Yuvraj Singh
Date: 23-10-26 15:25
भारत में प्राकृतिक गैस का घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक अहम खबर सामने आई है. सरकारी कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) ने कृष्णा-गोदावरी बेसिन के समुद्र में स्थित एक ब्लॉक में प्राकृतिक गैस का नया भंडार खोजा है. कंपनी को यह ब्लॉक डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड (DSF) की बोली प्रक्रिया के जरिए मिला था. शुरुआती जांच के दौरान यहां प्रतिदिन लाखों स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस का प्रवाह दर्ज किया गया है. ऐसे में इस खोज से देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में कितनी मदद मिल सकती है और भारत को इससे क्या फायदा होगा, आइए जानते हैं.
कृष्णा-गोदावरी बेसिन में कहां मिली गैस?
ऑयल इंडिया लिमिटेड के मुताबिक, प्राकृतिक गैस की यह खोज कृष्णा-गोदावरी बेसिन के मत्स्यपुरी फॉर्मेशन में हुई है. कंपनी को KG-DSF/GSKW/2028 ब्लॉक के गोदावरी-1 कुएं में गैस मिली है. यह ब्लॉक समुद्र के उथले पानी में स्थित है. इस खोज की खास बात यह है कि कंपनी को ऐसे क्षेत्र में गैस मिली है, जहां पहले जांच नहीं की गई थी. शुरुआती नतीजों के बाद अब इस क्षेत्र में गैस की उपलब्धता और उत्पादन की संभावनाओं को लेकर आगे की जांच की तैयारी की जा रही है.
जांच में कितनी गैस मिली?
कंपनी ने 16 अक्टूबर 2026 को गोदावरी-1 कुएं में करीब 2,027 मीटर की गहराई पर गैस का परीक्षण शुरू किया था. शुरुआती चरण में यहां प्रतिदिन लगभग 1 लाख स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर (SCMD) गैस का प्रवाह दर्ज किया गया. आगे की जांच के दौरान यह मात्रा बढ़कर करीब 2 लाख SCMD तक पहुंच गई. इसके अलावा, कंपनी ने प्रतिदिन लगभग 170 बैरल कंडेनसेट मिलने की जानकारी भी दी है.
कंडेनसेट एक तरल हाइड्रोकार्बन है, जो प्राकृतिक गैस के साथ प्राप्त हो सकता है. कंपनी अब इस क्षेत्र के अगले ऊपरी हिस्से में भी गैस की मौजूदगी की जांच करने की तैयारी में है. हालांकि, शुरुआती परीक्षण में गैस का प्रवाह मिलने का मतलब यह नहीं है कि पूरे भंडार का आकार और व्यावसायिक उत्पादन की क्षमता तय हो गई है. इसके लिए आगे विस्तृत मूल्यांकन की जरूरत होगी.
भारत को इस खोज से क्या फायदा हो सकता है?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में दूसरे देशों से प्राकृतिक गैस और कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में देश के भीतर नए गैस भंडार मिलने से घरेलू उत्पादन बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं. यदि इस खोज से व्यावसायिक स्तर पर गैस का उत्पादन संभव होता है, तो इससे आयात पर निर्भरता कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिल सकती है.
घरेलू गैस की उपलब्धता बढ़ने का फायदा कई क्षेत्रों को मिल सकता है. इनमें खाद बनाने वाली कंपनियां, बिजली उत्पादन केंद्र, रिफाइनरी उद्योग और सिटी गैस वितरण कंपनियां शामिल हैं. इसके अलावा, वाहनों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी (CNG) और घरों में खाना पकाने के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली पीएनजी (PNG) की आपूर्ति को भी इससे मदद मिल सकती है. हालांकि, इसका वास्तविक असर उत्पादन की मात्रा, लागत और गैस को बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था पर निर्भर करेगा.
प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल कहां-कहां होता है?
प्राकृतिक गैस भारत की ऊर्जा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसका इस्तेमाल बिजली बनाने, उर्वरक उत्पादन और रिफाइनरी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है. इसके अलावा, शहरों में वाहनों के ईंधन के रूप में सीएनजी और घरों में खाना पकाने के लिए पीएनजी के तौर पर भी इसका उपयोग होता है.
यही वजह है कि देश में प्राकृतिक गैस के नए भंडारों की खोज को ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है. कृष्णा-गोदावरी बेसिन में ऑयल इंडिया लिमिटेड की यह खोज भी इसी दिशा में एक संभावित कदम है. अब आगे की जांच और मूल्यांकन से पता चलेगा कि यहां से कितनी गैस का उत्पादन लंबे समय तक और व्यावसायिक रूप से किया जा सकता है.
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