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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए तय किए गए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के चौथे चरण के तहत इमरजेंसी उपायों में ढील देने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने आदेश दिया कि ये उपाय 2 दिसंबर तक जारी रहेंगे, हालांकि स्कूलों से जुड़े उपायों में बदलाव किया गया है ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो.
कोर्ट ने स्कूल संबंधी रूल्स में ढिलाई दी और प्रदूषण के लिए जिम्मेदार संस्थान CAQM को GRAP IV उपायों के तहत स्कूलों में फिजिकल स्कूल पर प्रतिबंधों में ढील देने पर विचार करने को कहा है. इससे स्कूल हाइब्रिड मोड में चल सकेंगे. मतलब, स्कूलों में ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों मोड में पढ़ाई होगी.
जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि कोर्ट कमिश्नरों की दूसरी रिपोर्ट ने GRAP-IV के प्रावधानों को पूरी तरह और सही ढंग से लागू करने में अधिकारियों की “निपुण विफलता” सामने आई है.
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सुप्रीम कोर्ट में आजतक की खबर का संज्ञान
कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट – CAQM को GRAP-IV से GRAP-III या GRAP-II की ओर बढने के सुझावों पर काम करने के लिए कहा गया है. कोर्ट में आजतक की उस खबर पर भी चर्चा हुई जिसमें किसानों ने बताया था कि अधिकारियों ने किस तरह उन्हें पराली जलाने की सलाह दी थी. कोर्ट ने कहा कि अगर इस खबर में सच्चाई है तो यह एक बेहद ही गंभीर मामला है.
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ट्रकों पर बैन लगाने में विफल लोगों पर हो एक्शन
GRAP-IV के तहत प्रतिबंधों में ट्रकों की प्रवेश पर रोक भी शामिल है जो गैर-आवश्यक सामान ला रहे हैं. CAQM – कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट से कोर्ट ने यह भी कहा कि वे उन लोगों पर एक्शन ले जिन्होंने दिल्ली में ट्रकों के बैन को लागू कर पाने में विफल रहे हैं. आंशिक रूप से 2017 में लागू किया गया GRAP उपायों का एक सेट है जो कि वायु प्रदूषण को काबू करने के लिए काम करता है.
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