ताइवान के पास 24 घंटे में पहुंचे चीन के 49 फाइटर जेट, क्या अब नई जंग होगी? – AajTak

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ताइवान के आसपास चीन की सैन्य गतिविधियों में अचानक आई तेजी ने एक बार फिर एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. ताइवान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 3 नवंबर को स्थानीय समय सुबह 6 बजे तक पिछले 24 घंटों में चीन के 49 सैन्य विमान, नौसेना के छह जहाज और छह पोत ताइवान के आसपास देखे गए. यह 2026 में अब तक एक दिन में दर्ज की गई सबसे बड़ी संख्या है. इससे पहले फरवरी में 42 चीनी सैन्य विमानों की गतिविधि दर्ज की गई थी. इस बार का आंकड़ा उस रिकॉर्ड से भी आगे निकल गया है.
ताइवान के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, चीन के 49 विमानों में से 31 ने ताइवान स्ट्रेट की मध्य रेखा पार की और ताइवान के एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन यानी ADIZ में प्रवेश किया. यह मध्य रेखा लंबे समय तक ताइवान और चीन के बीच अनौपचारिक सैन्य सीमा की तरह काम करती रही है. हालांकि चीन इसे आधिकारिक सीमा नहीं मानता और पिछले कुछ वर्षों में उसके सैन्य विमान नियमित रूप से इसे पार करते रहे हैं.
यह समझना जरूरी है कि ADIZ किसी देश के संप्रभु हवाई क्षेत्र के समान नहीं होता. यह ऐसा पहचान क्षेत्र है, जहां आने वाले विमानों की निगरानी और पहचान की जाती है, ताकि संभावित सुरक्षा खतरे का समय रहते पता लगाया जा सके. इसलिए ADIZ में प्रवेश को सीधे ताइवान के हवाई क्षेत्र में घुसपैठ नहीं कहा जा सकता. लेकिन बड़ी संख्या में विमानों का मध्य रेखा पार करना ताइवान की सैन्य तैयारियों पर दबाव जरूर बढ़ाता है.
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ताइवान ने कैसे दिया जवाब?
चीनी विमानों और जहाजों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ताइवान ने अपने लड़ाकू विमानों की गश्त, नौसैनिक जहाजों और मिसाइल निगरानी प्रणालियों को सक्रिय किया. इस तरह की प्रतिक्रिया का उद्देश्य किसी संभावित सैन्य कार्रवाई को रोकना, गतिविधियों पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर तत्काल जवाब देने की तैयारी बनाए रखना है.
49 sorties of PLA aircraft, 6 PLAN vessels and 6 official ships operating around Taiwan detected up until 6 a.m. (UTC+8) today. 31 out of 49 sorties crossed the median line and entered Taiwan’s central, southwestern and eastern part ADIZ. #ROCArmedForces have monitored the situation and responded.
हालांकि, ऐसी परिस्थितियों में जोखिम भी बढ़ जाता है. जब दोनों पक्षों के विमान और युद्धपोत एक-दूसरे के करीब काम करते हैं, तो गलत आकलन, संचार में कमी या किसी अप्रत्याशित सैन्य गतिविधि से तनाव बढ़ सकता है. इसलिए ताइवान के आसपास लगातार बढ़ती सैन्य मौजूदगी केवल आंकड़ों का मामला नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है.
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चीन की सैन्य ताकत और रणनीतिक संदेश
चीन की नौसेना में 400 से अधिक जहाज होने का आंकड़ा उसकी तेजी से बढ़ती समुद्री सैन्य क्षमता को दर्शाता है. चीन पिछले कई वर्षों से अपने युद्धपोतों, विमानवाहक पोतों, पनडुब्बियों और लंबी दूरी तक अभियान चलाने की क्षमता का विस्तार कर रहा है. प्रशांत महासागर में उसकी बढ़ती गतिविधियां भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं.
ताइवान के आसपास बड़ी संख्या में विमानों और जहाजों की तैनाती को सैन्य दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा सकता है. इससे चीन एक ओर ताइवान को अपनी सैन्य क्षमता का संकेत देता है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों को भी संदेश देता है कि वह पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए तैयार है.
नवंबर-दिसंबर में बढ़ती गतिविधियों का क्या मतलब?
नवंबर और दिसंबर के दौरान ताइवान के आसपास चीनी सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी का पैटर्न सामने आने से यह सवाल उठता है कि क्या बीजिंग किसी बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है. हालांकि, केवल विमानों और जहाजों की संख्या के आधार पर ऐसे निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा. सैन्य अभ्यास, राजनीतिक संदेश, क्षेत्रीय शक्ति प्रदर्शन और नियमित गश्त भी ऐसी गतिविधियों के कारण हो सकते हैं.
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ताइवान का मुद्दा चीन और अमेरिका के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का सबसे संवेदनशील विषय है. चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान अपनी अलग राजनीतिक व्यवस्था और स्वशासन बनाए हुए है. अमेरिका ताइवान को हथियार और सुरक्षा सहयोग देता है, जिससे यह विवाद व्यापक अंतरराष्ट्रीय महत्व रखता है.
कुल मिलाकर, 24 घंटे में 49 चीनी सैन्य विमानों की मौजूदगी ताइवान के आसपास बढ़ते सैन्य दबाव का स्पष्ट संकेत है. लेकिन इसे तत्काल युद्ध की शुरुआत मानना जल्दबाजी होगी. आने वाले दिनों में सैन्य गतिविधियों की निरंतरता, चीन की आधिकारिक घोषणाओं और अमेरिका तथा क्षेत्रीय देशों की प्रतिक्रिया पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा.
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