जंग ख़त्म करने के लिए ईरान के प्रस्ताव में ऐसा क्या है जिसे ट्रंप ने 'पूरी तरह अस्वीकार्य' बताया – BBC

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जंग ख़त्म करने के लिए अमेरिका के प्रस्तावों पर ईरान के जवाब को 'पूरी तरह अस्वीकार्य' बताया है.
ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक़, पाकिस्तान के ज़रिए भेजे गए ईरान के प्रस्ताव में कई मांगें शामिल हैं.
इन मांगों में तुरंत जंग खत्म करने, ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और भविष्य में ईरान पर दोबारा हमला न करने की बात कही गई है.
फ़रवरी में अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे. उसके बाद अप्रैल में अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के मक़सद से लागू युद्धविराम का दोनों पक्षों ने आम तौर पर पालन ही किया है, हालांकि बीच-बीच में गोलीबारी की घटनाएँ होती रही हैं.
इस हफ़्ते की शुरुआत में ट्रंप ने दोहराया था कि ईरान में चल रहा युद्ध 'बहुत जल्द ख़त्म हो जाएगा."
लेकिन इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा है कि ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम (संवर्धित यूरेनियम) के भंडार को 'हटाना' ज़रूरी है, तभी ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध को ख़त्म माना जा सकता है.
सीबीएस के कार्यक्रम '60 मिनट्स' को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा, "अब भी ऐसे यूरेनियम संवर्धन केंद्र हैं जिन्हें तबाह किया जाना बाकी है."
ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक़, ईरान के प्रस्ताव में युद्ध से हुए नुक़सान के लिए मुआवज़े की मांग और होर्मुज़ स्ट्रेट पर ईरान की संप्रभुता पर ज़ोर दिया गया है.
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रविवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने सीधे तौर पर ईरान के प्रस्ताव का ज़िक्र नहीं किया, लेकिन ये ज़रूर कहा, "हम दुश्मन के सामने कभी सिर नहीं झुकाएंगे. बातचीत का मतलब आत्मसमर्पण या पीछे हटना नहीं है."
उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "मैंने अभी ईरान के तथाकथित प्रतिनिधियों का जवाब पढ़ा है. मुझे यह पसंद नहीं आया. यह पूरी तरह अस्वीकार्य है."
अमेरिकी समाचार वेबसाइट एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक़, अमेरिका के 14 बिंदुओं वाले एक ज्ञापन में ईरान के यूरेनियम संवर्धन रोकने, प्रतिबंध हटाने और होर्मुज़ स्ट्रेट से आवाजाही बहाल करने जैसे प्रावधान शामिल हैं.
रिपोर्ट में दो अमेरिकी अधिकारियों और दो अन्य सूत्रों का हवाला दिया गया है. इनके मुताबिक़, ज्ञापन में रखी गई कई शर्तें अंतिम समझौता होने पर ही लागू होंगी.
ईरान ने अब भी रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद करके रखा है, जिसके कारण दुनिया भर में तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी हुई है. आम तौर पर दुनिया का लगभग 20% तेल और एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) इसी रास्ते से गुज़रता है.
दूसरी ओर, अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी लागू कर उस पर अपनी शर्तें मानने का दबाव बना रहा है. इस क़दम से ईरान बेहद नाराज़ है.
इसराइल और अमेरिका ने 28 फ़रवरी को ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए थे. ईरान युद्ध में युद्धविराम पिछले महीने लागू हुआ था.
अपने सीबीएस इंटरव्यू में नेतन्याहू ने यह भी कहा कि वह इसराइली सेना को मिलने वाली अमेरिकी आर्थिक सहायता को घटा कर ज़ीरो तक लाना चाहते हैं.
उन्होंने कहा, "हमें हर साल 3.8 अरब डॉलर मिलते हैं. मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि हम बाकी सैन्य सहायता पर अपनी निर्भरता ख़त्म करें. आइए अभी शुरुआत करें और अगले एक दशक में इसे पूरा कर लें."
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ईरान ने अपने पड़ोसी देशों को चेतावनी दी है कि अगर वो अमेरिका की बात मानते हैं तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.
समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक़, सैन्य प्रवक्ता मोहम्मद अकरमीनिया ने कहा कि 'होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाज़ अगर ईरान से सहयोग नहीं करते हैं तो बुरे नतीजे के लिए तैयार रहें.'
अकरमिनिया ने कहा, "अमेरिकी अपनी नौसैनिक ताक़त तैनात करके उत्तरी हिंद महासागर के इस विशाल क्षेत्र को कभी वास्तविक नाकेबंदी में नहीं बदल पाएंगे."
अमेरिका की खाड़ी क्षेत्र में बड़ी सैन्य मौजूदगी है और उसके ठिकाने क़तर, बहरीन, कुवैत, यूएई, सऊदी अरब और ओमान में हैं.
शनिवार को घोषणा की गई कि ब्रिटेन की रॉयल नेवी मध्य-पूर्व में एक युद्धपोत भेज रही है, जो होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाज़ों की सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे एक 'अंतरराष्ट्रीय मिशन' में शामिल हो सकता है
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मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर और फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इस समुद्री सुरक्षा मिशन की अगुवाई कर रहे हैं. स्टार्मर ने कहा है कि यह मिशन तभी शुरू होगा जब क्षेत्र में लड़ाई ख़त्म हो जाएगी.
इसके जवाब में ईरान ने रविवार को चेतावनी दी कि होर्मुज़ स्ट्रेट में किसी भी फ़्रांसीसी या ब्रिटिश तैनाती का तुरंत और निर्णायक जवाब दिया जाएगा.
इसके बाद मैक्रों ने कहा कि फ़्रांस ने 'कभी नौसैनिक तैनाती की कल्पना नहीं की थी', बल्कि वह एक ऐसे सुरक्षा मिशन की बात कर रहा था जो 'ईरान के साथ तालमेल में' होगा.
ईरान ने खाड़ी में अमेरिका के अरब सहयोगियों के ख़िलाफ़ भी जवाबी कदम उठाए हैं.
ब्रिटेन के यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) ने बताया कि क़तर की राजधानी दोहा से लगभग 43 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में एक मालवाहक जहाज़ 'अज्ञात प्रोजेक्टाइल' की चपेट में आ गया, जिससे उसमें आग लग गई, हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ.
यूकेएमटीओ अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की निगरानी करता है.
बाद में ईरान की फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने एक अज्ञात सूत्र के हवाले से कहा कि वह जहाज़ अमेरिका का था.
रविवार को ही कुवैत ने कहा कि उसके हवाई क्षेत्र में कई ड्रोन दाख़िल हुए थे लेकिन उसकी सेना ने उनको मार गिराया.
कुछ घंटों बाद यूएई ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान की ओर से आए दो ड्रोन को मार गिराए.
सोमवार को 40 से ज़्यादा देशों के रक्षा मंत्री होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाज़ों की सुरक्षा के लिए ब्रिटेन के नेतृत्व वाली योजना पर चर्चा करेंगे
ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हिली और फ़्रांस की रक्षा मंत्री कैथरीन वोट्रन इस बैठक की संयुक्त अध्यक्षता करेंगे. उम्मीद है कि इसमें हिस्सा ले रहे देश संघर्ष समाप्त होने के बाद समुद्री यातायात की निगरानी की रूपरेखा बताएंगे.
छह मई को डोनॉल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा था कि अगर ईरान किसी समझौते पर राज़ी नहीं होता, तो 'बमबारी शुरू होगी, और अफ़सोस कि यह पहले से कहीं ज़्यादा बड़े स्तर और तीव्रता की होगी.'
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