डेली न्यूज़ (05 Aug, 2026) – drishtiias.com

 
स्रोत: पीआईबी 
भारतीय नौसेना ने कर्नाटक के कारवार में स्वदेशी रूप से अभिकल्पित एवं निर्मित माहे श्रेणी के उथले जल क्षेत्र पनडुब्बी रोधी युद्धक पोत (ASW-SWC) के दूसरे पोत INS मालवन को नौसेना में सम्मिलित किया।
INS Malvan Commissioned into Indian Navy
और पढ़ें: एंटी सबमरीन वारफेयर
प्रिलिम्स के लिये: महत्त्वपूर्ण खनिज, राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण खनिज मिशन, दुर्लभ मृदा तत्त्व, सेमीकंडक्टर, खनिज विदेश इंडिया लिमिटेड, पैक्स सिलिका
मेन्स के लिये: महत्त्वपूर्ण खनिज और भारत की ऊर्जा सुरक्षा, महत्त्वपूर्ण खनिज आपूर्ति शृंखलाओं का भू-राजनीतिक परिदृश्य, राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM): उद्देश्य एवं महत्त्व।
स्रोत: द हिंदू
महत्त्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखलाओं को लेकर बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्द्धा के बीच ये खनिज एक प्रमुख रणनीतिक मुद्दे के रूप में उभरे हैं। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की ग्लोबल क्रिटिकल मिनरल्स आउटलुक 2026 रिपोर्ट खनिज परिष्करण में निरंतर संकेंद्रण और आपूर्ति में पुनः उत्पन्न होने वाले व्यवधानों को रेखांकित करती है, जो बढ़ती आपूर्ति शृंखला कमज़ोरियों को दर्शाते हैं।
महत्त्वपूर्ण खनिजों का रणनीतिक महत्त्व
महत्त्वपूर्ण खनिज
भारत में प्रमुख भंडार/उपस्थिति
लिथियम
कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर में खोज की गई।
कोबाल्ट और निकेल
सामान्यतः तांबा अयस्कों के साथ संबद्ध रूप में पाया जाता है, ओडिशा और झारखंड में इसके छोटे भंडार हैं। भारत के भंडार अपेक्षाकृत सीमित हैं। 
दुर्लभ मृदा तत्त्व (REEs)
आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा और केरल में इसके महत्त्वपूर्ण भंडार हैं। केरल की मोनाजाइट बालू विशेष रूप से दुर्लभ मृदा तत्त्वों (REEs) से समृद्ध है। भारत में गुजरात और राजस्थान के कठोर शैल निक्षेपों में 1.29 मिलियन टन (Mt) इन-सिटू दुर्लभ मृदा ऑक्साइड (REO) भी उपलब्ध है। 
सीसा
अरुणाचल प्रदेश, झारखंड और तमिलनाडु में उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट के पर्याप्त भंडार हैं। 
महत्त्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षा के लिये वैश्विक दृष्टिकोण
देश/गुट
महत्त्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षा के लिये दृष्टिकोण
चीन
खनन, प्रसंस्करण, परिष्करण तथा निर्यात में प्रभुत्व के माध्यम से वैश्विक मूल्य शृंखला को नियंत्रित करता है और महत्त्वपूर्ण खनिजों का उपयोग भू-आर्थिक प्रभाव के एक साधन के रूप में करता है। 
अमेरिका
मित्र देशों के साथ साझेदारी, रणनीतिक गठबंधनों, घरेलू प्रसंस्करण तथा विदेशों में निवेश के माध्यम से आपूर्ति शृंखलाओं के जोखिम को कम करता है, ताकि चीन पर निर्भरता को घटाया जा सके। 
यूरोपीय यूनियन
घरेलू निष्कर्षण, प्रसंस्करण एवं पुनर्चक्रण को बढ़ावा देकर तथा किसी एकल आपूर्तिकर्त्ता पर निर्भरता को सीमित करके रणनीतिक स्वायत्तता को अपनाता है। 
ऑस्ट्रेलिया
प्रचुर भंडारों का लाभ उठाते हुए तथा अधोमुखी प्रसंस्करण (Downstream Processing) और समान विचारधारा वाले देशों के साथ साझेदारियों का विस्तार करते हुए स्वयं को एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्त्ता के रूप में स्थापित करता है।
जापान
संसाधन कूटनीति (Resource Diplomacy) का अनुसरण करता है, जिसके अंतर्गत निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिये विदेशों में खनन परिसंपत्तियाँ सुरक्षित करना, दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते करना तथा रणनीतिक भंडारों का निर्माण करना शामिल है। 
भारत
एकीकृत “खदान से बाज़ार तक (Mine-to-Market)” रणनीति अपनाता है, जिसमें आयात निर्भरता को कम करने के लिये घरेलू अन्वेषण, विदेशों में अधिग्रहण तथा सुदृढ़ वैश्विक साझेदारियों को सम्मिलित किया जाता है।
भारत की महत्त्वपूर्ण खनिज आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिये घरेलू भू-विज्ञान, उन्नत धातुकर्म और सक्रिय विदेश नीति का निर्बाध एकीकरण आवश्यक है। वास्तविक रणनीतिक स्वायत्तता तभी प्राप्त की जा सकेगी, जब भारत कच्चे अयस्कों के मात्र निष्कर्षक से आगे बढ़कर उच्च-शुद्धता वाले खनिज प्रसंस्करण और चक्रीय पुनर्चक्रण के लिये एक वैश्विक केंद्र के रूप में परिवर्तित होगा।
दृष्टि मेन्स प्रश्न:
प्रश्न. “महत्त्वपूर्ण खनिज 21वीं सदी का नया तेल हैं।” वैश्विक ऊर्जा बदलाव और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण खनिजों के रणनीतिक महत्त्व का विश्लेषण कीजिये।

1. महत्त्वपूर्ण खनिज क्या हैं?
महत्त्वपूर्ण खनिज वे खनिज हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण, अर्द्धचालक, रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये आवश्यक होते हैं। इनकी आपूर्ति आयात निर्भरता, सीमित घरेलू उपलब्धता तथा भू-राजनीतिक संकेंद्रण के कारण असुरक्षित होती है।
2. राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM) क्या है?
NCMM भारत की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य अन्वेषण, खनन, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण, अनुसंधान एवं विकास (R&D), विदेशों में अधिग्रहण और रणनीतिक भंडारण के माध्यम से महत्त्वपूर्ण खनिज मूल्य शृंखला को सुदृढ़ करना है।
3. वैश्विक महत्त्वपूर्ण खनिज आपूर्ति शृंखला में चीन की केंद्रीय भूमिका क्यों है?
चीन कई महत्त्वपूर्ण खनिजों के वैश्विक शोधन में 70–90% तक प्रभुत्व रखता है, जिससे वह वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में एक प्रमुख भूमिका निभाता है और निर्यात नियंत्रणों के माध्यम से भू-आर्थिक प्रभाव का उपयोग करने में सक्षम होता है।
4. भारत की महत्त्वपूर्ण खनिज सुरक्षा के लिये सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
भारत की सबसे बड़ी चुनौती प्रसंस्करण और शोधन क्षमता की कमी है, जो लिथियम, कोबाल्ट और निकेल जैसे खनिजों के लिये अत्यधिक आयात निर्भरता के साथ जुड़ी हुई है।

प्रश्न 1. निम्नलिखित खनिजों पर विचार कीजिये: (2020) 
भारत में, उपर्युक्त में से कौन-सा/से आधिकारिक रूप से नामित प्रमुख खनिज है/हैं? 
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 4
(c) केवल 1 और 3
(d) केवल 2, 3 और 4
उत्तर: D 
प्रश्न 2. हाल ही में, ‘दुर्लभ पृथ्वी धातुओं’ नामक तत्त्वों के समूह की अल्प आपूर्ति पर चिंता व्यक्त की गई है। क्यों? (2012) 
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा सही है/हैं? 
(A) केवल 1
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 1, 2 और 3
उत्तर: C
प्रश्न. विश्व में खनिज तेल के असमान वितरण के बहुआयामी प्रभावों की विवेचना कीजिये। (2021) 

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