देश में बाल विवाह की भयावह तस्वीर, हर पांचवीं लड़की की 18 वर्ष से पहले शादी; रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे – Jagran

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर जारी आंकड़ों के अनुसार, दुनिया की हर तीसरी बाल वधू भारतीय है, जिसमें 9 करोड़ से अधिक लड़कियों की शादी 15 साल से पहले हुई।
भारत में बाल विवाह की भयावह स्थिति (यह तस्वीर AI की मदद से बनाई गई है।)
दुनिया की हर तीसरी बाल वधू अकेले भारत में है।
9 करोड़ से अधिक लड़कियों की शादी 15 साल से पहले हुई।
2030 तक बाल विवाह को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर सामने आए आंकड़े बताते हैं कि साल 2030 तक बाल विवाह को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य नजदीक है, लेकिन दुनिया की हर तीसरी बाल वधू अकेले भारत में है। हालांकि, देश में बाल विवाह के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जो 1996 में 50 प्रतिशत से अधिक से घटकर अब लगभग 20 प्रतिशत पर आ गई है।
इसके बावजूद, आज भी हर पांच में से एक भारतीय युवती की शादी 18 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले ही कर दी जाती है। यूनिसेफ के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 20-24 साल की उम्र की 22.4 करोड़ से ज्यादा ऐसी महिलाएं हैं जिनकी शादी 17 साल की उम्र से पहले हो गई थी। इनमें से नौ करोड़ से ज्यादा महिलाओं की शादी तो 15 साल की उम्र से पहले ही हो गई थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि “राष्ट्रीय औसत से भ्रमित होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि कुछ राज्यों में यह समस्या बेहद गंभीर और चिंताजनक बनी हुई है।” यूनिसेफ और सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल बाल विवाहों में से आधे से अधिक केवल पांच राज्यों – उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश – में होते हैं। इसके विपरीत, केरलम और लक्षद्वीप जैसे राज्य इस दिशा में सराहनीय प्रदर्शन कर रहे हैं। यू
निसेफ इंडिया की प्रतिनिधि सिंथिया मैकेफेरी ने जोर देकर कहा कि इस वर्ष के अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस का विषय – “बाल विवाह का अंत करें और बालिकाओं के अधिकारों में निवेश करें” – किशोरियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए निरंतर निवेश की मांग करता है।
‘क्राई’ (चाइल्ड राइट्स एंड यू) की सीईओ पूजा मारवाह ने कहा कि “कम उम्र में विवाह से न केवल लड़कियों का बचपन छिन जाता है, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में उनके विकल्प भी हमेशा के लिए सीमित हो जाते हैं।” राष्ट्रीय औसत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन बाल विवाह का पूर्ण उन्मूलन सुनिश्चित करने के लिए भौगोलिक और सामाजिक संदर्भों के आधार पर विशेष प्रयास करने होंगे।
‘जस्ट राइट्स फार चिल्ड्रन’ के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह समस्या मुख्य रूप से गरीब परिवारों में अधिक है, जो दो वक्त की रोटी और भरण-पोषण की लाचारी के कारण अपनी बेटियों की जल्दी शादी करने पर मजबूर होते हैं।
कानूनी मोर्चे पर, बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के का विवाह अवैध है। भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अंतर्गत 18 वर्ष से कम उम्र की पत्नी के साथ कोई भी यौन संबंध सीधे तौर पर दुष्कर्म की श्रेणी में आता है।
राजा राममोहन राय और ईश्वर चंद्र विद्यासागर जैसे समाज सुधारकों के समय से शुरू हुए सुधार आंदोलनों के बाद, आज सरकार 2030 तक इस कुप्रथा को जड़ से मिटाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कड़े कानूनों से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर बालिकाओं को उनका वास्तविक हक दिलाकर ही इस सामाजिक कलंक को मिटाया जा सकता है। (समाचार एजेंसी PTI के इनपुट के साथ)

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