दतिया उपचुनाव: कांग्रेस ने कैसे किया 'डैमेज कंट्रोल' और भाजपा के हाथ से फिसली बाजी? – Jagran

दतिया उपचुनाव में कांग्रेस नेता अवधेश नायक को मनाने के बाद पार्टी का डैमेज कंट्रोल सफल रहा, जिससे भाजपा उन्हें अपने पाले में नहीं ला पाई। …और पढ़ें
दतिया विधानसभा चुनाव (सांकेतिक तस्वीर)
कांग्रेस नेता अवधेश नायक दतिया उपचुनाव में मान गए।
भविष्य में टिकट के वादे पर कांग्रेस का साथ दिया।
दतिया में ब्राह्मण वोट बैंक पर नायक की पकड़।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर पिछले एक हफ्ते से चल रही राजनीतिक उठापटक अब खत्म हो गई है। टिकट न मिलने से रूठे बैठे कांग्रेस नेता अवधेश नायक आखिरकार मान गए। शुक्रवार रात उन्हें मनाने के लिए प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष व पूर्व मंत्री मुकेश नायक दतिया पहुंचे।
बता दें कि शुक्रवार रात को कांग्रेस के बड़े नेता मुकेश नायक उन्हें मनाने दतिया पहुंचे। दोनों के बीच लंबी बातचीत हुई। चर्चा है कि पार्टी ने उनसे वादा किया है कि उन्हें 2027 के नगर पालिका चुनाव या 2028 के विधानसभा चुनाव में टिकट दिया जाएगा। इस वादे के बाद वह मान गए।
गौर करने वाली बात यह है कि दतिया में राजनीतिक दलों के लिए अवधेश नायक इतने जरूरी क्यों थे? इस बात को दतिया के जातिगत समीकरण के आधार पर समझा जा सकता है।
दतिया विधानसभा क्षेत्र में 32 हजार से ज्यादा ब्राह्मण मतदाता हैं। अवधेश नायक ब्राह्मण समाज में अच्छी पकड़ रखते हैं। ऐसे में अगर वह बागी हो जाते या घर बैठ जाते, तो कांग्रेस को बड़ा नुकसान हो सकता था। इसी का फायदा उठाने के लिए भाजपा ने भी उन्हें अपने पाले में लाने की पूरी कोशिश की थी।
अवधेश नायक को मनाने के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था।  12 जुलाई को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी खुद अवधेश नायक के घर पहुंचे, लेकिन नायक की नाराजगी दूर नहीं हुई।
इसके बाद 13 जुलाई को मौका देखकर भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी उनसे मिलने पहुंच गए। भाजपा के मंत्री राकेश शुक्ला से मुलाकात के बाद अफवाहें उड़ीं कि नायक भाजपा में जा रहे हैं, लेकिन नायक ने साफ कह दिया कि वह भाजपा में नहीं जाएंगे।
दतिया के सियासत में जार घमासन के बाद 17 जुलाई को आखिरकार मुकेश नायक की रणनीति काम आई और अवधेश नायक मान गए। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह के लिए चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया है।
नायक के मान जाने के बाद अब दोनों ही दल जनता को रिझाने में जुट गए हैं। एक तरफ भाजपा के प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह ने दतिया में कार्यकर्ताओं की बैठक ली और उन्हें घर-घर जाकर सरकार के काम गिनाने को कहा। वहीं बसई इलाके में भाजपा के मंत्रियों और विधायकों धर्मेंद्र सिंह लोधी, प्रीतम सिंह, रणवीर रावत ने बैठकें कीं और लोधी समाज के लोगों से मुलाकात की।
दूसरी ओर कांग्रेस भी पीछे नहीं है। कांग्रेस की तरफ से खुद प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मंत्री जयवर्द्धन सिंह बसई इलाके में जाकर कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर चुके हैं। ऐसे में ये समझना ज्दाया मुश्किल नहीं होगा कि फिलहाल के लिए कांग्रेस ने अपने डैमेज कंट्रोल को संभाल लिया है और भाजपा के हाथ से अवधेश नायक को अपने साथ मिलाने का मौका निकल गया है। अब मुकाबला सीधे तौर पर जमीन पर आ गया है।

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