जब डेटा वड़ा पाव के दाम पर मिला, Jio ने कैसे जोड़ा एक अरब सपनों को – AajTak

कभी सोचा है कि अगर अचानक आपके फ़ोन का नेटवर्क चला जाए, तो आपको कैसा लगेगा? अब ज़रा सोचिए कि ऐसे इलाके में रहना कैसा होगा जहां कभी कोई नेटवर्क पहुंचा ही नहीं. रिलायंस ने इसी सवाल को अपना अगला बड़ा सपना बनाया. देश की सबसे बड़ी रिफ़ाइनरी बनाने के बाद अब वह चाहता था कि संचार हर भारतीय के लिए आसान और सस्ता हो, इस सपने का नाम था Jio.
2016: जब बदली बाज़ार की तस्वीर
 
साल 2016 में Jio ने टेलीकम्युनिकेशन बाजार में क़दम रखा और आते ही एक ऐसी बात हुई जिसने सबको चौंका दिया, वॉइस कॉल मुफ़्त हो गईं, डेटा की क़ीमत इतनी कम रखी गई कि वह वड़ा पाव के दाम पर मिलने लगा.
वड़ा पाव, जो आम आदमी का सबसे सुलभ नाश्ता है, यानी इंटरनेट अब कुछ लोगों की चीज़ नहीं रहा, वह हर आम आदमी की जेब की पहुंच में आ गया.
170 दिन, 10 करोड़ लोग
इसके बाद जो हुआ, वह हैरान करने वाला था, सिर्फ़ 170 दिनों में 10 करोड़ भारतीय Jio से जुड़ गए. यानी हर सेकंड सात लोग.
इसे ऐसे समझिए, एक मिनट में 60 सेकंड होते हैं, तो हर मिनट सैकड़ों नए लोग इस नेटवर्क पर आ रहे थे, और यह सिलसिला दिन-रात, हफ़्तों तक चलता रहा.
155वें नंबर से दुनिया के शीर्ष देशों में
Jio के आने से पहले मोबाइल ब्रॉडबैंड के मामले में भारत की रैंकिंग 155वीं थी, यानी हम बहुत पीछे थे. पर कुछ ही महीनों में भारत मोबाइल ब्रॉडबैंड के मामले में दुनिया के चुनिंदा शीर्ष देशों में शामिल हो गया, इतनी तेज़ छलांग वाक़ई कमाल की थी, वहां भी पहुंचा, जहां कोई नहीं पहुंचा था. 
Jio की कहानी का सबसे दिल छू लेने वाला हिस्सा यह है कि वह सिर्फ़ बड़े शहरों पर नहीं रुका, वह जंगल वाले इलाक़ों तक गया, वह पहाड़ों की चोटियों तक पहुंचा, वह उन आदिवासी बस्तियों तक भी पहुंचा जहां पहले कभी कोई नेटवर्क नहीं पहुंचा था.
आज भी कई दूर-दराज़ के गांवों में Jio ही वह एकमात्र ज़रिया है जिससे लोग अपनों से जुड़े रहते हैं. किसी स्वास्थ्य आपातकाल में वही उनकी “सर्वाइवल किट” है और सबसे अहम बात यह कि वही उनके लिए दुनिया भर के मौक़ों की एक खिड़की है.
यह भी पढ़ें: चोरवाड़ का वो लड़का, “चोरवाड़ का वो लड़का, जिसने करोड़ों भारतीयों को बड़ा सपना देखना सिखाया
2020: जब सब दरवाज़े बंद हो गए
 
फिर आया साल 2020, जब महामारी ने हर दरवाज़ा बंद कर दिया, तब क्लासरूम, दफ़्तर और डॉक्टर, सब नेटवर्क पर चले आए, उस मुश्किल घड़ी में भी नेटवर्क मज़बूती से टिका रहा. इस दौरान दादा-दादी ने वीडियो पर अपने पोते-पोतियों के चेहरे देखे, बच्चों की पढ़ाई चलती रही, परिवारों की कमाई भी रुकी नहीं. Jio ने भारत को जोड़े रखा.
सिर्फ़ पैसे से नहीं बना यह सपना
अब सवाल उठता है कि इतना बड़ा काम कैसे हुआ? रिलायंस ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और अगली पीढ़ी की क्षमताओं में बड़े पैमाने पर निवेश किया, पर एक अरब लोगों को जोड़ने और अपने कारोबार का दायरा बढ़ाने में पैसे से कहीं ज़्यादा लगा.
इसमें सालों का धैर्य लगा, एक ही विचार पर सब कुछ दांव पर लगाने की हिम्मत लगी और तब डटे रहने का हौसला लगा, जब दूसरे इसे नामुमकिन कह रहे थे, मुकेश अंबानी के पास ये तीनों चीज़ें थीं, उनके संकल्प के बिना भारत की डिजिटल क्रांति शायद अब भी शुरुआती दौर में ही होती.
नाम में ही कहानी
Jio का मतलब है “जियो” यानी जीना और सच में, इस नेटवर्क ने करोड़ों लोगों को जुड़कर जीने का मौक़ा दिया, यह सिर्फ़ टेलीकॉम की कहानी नहीं है, यह उस सपने की कहानी है जो हर भारतीय तक पहुंचा. 
Jio ने भारत को डिजिटल दुनिया से जोड़ा, लेकिन रिलायंस का सपना सिर्फ कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है. तीन पीढ़ियों की यह कहानी अब टेक्नोलॉजी, समाजसेवा और AI के ज़रिए देश के भविष्य को गढ़ने की ओर बढ़ रही है. अगले लेख में जानिए, कैसे अंबानी परिवार की विरासत एक नए दौर में प्रवेश कर रही है.
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News