दो साल में बनने लगेंगे 'मेड इन इंडिया' पैसेंजर प्लेन, बोइंग-एयरबस के दबदबे के बीच भारत लिखेगा नया अध्याय – Jagran

नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने घोषणा की है कि भारत अगले दो वर्षों में संयुक्त उद्यम के माध्यम से अपना पहला स्वदेशी नागरिक विमान बनाएगा।
भारत दो साल में पहला स्वदेशी नागरिक विमान बनाएगा (सांकेतिक तस्वीर)
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने मंगलवार को कहा है कि भारत अगले दो वर्षों में अपना पहला स्वदेशी नागरिक विमान बना लेगा। यह काम संयुक्त उद्यम के जरिए होगा।
भारतीय फाउंडेशन फार क्वालिटी मैनेजमेंट के एक कार्यक्रम में नायडू ने कहा, ‘दो वर्षों के भीतर हम संयुक्त उपक्रम् के माध्यम से मेड-इन-इंडिया नागरिक विमान बना सकेंगे।’
उन्होंने जोर दिया कि भारत में विमान मैन्यूफैक्चरिंग का पूरा इकोसिस्टम मजबूत हो रहा है, लेकिन उच्च-स्तरीय मैन्युफैक्चरिंग के लिए गुणवत्तापूर्ण सामग्री के साथ ही कुशल श्रम व सक्षम नीतिगत ढांचा जरूरी है।
विमानन मंत्री नायडू ने यह भी स्वीकार किया कि यह लंबी प्रक्रिया होगी। उन्होंने यह भी कहा कि बोइंग और एयरबस फिलहाल भारत से करीब 4 अरब डालर के कलपुर्जे और सेवाएं ले रहे हैं, जो इस दशक के अंत तक यह 10 अरब डालर का हो जाएगा।
विमानन मंत्री की उक्त घोषणा को अगर जमीनी सच्चाई से तुलना की जाए तो यह बात सामने आती है कि भारत का विमानन सेक्टर में तेजी से सुधार हुआ है लेकिन घरेलू स्तर पर यात्री विमानों का निर्माण होने में अभी लंबा समय लग सकता है। पिछले वर्षों में विमानन निर्माण को लेकर कई संयुक्त उद्यम भारत में बने हैं।
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (यूएसी) के साथ सुपरजेट एसजे-100 क्षेत्रीय यात्री विमान के भारत में लाइसेंस उत्पादन पर समझौता किया है। अक्टूबर 2025 में शुरुआती समझौता हुआ और 2026 में सहयोग का ढांचा आगे बढ़ाया गया है।
योजना घरेलू बाजार के लिए इस विमान के निर्माण की है। इसी तरह से टाटा समूह की टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और एयरबस ने वडोदरा में सी-925 परिवहन विमान की फाइनल असेंबली लाइन स्थापित की है। 56 विमानों के रक्षा अनुबंध में 40 विमान भारत में बनाये जाएंगे।
निजी समूह की महिंद्रा समूह पहले ही आस्ट्रेलिया की गिप्सलैंड एयरोनॉटिक्स (अब गिप्सएयरो) में बड़ी हिस्सेदारी खरीद चुका है। यह कंपनी भी छोटे यात्री विमान बनाती हैं।
इसके अलावा महिंद्रा ने विमान निर्माण के लिए नोवावायु एयरोस्पेस कंपनी भी बनाई है और एम्ब्रेयर के साथ सैन्य परिवहन विमान कार्यक्रम में साझेदारी की है। नागरिक विमानों के लिए एम्ब्रेयर ने अदाणी समूह के साथ हाथ बढ़ाया है।
विमानन मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि उक्त सारी घोषणाएं भारत में विमानन निर्माण के आधारभूत ढांचा को बेहतर बनाने में मदद करने वाली हैं। देशी व विदेशी विमानन कंपनियों की नजर भारत के विमानन बाजार की तेज वृद्धि पर है। 2014 में देश में करीब 74 हवाई अड्डे थे, अब 166 हैं।
विमानन मंत्रालय की तैयारी अगले दस वर्षों में 100 और हवाई अड्डों को नेटवर्क से जोड़ने की है। यात्री आवाजाही भी तेजी से बढ़ी है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारतीय हवाई अड्डों ने करीब 41.2 करोड़ यात्रियों को संभाला है।
घरेलू एयरलाइनों का मौजूदा बेड़ा करीब 850 विमानों का है, जबकि 1600 से अधिक विमानों का आर्डर दिया जा चुका है। इनकी अनुमानित कीमत लगभग 100 अरब डालर है।
इंडिगो और एयर इंडिया आज दुनिया में सबसे ज्यादा विमानों के आर्डर देने वाली कंपनियां हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि विमानन कंपनियोंं की नजर उक्त बाजार पर है।
लेकिन विमान निर्माण में स्थापित होना आसान नहीं। डिजाइन, प्रमाणन, सप्लाई चेन और उत्पादन लाइन खड़ी करने में आमतौर पर एक दशक या उससे अधिक लग जाता है।
चीन की सरकारी कंपनी सीओएमएसी-2008 में बनी थी। उसका पहला विमान 15 वर्षों बाद सी-919 पहला वाणिज्यिक उड़ान 2023 में भर सका था। वैश्विक नागरिक विमान बाजार में अभी भी मुख्य रूप से दो कंपनियों, अमेरिका की बोइंग और यूरोप की एयरबस का दबदबा है।
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