डिजिटल युग में पढ़ने-पढ़ाने के तरीकों में बड़ा बदलाव आया है। बच्चे स्मार्ट हो रहे हैं। इसलिए शिक्षकों को स्मार्टर यानी अधिक स्मार्ट होना होगा। ये बातें शनिवार को हिन्दुस्तान संवाद में जमशेदपुर के अलग-अलग स्कूलों के प्राचार्यों और वरिष्ठ शिक्षकों ने कहीं। हिन्दुस्तान के एनएच-33 स्थित कार्यालय में आयोजित संवाद में डिजिटल युग में शिक्षक : भूमिका और चुनौती विषय पर चर्चा की गई। शिक्षकों ने कहा कि डिजिटल संसाधनों को साथी बनाकर स्मार्ट बनने वाले शिक्षक ही वर्तमान दौर में प्रासंगिक बने रहेंगे। शिक्षकों ने कहा कि आधुनिक तकनीक के दौर में शिक्षा के स्वरूप में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है। आज के बच्चे तकनीकी रूप से अधिक स्मार्ट हो रहे हैं, जिसके मद्देनजर शिक्षकों को भी अपनी कार्यशैली में और अधिक परिपक्व और उन्नत होने की आवश्यकता है। बैठक में उपस्थित शिक्षाविदों का मानना था कि डिजिटल संसाधनों ने शिक्षण कार्य को सुगम जरूर बनाया है। अब नोट्स तैयार करने में समय बर्बाद नहीं होता और अध्ययन सामग्री विद्यार्थियों को कहीं भी तथा कभी भी आसानी से उपलब्ध हो जाती है। प्रत्यक्ष वीडियो कंटेंट के माध्यम से कठिन विषयों को समझना भी सरल हुआ है। इसके बावजूद तकनीक कभी शिक्षक और छात्र के बीच के आत्मीय संवाद का विकल्प नहीं बन सकती। कारखानों में मशीन या तकनीक भले ही इंसानी श्रम की जगह ले ले, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में मानवीय शिक्षक का स्थान कोई एल्गोरिदम या गैजेट नहीं ले सकता。
चर्चा के दौरान इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई कि आज के डिजिटल परिवेश में अभिभावक पारंपरिक खिलौनों की जगह बच्चों के हाथों में मोबाइल थमा रहे हैं। हालांकि डिजिटल माध्यमों से ज्ञान तो प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन बच्चों में संस्कार, नैतिक मूल्य और चरित्र निर्माण का कार्य केवल एक योग्य शिक्षक ही कर सकता है। सोशल, इमोशनल और एथिकल लर्निंग यानी सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक शिक्षा किसी भी सूरत में तकनीक के माध्यम से संभव नहीं है। शिक्षक केवल एक मार्गदर्शक है और उसे अपनी इस मार्गदर्शक की भूमिका में हमेशा अडिग रहना होगा。
बदलते वक्त की मांग है कि शिक्षक अपनी विषय वस्तु यानी कंटेंट नॉलेज को बेहद मजबूत रखें। तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, अंततः छात्र को जीवन की सही राह दिखाने और उसे एक संवेदनशील इंसान बनाने के लिए गुरु की ही आवश्यकता पड़ती है। इसलिए डिजिटल बनाम शिक्षक की बहस का सही निष्कर्ष यही है कि तकनीक शिक्षार्थी के लिए महज एक साधन है, जबकि शिक्षक ही शिक्षा का असली आधार है।
हिन्दुस्तान भारत का एक प्रतिष्ठित हिंदी समाचार-पत्र है, जिसकी स्थापना 1936 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी। स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को समेटे यह प्रकाशन आज भारत के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले हिंदी समाचार-पत्रों में दूसरे स्थान पर है। WAN-IFRA के अनुसार, 2016 में ‘हिन्दुस्तान’ विश्व के शीर्ष 13 सर्वाधिक प्रसारित अखबारों में शामिल था। हर रोज 5 राज्यों सहित देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम) में 23 संस्करण प्रकाशित होते हैं। ‘पाठक सर्वोपरि’ हिन्दुस्तान की संपादकीय नीति है। समय पर, शोध और गहन खोजबीन के बाद विस्तार से न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है। हर खबर में सभी पक्षों और दृष्टिकोणों को संतुलित रूप से पेश किया जाता है।
आरएसएस विज्ञापन र॓टहमार॓ साथ कामकरेंहमारे बारे मेंसंपर्क करेंगोपनीयतासाइट जानकारी
Advertise with usAbout usCareers Privacy Contact usSitemapCode Of Ethics
Partner sites: Hindustan TimesMintHT TechShineHT Auto HealthshotsHT SmartcastFAB Play