भारत और जापान के बीच हाल ही में जारी हुए संयुक्त बयान में ‘सीमा पार आतंकवाद’ का जिक्र होने से पाकिस्तान बुरी तरह बौखला गया है। पाकिस्तान ने इसे लेकर जापानी सरकार के सामने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। अब भारत ने भी पाकिस्तान की इस आपत्ति को सिरे से खारिज करते हुए करारा जवाब दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत और जापान का यह साझा बयान अपने आप में सबकुछ स्पष्ट करता है और पाकिस्तान दशकों से आतंकवाद को अपनी नीति के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है।
इसी महीने (2 जुलाई को) नई दिल्ली में 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन का आयोजन हुआ था। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाची के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। इसके बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने आतंकवाद के हर रूप की कड़ी निंदा की थी।
इस बयान में साफ तौर पर ‘पाकिस्तान की ओर से होने वाले सीमा पार आतंकवाद’ का जिक्र किया गया था। बयान में अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले और नवंबर 2025 की दिल्ली आतंकी घटना की कड़ी निंदा की गई।
दोनों देशों ने अल-कायदा, आईएसआईएस, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और उनके प्रॉक्सी जैसे यूएन द्वारा प्रतिबंधित आतंकी समूहों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग की।
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता अंबेसडर ताहिर अंद्राबी ने बताया कि इस्लामाबाद ने राजनयिक चैनलों के जरिए टोक्यो के सामने अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। अंद्राबी ने जापान के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि इस तरह के ‘एकतरफा बयान’ आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के योगदान और बलिदान को नजरअंदाज करते हैं।
पाकिस्तानी प्रवक्ता ने अपनी खीझ निकालते हुए यह भी आरोप लगाया कि भारत जब भी किसी देश के साथ बातचीत करता है, तो इस तरह के संदर्भों को जबरन साझा बयानों का हिस्सा बनवाता है। उन्होंने कहा कि जापान ने भी भारत के दबाव में आकर ये बयान दिया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को मीडिया ब्रीफिंग के दौरान पाकिस्तान के इस कदम पर भारत का रुख साफ किया। जायसवाल ने कहा, “मैं यही कहूंगा कि जापान के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा के दौरान अपनाए गए संयुक्त बयान में कई द्विपक्षीय मुद्दों के साथ-साथ उन विषयों को भी शामिल किया गया है, जिन पर हमारा एक निश्चित दृष्टिकोण है। हमारा संयुक्त बयान स्वतः स्पष्ट है।”
पहलगाम हमले के सिलसिले में लश्कर संस्थापक हाफिज सईद के खिलाफ एनआईए (NIA) कोर्ट द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट को पाकिस्तान ने ‘निराधार और राजनीति से प्रेरित’ बताया था। इस पर जायसवाल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “पहलगाम हमले में कई मासूमों की जान गई… जहां तक सीमा पार आतंकवाद का सवाल है, आप अच्छी तरह वाकिफ हैं कि पाकिस्तान दशकों से इसे प्रायोजित कर रहा है और इसका समर्थन करता आ रहा है। वह लगातार इसे अपनी राज्य नीति के एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।”
1996 की एक घटना को लेकर एनआईए द्वारा कश्मीरी अलगाववादी नेताओं पर लगाए गए आरोपों को पाकिस्तान द्वारा खारिज किए जाने पर भी भारत ने कड़ी आपत्ति जताई। जायसवाल ने दो टूक शब्दों में कहा कि भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का पाकिस्तान का कोई अधिकार नहीं है।
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