टमाटर की खेती पर क्लाइमेट चेंज का वार, कभी गर्मी तो कभी बारिश बिगाड़ रही पूरी फसल – Aaj Tak News

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टमाटर भारतीय रसोई की सबसे आम चीजों में से एक है, सब्जियों की ग्रेवी, चटनी, सूप और सलाद टमाटर का इस्तेमाल हर जगह होता है. आमतौर पर हम इसकी कीमत या अहमियत पर ज्यादा ध्यान नहीं देते, लेकिन जैसे ही इसके दाम अचानक बढ़ते हैं, सबकी नजर टमाटर पर चली जाती है.
लेकिन इस आम से दिखने वाले लाल फल के पीछे एक ऐसी फसल की कहानी है, जो बदलते मौसम की मार झेल रही है. बढ़ता तापमान, बारिश का बदलता पैटर्न और पानी की कमी भारत के कई हिस्सों में टमाटर उगाना मुश्किल बना रहे हैं. समस्या सिर्फ यह नहीं है कि धरती गर्म हो रही है. असली परेशानी यह है कि टमाटर को अपनी बढ़त के अलग-अलग चरणों में सही तापमान, सही बारिश और सही मात्रा में पानी की जरूरत होती है.
और अब मौसम में हो रहे बदलाव के कारण इन फसलों को ठीक उसी समय गर्मी या बारिश का सामना करना पड़ रहा है, जब उन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत नहीं होती.
जब गलत समय पर पड़ती है तेज गर्मी
टमाटर में फूल आने और फल बनने के समय ज्यादा गर्मी का असर सबसे ज्यादा पड़ता है. बहुत ज्यादा तापमान पर टमाटर के फूलों का विकास प्रभावित हो सकता है और पराग की गुणवत्ता भी खराब हो सकती है. इसका सीधा असर फल बनने पर पड़ता है और आखिर में पैदावार कम हो सकती है. ICAR-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ वेजिटेबल रिसर्च की रिसर्च में भी पाया गया है कि लंबे समय तक ज्यादा तापमान रहने पर टमाटर के फूल और फल से जुड़े कई गुण प्रभावित होते हैं.
एक फील्ड स्टडी में जिन टमाटर की किस्मों को दिन के समय औसतन 38.4 डिग्री सेल्सियस तापमान में उगाया गया, उनमें फूल आने और पैदावार से जुड़े गुणों पर साफ असर देखा गया.
भारत में हुई एक और हालिया रिसर्च ने भी इस चिंता को मजबूत किया है. 2026 की एक स्टडी में पंजाब में गर्मियों के दौरान टमाटर की 76 किस्मों पर अध्ययन किया गया. इसमें पाया गया कि 35 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान टमाटर की पैदावार के लिए नुकसानदेह हो सकता है और पौधे की बढ़त से लेकर फल बनने तक पर असर डाल सकता है. बदलते मौसम में यह चिंता और बड़ी हो जाती है, क्योंकि टमाटर उगाने वाले किसान के लिए हीटवेव सिर्फ मौसम विभाग के चार्ट में दर्ज एक आंकड़ा नहीं है.
अगर फूल आने के समय तेज गर्मी पड़ जाए, तो इसका सीधा मतलब कम फल और कम पैदावार हो सकता है.
क्यों महंगा होता है टमाटर
बहुत ज्यादा बारिश भी परेशानी
सिर्फ गर्मी ही समस्या नहीं है, टमाटर के लिए खेत में जरूरत से ज्यादा पानी भी नुकसानदेह हो सकता है. बहुत ज्यादा या गलत समय पर हुई बारिश पौधों को नुकसान पहुंचा सकती है, बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है और फसल की कटाई में भी परेशानी पैदा कर सकती है. मिजोरम में ICAR की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारी बारिश और तापमान में बदलाव के कारण प्री-खरीफ और खरीफ सीजन में खुले खेतों में टमाटर की खेती प्रभावित होती है.
ऐसी परिस्थितियों में टमाटर की पैदावार करीब 70 फीसदी तक कम हो सकती है. वहीं, नियंत्रित या संरक्षित वातावरण में की गई खेती से काफी ज्यादा पैदावार मिली है. यही वजह है कि टमाटर के लिए जलवायु परिवर्तन की समस्या इतनी जटिल है. खतरा सिर्फ किसी एक मौसम की मार से नहीं है. कभी तेज गर्मी, कभी बहुत ज्यादा बारिश, कभी खेत में जरूरत से ज्यादा नमी और कभी पानी की कमी ये सभी अलग-अलग समय पर फसल को प्रभावित कर सकते हैं.
2025 की एक स्टडी में मध्य भारत में भविष्य के मौसम को ध्यान में रखते हुए टमाटर की खेती पर अध्ययन किया गया. इसमें पाया गया कि बढ़ते तापमान से फूल और फल बनने की प्रक्रिया कुछ तेज हो सकती है, लेकिन इसके साथ पैदावार में गिरावट भी आ सकती है. रिसर्च में यह भी पाया गया कि बारिश के बदलते पैटर्न का अलग-अलग इलाकों में टमाटर के उत्पादन पर अलग असर पड़ सकता है.
मौसम के हिसाब से बदल रही टमाटर की खेती
भारत के टमाटर किसान पहले से ही मौसम और तापमान में बदलाव की चुनौती से जूझते रहे हैं. देश के कुछ मैदानी इलाकों में गर्मियों का ज्यादा तापमान पहले ही टमाटर की खेती को मुश्किल बना देता है, ऐसे में खेती को दूसरे इलाकों या दूसरे मौसम में करना पड़ता है. जलवायु परिवर्तन ने इन पुरानी मुश्किलों को खत्म नहीं किया है, बल्कि इनके ऊपर एक और दबाव जोड़ दिया है.
2025 में हुई एक स्टडी में टमाटर की अलग-अलग किस्मों पर गर्मी के असर का अध्ययन किया गया. इसमें पाया गया कि ज्यादा तापमान से पैदावार, जड़ों और पौधे की प्रकाश संश्लेषण की क्षमता में काफी कमी आ सकती है. हालांकि, सभी किस्मों पर इसका असर एक जैसा नहीं था. कुछ किस्मों ने ज्यादा गर्मी को बेहतर तरीके से सहन किया. यही वजह है कि अब वैज्ञानिक ऐसी टमाटर की किस्में विकसित करने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, जो तेज गर्मी में भी बेहतर पैदावार दे सकें.
वैज्ञानिक इस दिशा में काम भी कर रहे हैं. अगस्त 2026 में प्रकाशित एक स्टडी में ICAR-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ वेजिटेबल रिसर्च के शोधकर्ताओं समेत वैज्ञानिकों ने टमाटर की कुछ ऐसी किस्मों की पहचान की, जिनमें गर्मी सहने की बेहतर क्षमता वाले गुण पाए गए. इन गुणों का इस्तेमाल भविष्य में ज्यादा गर्मी सहने वाली नई किस्में विकसित करने में किया जा सकता है.
टमाटर पर मौसम की मार
आपकी थाली के टमाटर पर क्या होगा असर?
जब मौसम किसी फसल को नुकसान पहुंचाता है, तो उसका असर सिर्फ खेत तक सीमित नहीं रहता. टमाटर जल्दी खराब होने वाली फसल है और इसकी खेती अलग-अलग इलाकों और अलग-अलग मौसम में होती है. अगर किसी बड़े टमाटर उत्पादक इलाके में मौसम की वजह से फसल खराब होती है, तो बाजार में टमाटर की सप्लाई कम हो सकती है और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. लेकिन यहां एक सावधानी जरूरी है. टमाटर की कीमत बढ़ने की हर घटना को जलवायु परिवर्तन से जोड़ना सही नहीं होगा.
फसल का चक्र, खेती का रकबा, कीट और बीमारियां, ट्रांसपोर्ट, स्टोरेज और बाजार की स्थिति इन सभी का टमाटर की कीमत पर असर पड़ता है.
जलवायु परिवर्तन क्या कर सकता है? यह पहले से ही संवेदनशील टमाटर की फसल में अनिश्चितता और बढ़ा सकता है. शायद टमाटर को लेकर आने वाला सबसे बड़ा बदलाव यही है, टमाटर भारतीय रसोई से अचानक गायब नहीं होने वाला. लेकिन बदलता मौसम कुछ सीजन में इसकी खेती को मुश्किल बना सकता है.
(रिपोर्ट- आर्यन राय)
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