छत्तीसगढ़: माओवाद प्रभावित रहे अबूझमाड़ के गांवों में पहली बार लहराया तिरंगा, गूंजा राष्ट्रगान – jagran.com

छत्तीसगढ़ में माओवाद प्रभावित रहे अबूझमाड़ ने इस बार स्वतंत्रता दिवस पर नया इतिहास रच दिया। दशकों तक माओवाद के आतंक और भय के साये में रहने वाले नौ गांवों में पहली बार आजादी का जश्न मना।
माओवाद प्रभावित रहे अबूझमाड़ के गांवों में पहली बार लहराया तिरंगा (फोटो- सोशल मीडिया)
कभी माओवाद के खौफ में रहने वाले गांवों में लोगों ने मनाया आजादी का जश्न
गत 31 मार्च को क्षेत्र के माओवाद मुक्त होने के बाद यह पहला अवसर है
जेएनएन, नारायणपुर। छत्तीसगढ़ में माओवाद प्रभावित रहे अबूझमाड़ ने इस बार स्वतंत्रता दिवस पर नया इतिहास रच दिया। दशकों तक माओवाद के आतंक और भय के साये में रहने वाले नौ गांवों में पहली बार आजादी का जश्न मना।
कोरसकोडो, हचेकोटी, आदनार, बोटेर, कुमनार, दिवालुर, गुंडेकोट, रेकापाल और रासमेटा में तिरंगा लहराते ही ग्रामीणों के चेहरों पर खुशी, गर्व और नए विश्वास की झलक दिखाई दी। भारत माता की जय के उद्घोष के बीच राष्ट्रीय ध्वज आसमान में लहराता नजर आया।
गत 31 मार्च को क्षेत्र के माओवाद मुक्त होने के बाद यह पहला अवसर है, जब इन गांवों में राष्ट्रीय पर्व खुले तौर पर मनाया गया।
माओवादियों के फरमान और भय ने ग्रामीणों को देश के राष्ट्रीय उत्सवों से दूर कर दिया था। अब हालात बदलने के साथ ग्रामीण लोकतंत्र और मुख्यधारा से जुड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
बोटेर में 120 किलोमीटर का सफर, फिर नौ किलोमीटर पैदलनारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब 120 किलोमीटर दूर स्थित बोटेर गांव तक पहुंचना आज भी आसान नहीं है।
इसके लिए ओरछा विकासखंड मुख्यालय से लगभग 55 किमी दूर कुडमेल पुलिस शिविर तक दोपहिया वाहन से जाना होता है। इसके बाद घने जंगलों, नदी-नालों और कीचड़ भरे पहाड़ी रास्तों से करीब नौ किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ता है।
लगभग 60 की आबादी वाले इस गांव में पहली बार स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराना ग्रामीणों के लिए बेहद भावुक और गौरवपूर्ण क्षण रहा।सुरक्षा शिविर से बढ़ा भरोसाक्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के बाद ग्रामीणों में भरोसा बढ़ा है।
बीते मार्च में सुरक्षा शिविर की स्थापना के बाद अबूझमाड़ के दुर्गम गांवों में प्रशासन और सुरक्षा बलों की पहुंच बढ़ी है। बोटेर की अतिथि शिक्षक सुनीता और कई ग्रामीणों ने बताया कि अब गांव में पहले जैसा डर नहीं है। बच्चे स्कूल जा पा रहे हैं।
तिरंगे के साथ विकास की उम्मीदइन गांवों में तिरंगा केवल राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि बदलते माहौल और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद का प्रतीक बनकर सामने आया है।
बोटेर सहित आसपास के गांवों में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य सुविधाएं, राशन की उपलब्धता और नियमित शिक्षकों की जरूरत बनी हुई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि सुरक्षा के बाद अब विकास की पहुंच भी उनके गांवों तक तेजी से पहुंचेगी।

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News