जब नेपोलियन की ग्रैंड आर्मी ने रूस पर किया हमला, बिना जीते लौटी थी वापस – AajTak

24 जून 1812 में नेपोलियन ने रूस पर आक्रमण किया था. जब जार अलेक्जेंडर प्रथम ने नेपोलियन के महाद्वीपीय प्रणाली को अस्वीकार कर दिया. तब फ्रांसीसी सम्राट नेपोलियन ने अपनी विशाल सेना, जिसे ग्रैंड आर्मी कहा जाता था उसे रूस पर आक्रमण के लिए भेजा.  नेपोलियन की सेना उस समय तक एकत्रित की गई सबसे बड़ी यूरोपीय सैन्य शक्ति थी. लगभग 5 लाख सैनिकों वाली इस विशाल सेना में फ्रांसीसी साम्राज्य के अधीन सभी यूरोपीय देशों के सैनिक शामिल थे.
आक्रमण के शुरुआती महीनों में, नेपोलियन के हमले की वजह से रूसी सेना पीछे हटने लगी. नेपोलियन की श्रेष्ठ सेना से पूर्ण युद्ध करने से इनकार करते हुए, रूस के जनरल मिखाइल कुतुजोव के नेतृत्व में रूसी सेना ने रूस में और भी गहराई तक पीछे हटते गए और अपने पीछे सब कुछ जला दिया.
 7 सितंबर को, बोरोडिनो का युद्ध लड़ा गया. इसमें दोनों पक्षों को भारी नुकसान हुआ. 14 सितंबर को, नेपोलियन सप्लाई की तलाश में मॉस्को पहुंचा, लेकिन उसने पाया कि लगभग पूरी आबादी खाली कर दी गई थी और रूसी सेना फिर से पीछे हट गई थी. अगली सुबह, रूसी देशभक्तों ने शहर भर में आग लगा दी. पूरे शहर को जला दिया गया.   ग्रैंड आर्मी के शीतकालीन शिविर नष्ट हो गए. नेपोलियन की सेना के सामने खाने-पीने के लाले पड़ गए.
नेपोलियन की सेना ने एक महीने तक आत्मसमर्पण की प्रतीक्षा की, जो कभी नहीं हुआ. इसके बाद रूसी सर्दियों के आगमन का सामना करते हुए, नेपोलियन को अपनी भूखी सेना को मॉस्को से बाहर निकलने का आदेश देने के लिए मजबूर होना पड़ा.
यह भी पढ़ें: जब वाटरलू में हार गया था नेपोलियन, अंतिम जंग साबित हुई यह लड़ाई
इस विनाशकारी वापसी के दौरान, नेपोलियन की सेना को अचानक आक्रामक और निर्दयी रूसी सेना के निरंतर छोटे- छोटे हमलों का सामना करना पड़ा. भूख और रूसी सैनिकों के घातक भालों से त्रस्त, तबाह हो चुकी नेपोलियन की सेना नवंबर के अंत में बेरेजिना नदी तक पहुंची, लेकिन रूसियों ने उनका रास्ता रोक दिया. 27 नवंबर को, नेपोलियन ने स्टुडेन्का में नदी पार करने का रास्ता बनाया और जब उसकी सेना का बड़ा हिस्सा दो दिन बाद नदी पार कर गया, तो उसे अपने पीछे बनाए गए अस्थायी पुलों को जलाने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिससे लगभग 10,000 सैनिक दूसरी तरफ फंस गए.
 वहां से, वापसी एक करारी हार में बदल गई और 8 दिसंबर को नेपोलियन अपनी बची हुई सेना को छोड़कर पेरिस लौट गया. छह दिन बाद, ग्रैंड आर्मी अंततः रूस से बच निकली. इस विनाशकारी आक्रमण के दौरान उसे 400,000 से अधिक सैनिकों का नुकसान उठाना पड़ा था.

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News