देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने सोमवार (20 अप्रैल, 2026) को इस बात पर हैरानी जताई कि पढ़े-लिखे लोग भी डिजिटल अरेस्ट का शिकार हो रहे हैं, जहां धोखेबाज लोग जज या पुलिस अधिकारी बनकर लोगों से पैसे वसूलते हैं.
सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच मामले पर सुनवाई कर रही थी. इस दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने हाल में एक बुजुर्ग महिला के मामले का जिक्र किया जिन्हें साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट कर उनकी रिटायरमेंट की पूरी रकम ठग ली.
सीजेआई सूर्यकांत ने ये टिप्पणियां उस समय कीं, जब अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने बेंच के समक्ष ‘डिजिटल अरेस्ट’ के पीड़ितों से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले का उल्लेख किया और अंतर-विभागीय बैठकों का हवाला देते हुए सुनवाई की तय तिथि को बदलने का आग्रह किया.
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उन्होंने कहा कि बैठकें हो चुकी हैं. हम बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. इसके बाद उन्होंने मामले को 12 मई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया. सीजेआई ने उस बुजुर्ग महिला का जिक्र करते हुए कहा, ‘दुर्भाग्य से, उनकी रिटायरमेंट की पूरी राशि ठग ली गई.’ एक वकील ने बेंच को बताया कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस मुद्दे पर सुनवाई के बावजूद ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘यह हैरान करने वाला है कि पढ़े-लिखे लोग भी इस तरह ठगे जा रहे हैं.’ इसके बाद बेंच ने मामले को 12 मई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया.
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‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी का नया तरीका है. ऐसे मामलों में ठग खुद को कानून प्रवर्तन अधिकारी बताकर लोगों को ऑडियो या वीडियो कॉल करके डराते हैं और उन्हें गिरफ्तारी का झांसा देकर उनके ही घर में डिजिटल तौर पर बंधक बना लेते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल ऐसे मामलों की बढ़ोतरी को देखते हुए स्वत: संज्ञान लिया था. इसके बाद कोर्ट ने सभी राज्यों में दर्ज ऐसे मामलों को सीबीआई के पास ट्रांसफर कर दिया था. कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद गृह मंत्रालय ने भी एक उच्च स्तरीय इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी बनाई है. ऐसे मामलों से निपटने के लिए तैयार की गई प्रस्तावित एसओपी भी उन्होंने पेश की.
Source: IOCL
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