मुख्य बातें
Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। इसके पीछे वह खबरें हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मिडटर्म इलेक्शन के बाद ईरान पर फिर से हमला करने का फैसला ले सकते हैं। इससे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और दुनिया भर में तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है। यानी ट्रंप के एक फैसले से दुनिया भर में महंगाई की आग और भड़क सकती है। पेट्रोल-डीजल से लेकर पेंट, प्लॉस्टिक, एविएशन, टायर और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर्स की लागत बढ़ सकती है।
द इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमत 118 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 116 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा था। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण अक्टूबर में ब्रेंट क्रूड की कीमत में 11 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई है।
ऑयल मार्केट में इस समय सबसे बड़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच संभावित सैन्य टकराव को लेकर है। खबरों के मुताबिक, अमेरिकी मध्यावधि चुनाव 3 नवंबर को होने हैं और उसके बाद सैन्य कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि, दोनों देशों के बीच बातचीत फिर शुरू कराने की कोशिशें भी जारी हैं। अगर कूटनीतिक बातचीत सफल होती है, तो तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है, लेकिन अगर सैन्य तनाव बढ़ता है, तो कीमतों में फिर तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
तेल की कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह सप्लाई बाधित होने का खतरा है। खास तौर पर होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही पर बाजार की नजर है। यह दुनिया के लिए तेल की सप्लाई का बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। इसके अलावा, सऊदी अरब की एनर्जी फैसेलिटीज और जहाजों पर हमलों की खबरों ने भी चिंता बढ़ाई है।
एनॉलिस्ट्स के मुताबिक, अगर होर्मुज से तेल की सप्लाई प्रभावित होती है और क्षेत्र में हमले तेज होते हैं, तो ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। इसके उलट, अगर शांति समझौते की दिशा में ठोस प्रगति होती है और सप्लाई सामान्य होती है, तो कीमतों में गिरावट भी आ सकती है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदकर पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने पर इसके कई असर हो सकते हैं…
महंगाई बढ़ने का खतरा: पेट्रोलियम और परिवहन की लागत बढ़ने से सामान की कीमतों पर दबाव आ सकता है।
रुपये पर दबाव: तेल आयात के लिए अधिक डॉलर खर्च होने से विदेशी मुद्रा की मांग बढ़ सकती है।
कंपनियों का मुनाफा प्रभावित: एविएशन, पेंट, टायर और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर्स की लागत बढ़ सकती है।
शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव: महंगे तेल से महंगाई और कंपनियों की कमाई को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने का मतलब यह नहीं है कि भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें तुरंत बढ़ जाएंगी। घरेलू कीमतों पर सरकारी नीतियों, तेल कंपनियों के फैसलों और अन्य कारकों का भी असर पड़ता है।
दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में ‘लाइव हिन्दुस्तान’ की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए ‘कुछ अलग’ और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें
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