केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के लिए मध्यप्रदेश समेत देश के अधिकांश राज्यों में नई समय-सारिणी घोषित कर दी है। अब जनगणना का काम 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक चलेगा।
इसके बाद 1 से 5 मार्च तक पुनरीक्षण दौर संचालित होगा। पहले जनगणना के लिए 9 से 28 फरवरी तक का समय तय किया गया था। नई समय-सारिणी के तहत निर्धारित अवधि में 15 दिन की वृद्धि की गई है।
एमपी के जनगणना निदेशक संजीव श्रीवास्तव के अनुसार भारत सरकार ने जनगणना के लिए तय समय-सीमा बढ़ा दी है। इसका नोटिफिकेशन भी जारी हो गया है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के लिए जनगणना की तारीखों की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। 30 अक्टूबर को मध्यप्रदेश समेत अन्य राज्यों के लिए भी कार्यक्रम तय कर दिया गया।
राजपत्र में अधिसूचना जारी
भारत के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना के मुताबिक, यह कार्यक्रम देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगा। हालांकि, मणिपुर को फिलहाल इससे अलग रखा गया है। गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और लद्दाख में भी इस कार्यक्रम के तहत अलग व्यवस्था रहेगी। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के हिमाच्छादित असमकालिक क्षेत्रों को भी निर्धारित कार्यक्रम से अलग रखा गया है।
केंद्र सरकार ने यह अधिसूचना जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 3 और जनगणना नियमावली, 1990 के नियम 6क और 6ख के तहत जारी की है। अधिसूचना में जनगणना की अवधि 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 और पुनरीक्षण की अवधि 1 से 5 मार्च 2027 निर्धारित की गई है।
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