लखनऊ के वरिष्ठ साहित्यकार एवं राजभाषा अधिकारी डॉ. श्यामबाबू शर्मा को प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रभाषा गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह सम्मान राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा की ओर से हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और साहित्य सृजन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया।
यह सम्मान डॉ. शर्मा को हिंदी भाषा के विकास, मौलिक लेखन और साहित्यिक योगदान के लिए दिया गया है। डॉ. श्यामबाबू शर्मा ने लोक संस्कृति, हाशिएकृत समाज, वैश्वीकरण के दौर में पूंजीवादी चुनौतियों, राजभाषा हिंदी और पूर्वोत्तर भारत के लोकजीवन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर और शोधपरक लेखन किया है।
इसके अलावा, आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर उन्होंने स्वाधीनता आंदोलन और साहित्य पर आधारित महत्वपूर्ण ग्रंथों का सृजन किया। समिति की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘राष्ट्रभाषा’ के पूर्वोत्तर विशेषांक के अतिथि संपादक के रूप में भी उन्होंने हिंदी के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
देश के कई राज्यों के राज्यपाल भी उनके साहित्यिक योगदान की अनुशंसा कर चुके हैं। उनके साहित्यों को समकालीन सामाजिक सरोकारों से जुड़ा माना जाता है।
शॉल, श्रीफल, स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र मिला
राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा के स्थापना दिवस समारोह में आयोजित सम्मान समारोह के दौरान डॉ. श्यामबाबू शर्मा को शॉल, श्रीफल, स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर समिति के प्रधानमंत्री डॉ. हेमचंद्र वैद्य, पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर, ओमप्रकाश गुप्त, ‘नया खून’ के संपादक डॉ. रामप्रकाश वर्मा, ‘नवभारत’ के संपादक संजय तिवारी, ‘लोकमत’ के संपादक विकास मिश्र सहित साहित्य, पत्रकारिता और शिक्षा जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियां उपस्थित रहीं।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा की स्थापना वर्ष 1936 में महात्मा गांधी की प्रेरणा से हिंदी के प्रचार-प्रसार और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से की गई थी। यह संस्था देश-विदेश में हिंदी के संवर्धन के लिए कार्यरत है।
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