India China New Trade War? चावल के बाद अब चीन ने भारत से भेजी गई सूखी लाल मिर्च की खेप को भी लेने से मना कर दिया है। यह खबर भारतीय निर्यातकों और किसानों के लिए चिंता का विषय बन गई है। चीन के इस कदम से भारतीय मसाला बाजार और खासकर मिर्च का निर्यात करने वाले व्यापारियों में भारी बेचैनी है। निर्यातकों को डर है कि भारी मात्रा में शिपमेंट रिजेक्ट होने से उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
‘द हिंदू बिजनेसलाइन’ की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने हाल ही में भारत से आयात की गई सूखी लाल मिर्च की तीन खेपों को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही, चीन ने इस सौदे से जुड़ी भारत की तीन निर्यातक कंपनियों पर अस्थायी रूप से रोक भी लगा दी है।
चीन का दावा है कि भारतीय मिर्च में मेथामिडोफोस नामक कीटनाशक के अंश तय सीमा से बहुत ज्यादा पाए गए हैं। यह एक ऐसा केमिकल है जो इंसानी नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकता है। दिलचस्प बात यह है कि भारत में किसानों के लिए इस कीटनाशक का इस्तेमाल आधिकारिक तौर पर मंजूर ही नहीं है, जिससे इन आरोपों पर सवाल उठ रहे हैं।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पिछले ही महीने चीन ने भारत से गए गैर-बासमती चावल के लगभग 70 कंसाइनमेंट खारिज कर दिए थे। तब चीन ने कहा था कि भारतीय चावल में जेनेटिकली मॉडिफाइड (GMO) तत्व हैं। हालांकि, भारतीय निर्यातकों ने तब भी इन आरोपों को सिरे से नकार दिया था। बैक-टू-बैक इन घटनाओं से ऐसा लग रहा है कि चीन जानबूझकर व्यापारिक बाधाएं खड़ी कर रहा है।
एक्सपर्ट्स और बाजार के जानकारों का मानना है कि फूड सेफ्टी सिर्फ एक बहाना हो सकता है और इसके पीछे चीन की एक सोची-समझी व्यापारिक रणनीति है। पिछले दो सालों में जब मिर्च के दाम कम थे, तब चीन ने भारत से भारी मात्रा में मिर्च खरीद कर अपना स्टॉक फुल कर लिया था। ऐसा माना जा रहा है कि चीन अब ‘कीटनाशक’ का बहाना बनाकर मिर्च की मौजूदा कीमतों को दोबारा तय करने का दबाव बना रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जो खेप खारिज की गई है, उसे चीन ने अब तक भारत को वापस नहीं भेजा है, बल्कि उसकी कीमत कम कराने को लेकर मोलभाव किया जा रहा है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा मिर्च निर्यातक है और चीन इसका सबसे बड़ा खरीदार है। चीन मुख्य रूप से भारत से ‘तेजा’ किस्म की मिर्च खरीदता है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत ने चीन को लगभग 2.36 लाख टन मिर्च का निर्यात किया, जो पिछले साल के मुकाबले 31 प्रतिशत ज्यादा है और अब तक का सबसे ज्यादा आंकड़ा है। इस फाइनेंशियल ईयर में भारत से कुल मिर्च का निर्यात 19 प्रतिशत बढ़कर 7.15 लाख टन हो गया, जबकि FY24 में यह 6.01 लाख टन था। चीन में इसकी मांग मुख्य रूप से ओलियोरेसिन निकालने वाले उद्योग, फूड प्रोसेसर और पाक-कला क्षेत्र की वजह से है। ओलियोरेसिन बनाने के लिए यह देश मुख्य रूप से भारत से ‘तेजा’ किस्म की मिर्च का आयात करता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, व्यापारिक सूत्रों ने बताया कि चीन ने 2024-25 में भारतीय मिर्च की खरीद में काफी बढ़ोतरी की, जिसका फायदा उसने कम घरेलू कीमतों और स्टॉक जमा करने के लिए उठाया। हालांकि, खबर है कि इस साल मांग में कमी आई है, जिसकी वजह पिछले साल का बचा हुआ ज्यादा स्टॉक और भारत में फसल कम होने के कारण मिर्च की कीमतों में बढ़ोतरी है।
अनुमान है कि 2025-26 में अब तक चीन को मिर्च के लगभग 3,000 कंटेनर भेजे जा चुके हैं। इनमें से 10-15 प्रतिशत में क्वालिटी से जुड़ी समस्याएं देखी गईं, जैसे कि जरूरत से ज्यादा नमी और कीटनाशकों के अवशेष की चिंता। रिपोर्ट में कहा गया है कि मिर्च की बढ़ती कीमतों के कारण चीनी खरीदार सप्लायर्स से कम कीमत की मांग कर रहे हैं, जिससे प्रोडक्ट की क्वालिटी की ज्यादा बारीकी से जांच हो रही है। ज्यादा नमी एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है, जिसकी वजह फसल कटाई के बाद की हैंडलिंग और क्वालिटी-कंट्रोल के तरीकों में कमियां हैं।
चिंताओं के बावजूद, खबर है कि प्रभावित खेप में से कोई भी वापस नहीं की गई है। इसके बजाय, इम्पोर्टर और एक्सपोर्टर क्वालिटी में कमी की भरपाई के लिए कीमत में छूट पर बातचीत कर रहे हैं। कुल मिलाकर, क्वालिटी चेक के नाम पर चीन की यह सख्ती दोनों देशों के बीच एक नई व्यापारिक रस्साकशी की शुरुआत लग रही है, जिसका खामियाजा भारतीय किसानों और कारोबारियों को उठाना पड़ सकता है।
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