जाएगा।
तीरंदाजी में भारत के स्वर्णिम अभियान की शुरुआत ज्योति सुरेखा वेन्नम, चिकिता और पृथिका प्रदीप की महिला तीरंदाजी टीम ने की। इस तिकड़ी ने फाइनल में चीन को 238-234 से शिकस्त दी जबकि अभियान का अंत कुशल दलाल, साहिल जाधव और गणेश मणिरत्नम थिरुमुरु की पुरुष टीम ने किया। इस बीच चिकिता और साहिल ने मिश्रित टीम में भी स्वर्ण जीता। इस तरह से दोनों ने दो-दो स्वर्ण पदक जीते।
एक अंक से चीन को पछाड़ा : भारतीय पुरुष टीम फाइनल में दो अंक से पीछे थी लेकिन उसने अंतिम चरण में वापसी करते हुए चीन को 238-237 से हराकर रोमांचक जीत दर्ज की। चीन की टीम में जियाहाओ लियाओ, जिनयी लियू और जिंग्यू शी शामिल थे। चीन को रजत पदक मिला। भारत नौ अंक के दो निशानों के कारण पहले चरण के बाद 58-60 से पीछे था। हालांकि अगले चरण में भारत ने छह परफेक्ट 10 के निशाने लगाए जिससे दूसरे चरण के बाद टीम 118-120 से पीछे थी। तीसरे चरण के बाद भारत ने अंतर घटाकर 178-179 हो गया।
फिर चीन के जियाहाओ लियाओ ने आठ अंक का निशाना लगाया जबकि भारत ने अंतिम छह शॉट में शानदार प्रदर्शन करते हुए रोमांचक जीत दर्ज की। चीन की टीम में वुनियर, यूए वांग और फांगयाओ वेई शामिल थीं जिन्होंने रजत पदक जीता। दक्षिण कोरिया की पार्क जंगयून, पार्क येरीन और कांग योनसेओ की टीम ने चीनी ताइपे को हराकर कांस्य पदक जीता।
चिकिता-साहिल का ‘परफैक्ट टेन’ : चिकिता-साहिल की भारत की कंपाउंड मिश्रित तीरंदाजी जोड़ी ने इससे पहले फाइनल में रोमांचक शूट ऑफ में दक्षिण कोरिया को हराकर स्वर्ण पदक जीता और 2028 ओलंपिक कोटा स्थान हासिल किया। चिकिता-साहिल ने जंगयून पार्क और चोई यून ग्यू को शूट ऑफ में 158-157 से हराकर स्वर्ण अपने नाम किया। चीन की फांगयाओ एफ वेई और जिनयी लियू ने कांस्य जीता। चिकिता-साहिल दोनों ने 10 अंक के निशाने लगाए जबकि चोई केवल नौ अंक हासिल कर सके जिससे भारत का स्वर्ण पक्का हो गया।
विश्व रिकॉर्ड की बराबरी : ज्योति, चिकिता और पृथिका की भारतीय महिला कंपाउंड तीरंदाजी टीम ने फाइनल में विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए चीन को 238-234 से चित किया। ज्योति पिछले एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा थीं। भारतीय टीम ने फाइनल में दबदबा कायम रखते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया। इस उपलब्धि के दौरान टीम ने दक्षिण कोरिया के विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की। दक्षिण कोरिया ने 2014 के इंचियोन एशियाई खेलों में यह स्कोर बनाया था।
महिला तिकड़ी का दबदबा : इससे पहले भारत की महिला तिकड़ी ने फाइनल में शानदार शुरुआत की और लगातार परफेक्ट 10 के निशाने लगाते हुए पहला चरण 60-58 से अपने नाम किया। गत चैंपियन भारतीय टीम ने दबदबा जारी रखते हुए दूसरा चरण भी 60-58 से जीता और अपनी बढ़त बढ़ाई। इसके बाद अंतिम चरण से पहले भारत कुल 178-176 से आगे था।
दबाव में चीन की टीम ने दो बार नौ अंक हासिल किए जबकि भारत ने छह परफेक्ट 10 के साथ एक और शानदार चरण पूरा किया। इस तरह भारतीय टीम ने न केवल अपना खिताब बरकरार रखा बल्कि विश्व रिकॉर्ड की भी बराबरी की। पिछले सत्र में भारत ने तीरंदाजी में पांच स्वर्ण पदक जीते थे।
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