डॉ. काकोड़कर बोले…भारत को जापान से सीखने होंगे वैश्विक मानक: आईआईआईटीडीएम जबलपुर के दीक्षांत समारोह में द… – Dainik Bhaskar

भारत को विकसित देशों की श्रेणी में शामिल होने के लिए जापान की संस्कृति, नवाचार और कार्य मानकों से सीखने की आवश्यकता है। यह बात कुलाधिपति होमी भाभा राष्ट्रीय संस्थान के अध्यक्ष और पूर्व अध्यक्ष परमाणु ऊर्जा आयोग डॉ. अनिल काकोड़कर ने कही। वे पंडित द्वा
डॉ. काकोड़कर ने अपने संबोधन में कहा कि जलवायु परिवर्तन और तकनीकी बदलाव भविष्य की सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को ऐसे शिक्षण मॉडल की आवश्यकता है जो ‘जॉब क्रिएटर’ तैयार कर सके। उन्होंने युवाओं से देश को आगे बढ़ाने के लिए नवाचार, शोध और उद्यमिता को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
समारोह की अध्यक्षता आईआईआईटीडीएमजे बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष दीपक घेस्सा ने की। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रो. भारतेन्दु के. सिंह, प्रशांत पॉल, एस. वी. सुब्रह्मण्य सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
दीक्षांत समारोह में कुल 1108 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 66 डॉक्टरेट, 62 स्नातकोत्तर और 980 स्नातक (बी.टेक) विद्यार्थी शामिल थे।
उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को 11 स्वर्ण पदक और 24 रजत पदक से सम्मानित किया गया। समारोह में लगभग 550 स्नातक विद्यार्थी और 300 से अधिक अभिभावक मौजूद थे।
बैच 2024 के लिए महिमा तरुण सावला (डिजाइन) को चेयरमैन गोल्ड मेडल मिला। मान्या अग्रवाल और विभूति चौहान को डायरेक्टरेट गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया, जबकि राजीव रंजन और अभिषेक सिंह को डी एंड एम प्रवीणयता स्वर्ण पदक प्रदान किया गया।
बैच 2025 में जतिन यादव को चेयरमैन गोल्ड मेडल मिला। रजत जैन और अमन सिंह राजपूत को डायरेक्टरेट गोल्ड मेडल दिया गया, वहीं निखिल कुशवाहा और भंडारकर विवेक वसंता को डी एंड एम प्रवीणयता गोल्ड मेडल से नवाजा गया।
तीन गोल्ड मेडलिस्ट चर्चा में
महिमा तरुण सावले मुंबई की रहने वाली है और जबलपुर ट्रिपल आईटीडीएम से मास्टर्स कर रही थी। इन्हे दो मैडल मिले है। पहला चेयरमैन गोल्ड मेडल। दूसरा (ऑल ओवर बेस्ट) और एकेडमिक मैडल। हाल में महिमा बंगलौर की एक कंपनी में जॉब कर रही हैं।
डॉ विभूति चौहान को तीन मैडल मिले है, पहला डायरेक्ट गोल्ड मैडल, दूसरा मैडल डीएनएम प्रॉफिशियेंशी मैडल और तीसरा डायरेक्टरी इन स्पोर्ट्स में सिल्वर मैडल मिला है। विभूति ने यहीं से मास्टर्स और पीएचडी की है वे अभी भोपाल एनआईटी में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। डॉ अमन सिंह राजपूत को दो मैडल मिले है, पहला आल ओवर बेस्ट परफॉरमेंस के लिए और दूसरा मैकेनिकल इंजीनियरिंग बेस्ट थीसिस इन पीएचडी में सिल्वर मेडल मिला है।
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