वैश्विक चीनी बाजार में कमी की आशंकाओं के चलते कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे ग्लोबल मार्केट की चिंताएं बढ़ी हैं। ब्राजील जैसे प्रमुख उत्पादकों पर अल नीनो क …और पढ़ें
वैश्विक चीनी कीमतें कमी की आशंका से बढ़ीं।
विश्लेषकों ने चीनी घाटे का अनुमान काफी बढ़ाया।
भारत का बढ़ता उत्पादन वैश्विक आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण।
नई दिल्ली| चीनी की कीमत और सप्लाई की चिंता अब केवल घरेलू बाजारों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि ग्लोबल मार्केट में भी इसका असर देखने को मिल रहा है। बीते दिनों न्यूयॉर्क स्थित इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज (ICE) पर वैश्विक चीनी कीमतें 15 अमेरिकी सेंट प्रति पाउंड के स्तर को पार कर गईं, क्योंकि कारोबारियों को आशंका है कि बाजार में चीनी की कमी (deficit) हो सकती है।
हालांकि, कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि भू-राजनीतिक तनावों में कमी और अपेक्षा से बेहतर आपूर्ति के कारण मौजूदा तिमाही और अगली तिमाही में वैश्विक चीनी कीमतों (Sugar Price) में गिरावट आ सकती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दूसरी ओर जारी एल नीनो मौसम प्रभाव और फिर से बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव उत्पादन और आपूर्ति के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। बीते मंगलवार को न्यूयॉर्क में अक्टूबर डिलीवरी वाले चीनी कॉन्ट्रैक्ट (October Sugar Contracts) 15.10 सेंट प्रति पाउंड (331 डॉलर प्रति टन) पर कारोबार कर रहे थे। वहीं लंदन में अक्टूबर डिलीवरी के लिए सफेद चीनी का भाव 475.50 डॉलर प्रति टन रहा।
कोव्रिग एनालिटिक्स (Covrig Analytics) ने चीनी बाजार में 3 लाख टन की कमी का अनुमान लगाया है, जबकि पहले उसने 1 लाख टन सरप्लस का अनुमान जताया था। एक दूसरी एनालिसिस फर्म ग्रीन पूल कमोडिटी स्पेशलिस्ट्स ने भी अपने अनुमान में संशोधन करते करते हुए 17.6 लाख टन के पहले के अनुमान की तुलना में 33 लाख टन (3.3 मिलियन टन) के घाटे का अनुमान लगाया है।
चीनी उत्पादन के मामले में ब्राजील, थाईलैंड और भारत शीर्ष देशों में शामिल है। ग्लोबल सप्लाई में भी इनकी सबसे बड़ी हिस्सेदारी है। इस साल अलनीनो का प्रभाव दुनिया के कई देशों में देखने को मिला है। ईकाई रिसर्च एजेंसी BMI का अनुमान है कि 2026-27 सीजन में ब्राजील का चीनी उत्पादन 42 मिलियन टन रहेगा, जो साल-दर-साल आधार पर 4.1 प्रतिशत कम है।
ये भी पढ़ें: भारत-बांग्लादेश व्यापार में फिर आई तकरार, पड़ोसी ने लौटाई चावल की खेप; व्यापारियों ने कहा- चुकानी होगी भारी कीमत!
भारत दुनिया चीनी के उत्पादन और निर्यात में दुनिया के सबसे बड़े देशों में शामिल है। चीनी की कमी के अनुमान के बीच भारत ने निर्यात पर रोक लगा दी थी। BMI ने कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि भारत का चीनी उत्पादन 2026-27 सीजन में 33 मिलियन टन तक पहुंच जाएगा, जो पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक होगा।