चीन के J-16 ने Rafale से भिड़कर किया युद्धाभ्यास, भारत की नजर क्यों टिकी है इस हवाई ड्रिल पर? – India.com

चीन और मिस्र के बीच चल रहे ‘Eagles of Civilisation’ सैन्य अभ्यास में हुई एक खास हवाई ड्रिल ने भारत का ध्यान खींचा है. इस अभ्यास में पहली बार चीन के J-16 लड़ाकू विमान ने फ्रांस के राफेल के साथ आमने-सामने युद्ध अभ्यास में हिस्सा लिया. दोनों देशों के पायलटों ने वास्तविक युद्ध जैसी परिस्थितियों में अपनी क्षमताओं को परखा.

यह अभ्यास ऐसे समय हुआ है जब एशिया में लड़ाकू विमान और हवाई हमले का सामना करने की क्षमता को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है. भारत के लिए इस ड्रिल की अहमियत इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि पाकिस्तान पहले से चीनी J-10C और JF-17 जैसे लड़ाकू विमान इस्तेमाल करता है और J-16 में भी उसकी दिलचस्पी बताई जाती रही है.

अभ्यास का दूसरा संस्करण 22 अगस्त से शुरू हुआ. सोमवार को चीनी J-16 और मिस्र के Rafale विमानों ने आमने-सामने की हवाई लड़ाई की ड्रिल में हिस्सा लिया. चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी की तरफ से जारी वीडियो में दोनों विमानों को नजदीकी हवाई युद्धाभ्यास करते देखा गया.

J-16 और राफेल दोनों 4.5-पीढ़ी का लड़ाकू विमान हैं. इनमें आधुनिक रडार, एवियोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम जैसी तकनीकें मौजूद हैं. हालांकि दोनों की डिजाइन और भूमिका में अंतर है. J-16 चीन का ये दो इंजन वाला, दो सीटों वाला बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है. इसे एविएशन इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन ऑफ चाइना (AICP)ने विकसित किया है. भारी आकार और ज्यादा हथियार ले जाने की क्षमता के कारण इसे चीन के प्रमुख लड़ाकू विमान में गिना जाता है. दूसरी तरफ राफेल को भी बहु-भूमिका वाले मिशन के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
भारत के लिए इस ड्रिल की सबसे बड़ी वजह चीन-पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य साझेदारी है. पाकिस्तान के पास चीनी J-10C फाइटर जेट हैं और उसने J-16 खरीदने में भी रुचि दिखाई है. ऐसे में J-16 की वास्तविक युद्ध क्षमता को समझना भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठान के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सैन्य झड़पों में भारतीय Rafale और पाकिस्तान के J-10 एयरक्राफ्ट चर्चा में रहे थे. ऐसे में चीन के ज्यादा भारी और आधुनिक J-16 की राफेल के खिलाफ नकली युद्ध प्रदर्शन पर भारतीय विशेषज्ञों की नजर होना स्वाभाविक है. हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण अंतर भी है. भारतीय वायुसेना के राफेल विमानों में भारत-विशिष्ट अपग्रेड किए गए हैं. इसलिए मिस्र के राफेल के प्रदर्शन को सीधे भारतीय राफेल की क्षमता का पैमाना नहीं माना जा सकता.
चीन-मिस्र युद्धाभ्यास को सिर्फ दो देशों की नियमित सैन्य गतिविधि के तौर पर नहीं देखा जा रहा. चीन हाल के समय में ऐसे देशों के साथ सैन्य अभ्यास बढ़ा रहा है, जिनकी वायुसेनाएं पश्चिमी मूल के लड़ाकू विमान का इस्तेमाल करती हैं. इससे चीनी पायलटों को अलग-अलग डिजाइन और तकनीक वाले एयरक्राफ्ट के खिलाफ ट्रेनिंग का अवसर मिलता है. थाईलैंड के साथ चीन का हालिया सैन्य अभ्यास भी इसी व्यापक रणनीति का उदाहरण माना जा रहा है. थाईलैंड की एयरफोर्स में अमेरिकी F-16 और स्वीडिश ग्रिपेन जैसे फाइटर जेट शामिल हैं.
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हल्द्वानी से दिल्ली के बड़े न्यूजरूम तक… तनुजा जोशी, उत्तराखंड के शांत और खूबसूरत शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखती हैं. देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी … और पढ़ें
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