चिकित्सा क्षेत्र के नोबेल का ऐलान, इन तीन वैज्ञानिकों को मिला पुरस्कार, जानिए क्या है इनकी खोज – Bharat24live

Yuvraj Singh
Date: 05-10-26 16:14
Medicine Noble Prize 2026: फिजियोलॉजी या मेडिसिन के क्षेत्र में 2026 के नोबेल पुरस्कार का ऐलान हो गया है. इस साल यह सम्मान कार्ल डेइसेरोथ, पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेल को संयुक्त रूप से दिया गया है. नोबेल कमिटी के मुताबिक, तीनों वैज्ञानिकों को “लाइट-गेटेड आयन चैनलों और ऑप्टोजेनेटिक्स” से जुड़ी खोजों के लिए सम्मानित किया गया है. उनकी रिसर्च ने वैज्ञानिकों को जीवित मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाओं की गतिविधि को प्रकाश की मदद से नियंत्रित और अध्ययन करने का रास्ता दिया.
शैवाल से मिली प्रोटीन की खोज बनी आधार
इस वैज्ञानिक उपलब्धि की शुरुआत एक कोशिकीय शैवाल में प्रकाश के प्रति प्रतिक्रिया करने वाले प्रोटीन की खोज से हुई. पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेल के काम ने चैनलरोडोप्सिन जैसे लाइट-गेटेड आयन चैनलों को समझने में अहम भूमिका निभाई. इसके बाद कार्ल डेइसेरोथ ने इस तरह के प्रोटीन का इस्तेमाल तंत्रिका कोशिकाओं की गतिविधि को प्रकाश के जरिए नियंत्रित करने के लिए किया. इसी दिशा में विकसित तकनीक को ऑप्टोजेनेटिक्स कहा गया, जिसने न्यूरोसाइंस में नई संभावनाएं खोलीं.
दिमाग को समझने की रिसर्च में आया बदलाव
दिमाग भावनाओं, व्यवहार और शरीर की कई प्रक्रियाओं को कैसे नियंत्रित करता है, यह वैज्ञानिकों के सामने लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रहा है. 20वीं सदी में शोधकर्ताओं ने मस्तिष्क के अलग-अलग हिस्सों और उनके कार्यों को समझने की कोशिश की, लेकिन किसी खास तंत्रिका कोशिका की गतिविधि और उसके व्यवहार के बीच सीधा कारण-परिणाम संबंध स्थापित करना मुश्किल था. ऑप्टोजेनेटिक्स ने इस दिशा में एक नया प्रयोगात्मक तरीका उपलब्ध कराया, जिससे वैज्ञानिक खास न्यूरॉन्स की गतिविधि को नियंत्रित करके उनके प्रभावों का अध्ययन कर सकते हैं.
यादों और व्यवहार को समझने में मदद
ऑप्टोजेनेटिक्स ने न्यूरोसाइंस के शोध को काफी प्रभावित किया है. इस तकनीक की मदद से वैज्ञानिक जीवित मस्तिष्क में अलग-अलग तंत्रिका कोशिकाओं की भूमिका का अध्ययन कर सकते हैं और यह समझने की कोशिश करते हैं कि न्यूरल सर्किट किस तरह व्यवहार और अन्य मस्तिष्कीय प्रक्रियाओं से जुड़े हैं. नोबेल कमिटी के अनुसार, इस विधि का इस्तेमाल दुनियाभर की प्रयोगशालाओं में मस्तिष्क के रहस्यों को समझने के लिए किया जा रहा है.
इलाज की संभावनाओं तक पहुंची यह खोज
इस रिसर्च का असर केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है. ऑप्टोजेनेटिक्स का इस्तेमाल तंत्रिका और मानसिक विकारों से जुड़े न्यूरल सर्किट को समझने के लिए किया जा रहा है. इसके अलावा दृष्टिबाधित लोगों में दृष्टि बहाल करने की संभावनाओं पर भी इस तकनीक से जुड़े शोध चल रहे हैं. यानी प्रकाश की मदद से न्यूरॉन्स को नियंत्रित करने वाली यह खोज मस्तिष्क को समझने के साथ-साथ भविष्य की चिकित्सा पद्धतियों के लिए भी नए रास्ते खोल रही है.
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