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दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है. सोमवार दोपहर करीब 2 बजे नदी का जलस्तर 205.36 मीटर तक पहुंच गया. यह स्तर नई दिल्ली के शास्त्री पार्क के पास रेलवे पुल पर खतरे के निशान 205.33 मीटर से ज्यादा है. केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, जलस्तर 17 अगस्त से 19 अगस्त के बीच एक मीटर से ज्यादा बढ़ गया.
यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी एक पुरानी समस्या है. कई लोग इसके लिए हरियाणा के हथनीकुंड बैराज से पानी छोड़े जाने को जिम्मेदार मानते हैं.
हालांकि, पिछले तीन दशकों के आंकड़े बताते हैं कि हथनीकुंड बैराज से पानी छोड़ा जाना ही एकमात्र कारण नहीं है.
साल 2019 और 2013 में जब 8 लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा गया, तब यमुना 207 मीटर और 206 मीटर के ऊपर बह रही थी, जिससे बड़ी बाढ़ आई. लेकिन 2023 में यमुना 208.66 मीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जबकि हथनीकुंड से केवल 3.6 लाख क्यूसेक पानी ही छोड़ा गया था. इसी तरह, 2011 में 6.4 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बावजूद कोई बड़ी बाढ़ नहीं आई.
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सरकार की क्या है तैयारी?
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यमुना नदी के किनारे बाढ़ संभावित इलाकों का निरीक्षण किया. उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार ने बाढ़ की तैयारियों की योजना को सक्रिय कर दिया है. उन्होंने सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग को नियामकों को पूरी तरह से चालू रखने का निर्देश दिया. विभाग ने नदी के किनारे 34 नावें, लाउडस्पीकर और माइक्रोफोन तैनात किए हैं, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने को कहा जा रहा है.
आंकड़ों से पता चलता है कि हथनीकुंड बैराज अहम है, लेकिन दिल्ली में बाढ़ की वजह सिर्फ एक नहीं है. दिल्ली में हुई बारिश, सहायक नदियों से पानी का बहवा, और पानी छोड़ने का वक्त भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं.
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