दिल्ली को 'छावनी' बनाने के पीछे CJP के जून में दिए उन 'वचन का उल्लंघन' बड़ी वजह – Hindustan

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा नीट प्रश्नपत्र लीक मुद्दे पर 20 जून को आयोजित प्रदर्शन के दौरान दिए गए शपथपत्र का कथित तौर पर उल्लंघन किया गया था। इसी वजह से आज दोबारा से जंतर-मंतर पर उसके प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस ने राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।

सीजेपी के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दीपके की ओर से सौरव दास द्वारा 20 जून के प्रदर्शन के लिए सौंपे गए शपथपत्र में कहा गया था कि वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2017 की रिट याचिका संख्या 1153 में तय दिशा-निर्देशों के तहत स्थायी आदेश संख्या 48/2022 के नियमों और शर्तों का पालन करेंगे। सौरव दास की ओर से इस मुद्दे पर फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं मिल सकी।

अधिकारियों ने 26 बिंदुओं वाले इस शपथपत्र का हवाला देते हुए कहा कि चूंकि इसमें दी गई शर्तों के उल्लंघन के परिणामस्वरूप राजधानी में शांति व सौहार्द भंग हुआ था, इसलिए दिल्ली पुलिस इस बार कोई जोखिम नहीं लेगी। मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ शनिवार को होने वाले प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई है। सूत्रों ने बताया कि अनुमति न होने के बावजूद सीजेपी ने 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च निकाला था।

सौरव दास ने अपने शपथपत्र में कहा था, “मैं और अन्य आयोजक यह सुनिश्चित करेंगे कि धरना या प्रदर्शन में शामिल लोग दिल्ली पुलिस कमिश्नर या ड्यूटी पर तैनात किसी भी पुलिस अधिकारी द्वारा दिए गए कानूनी निर्देशों का तुरंत पालन करेंगे।”

इसमें कहा गया था कि सौरव दास और अन्य आयोजक यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी प्रतिभागी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, सरकारी सेवक पर हमला करने, उनकी ड्यूटी में बाधा डालने, आगजनी करने या कानून का उल्लंघन करने वाली किसी भी गतिविधि में शामिल न हो।

सीजेपी ने 6 जून को जंतर-मंतर पर अपना पहला विरोध प्रदर्शन किया था, जिसमें NEET पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़े दूसरे मुद्दों को लेकर तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की गई थी।

20 जून को, सीजेपी ने NEET पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व किया। संगठन ने 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च का आह्वान किया, जिसके दौरान भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। इस मार्च में दिल्लीभर के छात्र और लोग शामिल हुए थे, लेकिन इसे पार्लियामेंट स्ट्रीट के पास रोक दिया गया, जहां पुलिस ने कई लेयर में बैरिकेड्स लगा दिए थे।

इन विरोध प्रदर्शनों के कारण धर्मेंद्र प्रधान को 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा। सीजेपी अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमीनी स्तर पर दबाव बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) समेत कुछ छात्र संगठन भी शनिवार को इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले हैं।

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