संयुक्त राष्ट्र में हिंदी को गैर-आधिकारिक भाषा का दर्जा बरकरार रखा गया है। भारत ने वैश्विक संचार विभाग में हिंदी …और पढ़ें
संयुक्त राष्ट्र में हिंदी का गैर-आधिकारिक भाषा दर्जा बरकरार।
संयुक्त राष्ट्र में हिंदी का गैर-आधिकारिक भाषा दर्जा बरकरार।
भारत ने हिंदी के इस्तेमाल को स्वैच्छिक समर्थन दिया।
बहुभाषावाद प्रस्ताव में गैर-आधिकारिक भाषाओं का महत्व स्वीकार।
डिजिटल डेस्क, संयुक्त राष्ट्र। भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक संचार विभाग (यूएनडीजीसी) में हिंदी के इस्तेमाल को स्वैच्छिक समर्थन दिए जाने के साथ ही इस भाषा का गैर-आधिकारिक भाषा का दर्जा बरकरार रखा है।
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने गुरुवार को यहां हिंदी दिवस के आयोजन पर कहा, ‘हाल ही में स्वीकृत बहुभाषावाद संबंधी प्रस्ताव में हिंदी को गैर-आधिकारिक भाषा का दर्जा बरकरार रखा गया है।
इसकी वजह वैश्विक संचार विभाग की ओर से इस भाषा में समाचार और इंटरनेट मीडिया सामग्री का प्रसारण है। उन्होंने कहा कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र में हिंदी परियोजना को स्वैच्छिक समर्थन दिया है। इसके तहत दुनिया भर के हिंदीभाषी लोगों तक संयुक्त राष्ट्र की खबरें और जानकारी पहुंचाई जाती हैं।
‘अंडोरा के सह-प्रायोजन में पिछले महीने महासभा द्वारा स्वीकृत बहुभाषावाद संबंधी प्रस्ताव में ‘गैर-आधिकारिक भाषाओं के सांस्कृतिक, राजनीतिक और कूटनीतिक महत्व को मान्यता दी गई है, ताकि संयुक्त राष्ट्र के कामकाज में प्रतिनिधित्व और प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित हो सके। इसमें इस बात की पुष्टि की गई है कि कोई भी प्रतिनिधि गैर-आधिकारिक भाषा में संबोधन दे सकता है।’
हरीश ने कहा, ‘भारत ने संयुक्त राष्ट्र में बहुभाषावाद का लगातार समर्थन किया है और इस विषय पर प्रस्तावों का सह-प्रायोजन किया है।’ गृह मंत्री अमित शाह का हवाला देते हुए उन्होंने कहा,‘भाषा सबसे अधिक सार्थक तब होती है, जब वह लोगों और उनकी संस्कृति को बांटने के बजाय जोड़ती है।’
उन्होंने कहा कि हिंदी ‘दुनिया में तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है’ और इसकी पहुंच ‘भारत की सीमाओं से भी आगे तक है।’ यह भाषा ‘भारत के विचारों, कहानियों और सांस्कृतिक विरासत को दुनिया भर में साझा करने का एक अहम माध्यम’ बन गई है।
उन्होंने कहा, ‘हमारे प्रवासी समुदाय, साहित्य, सिनेमा और डिजिटल मंचों ने दुनिया भर के लोगों तक इस भाषा को पहुंचाने में मदद की है।’
बहुभाषावाद संबंधी प्रस्ताव के प्रायोजक अंडोरा के स्थायी प्रतिनिधि जोआन फोर्नेर रोविरा ने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र चार्टर का अनुच्छेद एक हमसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मानवाधिकारों तथा मौलिक स्वतंत्रताओं के सम्मान को बढ़ावा देने का आह्वान करता है।’
अपने बहुभाषी देश की ओर से प्रस्ताव का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा, ‘इस सोच को हकीकत में बदलने के लिए भाषा जरूरी है।’
सोर्स- न्यूज एजेंसी आइएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार