Rashmi Singh
Date: 23-10-26 13:43
Driving Licence New Rules: ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने या उसमें बदलाव कराने की प्रक्रिया आने वाले समय में पहले से अलग हो सकती है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े नियमों में कई बदलाव करने का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत लाइसेंस पर धारक की राष्ट्रीयता का उल्लेख करने और भारतीयों व विदेशी नागरिकों के लिए अलग-अलग रंग की व्यवस्था लागू करने की बात कही गई है. इसके अलावा, सुरक्षित ड्राइविंग से जुड़े ऑनलाइन मूल्यांकन में पास होने के लिए ज्यादा अंक हासिल करना जरूरी हो सकता है.
मंत्रालय की ओर से जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में लाइसेंस आवेदन, दस्तावेजों, व्यक्तिगत जानकारी में बदलाव और डिजिटल सेवाओं को लेकर भी कई सुझाव दिए गए हैं. हालांकि, ये अभी प्रस्तावित बदलाव हैं. इन्हें अंतिम नियम मानने से पहले सरकार की ओर से जारी होने वाली आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार करना होगा.
भारतीय और विदेशी नागरिकों के लिए अलग रंग के होंगे ड्राइविंग लाइसेंस
प्रस्तावित बदलावों में सबसे अहम ड्राइविंग लाइसेंस पर धारक की राष्ट्रीयता की जानकारी देना है. इसके लिए भारतीय और विदेशी नागरिकों के लाइसेंस में अलग-अलग रंगों की स्कीम अपनाने का सुझाव दिया गया है. इसका उद्देश्य लाइसेंस देखकर धारक की राष्ट्रीयता की पहचान करना आसान बनाना है.
मंत्रालय ने ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े दस्तावेजों की प्रक्रिया में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा है. उम्र और पते के प्रमाण के लिए एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट या नोटरी के सामने दिए जाने वाले शपथ-पत्रों के इस्तेमाल को सीमित करने की बात कही गई है. इसका मकसद गलत जानकारी या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाइसेंस हासिल करने की आशंका को कम करना है.
उम्र, पते और पहचान के लिए मान्य होंगे तय दस्तावेज
ड्राफ्ट में उम्र, पते और पहचान के प्रमाण के तौर पर स्वीकार किए जाने वाले दस्तावेजों की सूची दी गई है. पते के प्रमाण के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी, ई-राशन कार्ड और पिछले तीन महीनों के बिजली या गैस बिल जैसे दस्तावेज शामिल हैं. विदेशी नागरिकों के मामले में देश में कानूनी रूप से रहने का प्रमाण भी जरूरी हो सकता है.
उम्र के प्रमाण के लिए पासपोर्ट, स्कूल बोर्ड की मार्कशीट, जन्म प्रमाण पत्र और सरकारी विभागों की ओर से जारी पहचान पत्र स्वीकार करने का प्रस्ताव है. वहीं, पहचान के प्रमाण के लिए आधार कार्ड, पासपोर्ट, ई-राशन कार्ड और पैन कार्ड जैसे दस्तावेजों का उल्लेख किया गया है. हालांकि, यदि आवेदक तय सूची में शामिल दस्तावेजों में से कोई भी उपलब्ध नहीं करा पाता है, तो संबंधित लाइसेंसिंग अथॉरिटी कुछ परिस्थितियों में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट, ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट या नोटरी पब्लिक के सामने दिए गए शपथ-पत्र को स्वीकार कर सकती है.
ड्राइविंग लाइसेंस के लिए 75 फीसदी अंक हासिल करने का प्रस्ताव
ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी प्रक्रिया में सुरक्षित ड्राइविंग के ऑनलाइन मूल्यांकन को भी सख्त बनाने का सुझाव दिया गया है. प्रस्ताव के मुताबिक, ‘सेफ-ड्राइविंग ट्यूटोरियल असेसमेंट’ में पास होने के लिए जरूरी न्यूनतम अंक 60 फीसदी से बढ़ाकर 75 फीसदी किए जा सकते हैं. इसके साथ ही, आवेदकों के लिए कम से कम 30 मिनट का सुरक्षित ड्राइविंग वीडियो ट्यूटोरियल देखने की व्यवस्था का भी उल्लेख है. इसका उद्देश्य सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों और जिम्मेदार ड्राइविंग की समझ को बेहतर बनाना है. ये प्रावधान ड्राफ्ट में प्रस्तावित हैं और अंतिम नियमों में बदलाव संभव है.
लाइसेंस में मोबाइल नंबर और इमरजेंसी कॉन्टैक्ट की जानकारी
प्रस्तावित नियमों के तहत ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदन में ब्लड ग्रुप, मोबाइल नंबर और इमरजेंसी कॉन्टैक्ट की जानकारी देना अनिवार्य किया जा सकता है. इसके अलावा, आवेदक को अपनी स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ी जानकारी देने का विकल्प भी मिल सकता है. ड्राइविंग लाइसेंस को क्यूआर कोड वाले स्मार्ट कार्ड के रूप में जारी करने का प्रस्ताव है. इसमें चिप के बजाय क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे लाइसेंस से जुड़ी जानकारी की डिजिटल जांच आसान बनाने में मदद मिल सकती है.
लाइसेंस से जुड़ी कुछ सेवाओं के लिए नहीं लगेगी फीस
मंत्रालय ने ड्राइविंग लाइसेंस में पता, नाम और कॉन्टैक्ट नंबर जैसी जानकारियां अपडेट कराने से जुड़ी कुछ सेवाओं की फीस माफ करने का प्रस्ताव भी रखा है. हालांकि, इन सुविधाओं का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आधार ऑथेंटिकेशन जरूरी हो सकता है. इसके अलावा, आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एक ही फॉर्म के जरिए लाइसेंस रिन्यू कराने, डुप्लिकेट लाइसेंस लेने, नई वाहन श्रेणी जुड़वाने और व्यक्तिगत जानकारी में बदलाव जैसी सेवाएं उपलब्ध कराने का सुझाव है. जहां जरूरी जानकारी पहले से उपलब्ध होगी, वहां उसे ‘सारथी’ पोर्टल से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से प्राप्त किया जा सकता है.
आवेदन पर 15 दिनों में फैसला लेने का प्रस्ताव
ड्राइविंग लाइसेंस में नाम, पता या अन्य जानकारी बदलने के लिए किए गए ऑनलाइन आवेदनों पर संबंधित अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर फैसला लेना पड़ सकता है. यदि आवेदन खारिज किया जाता है, तो अधिकारी को इसकी वजह भी बतानी होगी. ड्राफ्ट में यह भी प्रस्ताव है कि यदि पता बदलने का आवेदन 30 दिनों तक लंबित रहता है, तो उसे मंजूर माना जा सकता है. इस व्यवस्था का उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया में होने वाली देरी को कम करना और लोगों को लाइसेंस से जुड़ी सेवाएं समय पर उपलब्ध कराना है. कुल मिलाकर, सरकार के प्रस्तावित बदलावों में ड्राइविंग लाइसेंस की पहचान, दस्तावेजों की जांच, सुरक्षित ड्राइविंग के मूल्यांकन और ऑनलाइन सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है. फिलहाल ये बदलाव ड्राफ्ट के स्तर पर हैं. इनके लागू होने और अंतिम नियमों की जानकारी के लिए मंत्रालय की आधिकारिक अधिसूचना पर नजर रखना जरूरी होगा.
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