जम्मू-कश्मीर: मूसा के बाद अब 35-40 विदेशी आतंकी निशाने पर, घाटी में सपोर्ट नेटवर्क तोड़ने की तैयारी – Aaj Tak

Feedback
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई अब एक नए चरण में पहुंच गई है. लश्कर-ए-तैयबा के खूंखार कमांडर मूसा उर्फ आसिफ फौजी के मारे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों का अगला बड़ा फोकस घाटी में बचे विदेशी आतंकियों पर है. 
सूत्रों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में इस समय करीब 35 से 40 विदेशी आतंकियों के सक्रिय होने की जानकारी है. इनमें पाकिस्तानी आतंकियों की संख्या सबसे ज्यादा है और जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकियों की मौजूदगी भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. 
सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट के मुताबिक, 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर में विदेशी आतंकियों की संख्या में लगातार गिरावट आई है. उस समय घाटी में भाड़े के आतंकियों की संख्या 300 से 400 के बीच या उससे ज्यादा आंकी जाती थी. 
अब ये संख्या घटकर करीब 35 से 40 तक पहुंच गई है. सूत्रों का दावा है कि स्थानीय आतंकियों की संख्या भी लगभग शून्य के स्तर पर पहुंच गई है. यानी सुरक्षा बलों की रणनीति अब बड़े आतंकी नेटवर्क को तोड़ने के साथ-साथ बचे हुए विदेशी आतंकियों के स्थानीय मददगार नेटवर्क को खत्म करने पर केंद्रित है.
मूसा के बाद अगला बड़ा टारगेट FT मॉड्यूल

सुरक्षा एजेंसियों की भाषा में पाकिस्तान से घुसपैठ कर जम्मू-कश्मीर में सक्रिय होने वाले आतंकियों को अक्सर Foreign Terrorists के तौर पर चिन्हित किया जाता है. सूत्रों के मुताबिक, इन विदेशी आतंकियों के छोटे-छोटे मॉड्यूल अब सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता में हैं.
मूसा की तलाश लंबे समय से की जा रही थी. तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी मिलने के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों से जुड़ी एजेंसियों ने संयुक्त रणनीति बनाई. आखिरकार बडगाम के खानसाहिब इलाके के गुरवतकलान में ऑपरेशन के दौरान मूसा मारा गया. 
मूसा के मारे जाने के साथ ही 2022 के बाद जम्मू-कश्मीर में सक्रिय लश्कर के चार बड़े कमांडरों का समूह खत्म हो गया. सुरक्षा बलों के मुताबिक, इस ग्रुप के जुनैद भट, सुलेमान और यासिर पहले ही अलग-अलग अभियानों में मारे जा चुके थे. जुनैद भट 3 दिसंबर 2024 को दाचीगाम में मारा गया था. सुलेमान को 28 जुलाई 2025 को ऑपरेशन महादेव में ढेर किया गया, जबकि यासिर 4 सितंबर 2026 को ऑपरेशन असधर में मारा गया. इसके बाद 30 सितंबर को मूसा का खात्मा हुआ.
बड़े हमलों से जुड़े थे चारों कमांडर

सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, इन चारों कमांडरों का नाम जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ सालों के कई बड़े आतंकी हमलों से जोड़ा गया था. इनमें अगस्त 2023 का हालन हमला, दिसंबर 2023 का DKG हमला, मई 2023 का कंडी हमला, मई 2024 का शाहसीतार हमला, जून 2024 का शिव खोरी हमला, अक्टूबर 2024 का गगनगीर हमला, अक्टूबर 2024 का बूटापथरी हमला और अप्रैल 2025 का बैसरण हमला शामिल हैं.
इन कमांडरों के एक-एक कर मारे जाने से लश्कर के उस पुराने नेतृत्व ढांचे को बड़ा नुकसान पहुंचा है, जो लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में विदेशी आतंकियों के ऑपरेशनल नेटवर्क को संभाल रहा था.
अब बचे हुए 35-40 विदेशी आतंकियों पर फोकस

सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों के पास अब उन विदेशी आतंकियों को लेकर अलग-अलग इनपुट हैं जो जम्मू-कश्मीर के दुर्गम इलाकों में छिपे हो सकते हैं. इन आतंकियों में लश्कर के अलावा जैश-ए-मोहम्मद और दूसरे पाकिस्तान बेस्ड आतंकी संगठनों से जुड़े कैडर शामिल हैं. सुरक्षा एजेंसियों को समय-समय पर इन आतंकियों की लोकेशन से जुड़े इनपुट मिलते हैं.
इसके बाद जंगलों और पहाड़ी इलाकों में तलाशी अभियान चलाए जाते हैं. कुलगाम, कुपवाड़ा, पुलवामा, उरी, अनंतनाग, शोपियां, बडगाम, बांदीपोरा, बारामुला और दक्षिण कश्मीर के कई दुर्गम इलाके ऐसे हैं जहां विदेशी आतंकियों की संभावित मौजूदगी को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं. कई मामलों में ऑपरेशन शुरू होने के बाद आतंकियों को जंगलों और पहाड़ी भूगोल का फायदा मिल जाता है. 
वो प्राकृतिक कवर, मुश्किल रास्तों और स्थानीय नेटवर्क की मदद से सुरक्षा घेरा तोड़कर निकलने की कोशिश करते हैं. यही वजह है कि अब केवल आतंकियों की तलाश ही नहीं, बल्कि उन्हें मिलने वाली हर तरह की सहायता को रोकना भी सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बन गया है.
OGW नेटवर्क पर भी रडार

सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक ओवर ग्राउंड वर्कर्स यानी OGW नेटवर्क है. इनपुट के मुताबिक, विदेशी आतंकियों के लिए स्थानीय मददगारों का नेटवर्क उनके ऑपरेशन को बनाए रखने में अमह भूमिका निभाता है. ये नेटवर्क आतंकियों को ठिकाना उपलब्ध कराने, एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचाने, भोजन और दूसरी लॉजिस्टिक सहायता देने में मदद करता है.
सुरक्षा एजेंसियों की कोशिश अब ऐसे नेटवर्क को चिन्हित कर उसे तोड़ने की भी है. क्योंकि किसी विदेशी आतंकी के पास स्थानीय सहायता नहीं हो तो उसके लिए लंबे समय तक किसी इलाके में छिपे रहना और ऑपरेशनल गतिविधियां चलाना मुश्किल हो जाता है. 2024 में मारे गए 68 आतंकियों में 42 विदेशीआतंकवाद के खिलाफ अभियान के बदलते स्वरूप को 2024 के आंकड़ों से भी समझा जा सकता है. 
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, साल 2024 में जम्मू-कश्मीर में कुल 68 आतंकवादी मारे गए थे. इनमें 42 विदेशी आतंकी थे।इनमें से कुछ आतंकियों को नियंत्रण रेखा के आसपास घुसपैठ की कोशिश के दौरान मारा गया, जबकि कई आतंकियों को घाटी के अंदर चलाए गए ऑपरेशनों में ढेर किया गया. ये आंकड़ा बताता है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद का स्वरूप पिछले वर्षों में किस तरह बदला है.
स्थानीय युवाओं की भर्ती को रोकने और स्थानीय आतंकी नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई के बाद अब पाकिस्तान से भेजे गए विदेशी आतंकियों पर सुरक्षा एजेंसियों का फोकस ज्यादा है.
2019 के बाद बदली पूरी तस्वीर

2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान को कई स्तरों पर मजबूत किया गया. सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के बीच खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ा. सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन के साथ-साथ उनके वित्तीय नेटवर्क, हथियारों की सप्लाई, स्थानीय मददगारों और संचार तंत्र को भी निशाना बनाया.
इसका असर विदेशी और स्थानीय आतंकियों की संख्या में आई कमी के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि सुरक्षा एजेंसियां इस स्थिति को अंतिम सफलता नहीं मान रही हैं, क्योंकि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों की ओर से घुसपैठ और नए मॉड्यूल तैयार करने की कोशिश लगातार बनी रहने की आशंका रहती है.
मूसा की कहानी भी अलग थी

मूसा उर्फ आसिफ फौजी की कहानी भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए अहम थी. जानकारी के मुताबिक उसका जन्म पाकिस्तान में 7 मार्च 1980 को हुआ था. सूत्रों के मुताबिक उसने पाकिस्तानी सेना में सिपाही के तौर पर शुरुआत की और बाद में उसे आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिला. इसके बाद वो पाकिस्तान की स्पेशल सर्विसेज ग्रुप यानी SSG से जुड़ा, जहां उसे कमांडो ट्रेनिंग मिली. 2006 में उसकी तैनाती बलोचिस्तान में भी रही. 
सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, 2022 में उसने कुछ दूसरे आतंकियों के साथ पाकिस्तान से नियंत्रण रेखा पार कर जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की. शुरुआती दौर में उसने कई महीनों तक अलग-अलग इलाकों की रेकी की और स्थानीय परिस्थितियों को समझा. मूसा पर 20 लाख रुपये का इनाम घोषित था. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, चार वरिष्ठ विदेशी आतंकियों के समूह में वह रणनीति बनाने और ऑपरेशन को अंजाम देने में अहम भूमिका निभा रहा था.
‘ऑपरेशन शेरूवाली’ का अहम पड़ाव

मूसा को मार गिराने वाला अभियान लंबे समय से चल रही कार्रवाई का हिस्सा था. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, ऑपरेशन शेरूवाली मई 2026 से जारी अभियान है, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर में सक्रिय विदेशी आतंकियों और उनके नेटवर्क को निशाना बनाया जा रहा है. मूसा के खिलाफ ऑपरेशन में तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी दोनों का इस्तेमाल किया गया. उसकी गतिविधियों और संभावित ठिकाने की जानकारी मिलने के बाद संबंधित एजेंसियों के बीच तालमेल किया गया और फिर ऑपरेशन को अंजाम दिया गया.
अब चुनौती संख्या नहीं, नेटवर्क की है. जम्मू-कश्मीर में भाड़े के आतंकियों की संख्या का 300-400 से घटकर करीब 35-40 तक पहुंचना सुरक्षा अभियानों के प्रभाव का एक अहम संकेत है. लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब चुनौती बचे हुए आतंकियों को ट्रैक करने के साथ-साथ उनके सपोर्ट सिस्टम को खत्म करने की है. इन विदेशी आतंकियों के पास जंगल और पहाड़ी इलाकों का भौगोलिक फायदा है. दूसरी तरफ पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों का संभावित समर्थन और स्थानीय OGW नेटवर्क सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बना हुआ है.
यह भी पढ़ें: ऑपरेशन शेरुवाली में लश्कर कमांडर मूसा ढेर, 2022 से घाटी में एक्टिव चारों आतंकियों का सफाया
मूसा के खात्मे के बाद अब सुरक्षा एजेंसियों की नजर उन बचे हुए विदेशी आतंकियों पर है जो अलग-अलग इलाकों में छोटे मॉड्यूल के रूप में सक्रिय बताए जा रहे हैं. आने वाले दिनों में FT मॉड्यूल, उनके स्थानीय मददगारों और पाकिस्तान से संचालित नेटवर्क के खिलाफ ऑपरेशन और तेज किए जाने की संभावना है. 
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई अब बड़े आतंकी समूहों के बजाय छोटे-छोटे मॉड्यूल, विदेशी आतंकियों और उनके स्थानीय सपोर्ट नेटवर्क को एक साथ निशाना बनाने के चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है.
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News