धर्मेंद्र प्रधान की जगह प्रह्लाद जोशी को ही क्यों मिली शिक्षा मंत्रालय की कमान? पूरा गणित – Hindustan

Prahlad Joshi: भाजपा के वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से शनिवार को इस्तीफा दे दिया। राष्ट्र्पति द्रौपदी मुर्मू ने इसे स्वीकार किया और पीएम मोदी की अनुशंसा पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। लगभग 5 साल तक शिक्षा शास्त्री भवन (शिक्षा मंत्रालय) की जिम्मेदारी संभालने वाले धर्मेंद्र प्रधान की विदाई हो चुकी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर पीएम मोदी ने पहले से ही दो बड़े मंत्रालय संभाल रहे प्रह्लाद जोशी पर ही भरोसा क्यों जताया?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसेमंद माने जाने वाले कर्नाटक भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रह्लाद जोशी पहले से ही दो बड़े मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वह भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के प्रमुख हैं। ऐसे में शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलना यह दिखाता है कि सरकार संकट के समय में किसी अनुभवी व्यक्ति के हाथ में मंत्रालय की बागडोर देना चाहती थी।

भारत के नए शिक्षा मंत्री के रूप में चुने गए प्रह्लाद जोशी को प्रशासनिक कार्यों का लंबा अनुभव है। वह 2019 से लेकर 2024 तक संसदीय कार्यमंत्री रह चुके हैं। इस दौरान उन्होंने विभिन्न दलों के बीच में सहमति बनाने और सदन के संचालन को चलाने का व्यापक अनुभव हासिल किया है। नीट पेपर लीक की वजह से विवादों में आए शिक्षा मंत्रालय के लिए संकट के दौर में उनसे बेहतर मंत्री नहीं सकता था। क्योंकि इस समय पर संसद का मॉनसून सत्र चल रहा है और विपक्ष पूरी तरह से सरकार को घेरने के मूड में है।

नीट पेपर लीक के बाद धर्मेंद्र प्रधान और शिक्षा मंत्रालय को लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। उनके इस्तीफे के बाद अब यहां काम संभालना आसान नहीं होगा क्योंकि पूरे देश की नजर अब इसी मंत्रालय पर होंगी। ऐसे में नए नेतृत्व के सामने देश भर के लाखों बच्चों और अभ्यार्थियों के विश्वास को जीतने की चुनौती होगी। इसमें परीक्षा प्रणाली में सुधार और कमियों को दूर करना सबसे बड़ा काम होगा। दूसरी तरफ इस आंदोलन के बाद छात्रों का भी भरोसा डगमगाया है। उनसे भी पूरे विश्वास के साथ संवाद स्थापित करना होगा ताकि यह भरोसा दिलाया जा सके कि सरकार नकल और पेपर लीक मामलों पर सख्ती के साथ काम कर रही है।

संकट से गुजर रहे शिक्षा मंत्रालय के सामने इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती स्थिरता की है। संकट से गुजर रहे शिक्षा मंत्रालय के सामने इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती स्थिरता की है। ऐसे में एक भरोसेमंद वरिष्ठ नेता को अतिरिक्त प्रभार सौंपना सरकार की स्पष्ट प्रशासनिक रणनीति को प्रदर्शित करता है। यानी सरकार यहां पर संकेत दे रही है कि वह त्वरित राजनीतिक समाधान की बजाय प्रशासनिक निरंतरता और मजबूत संकट प्रबंधन को प्राथमिकता दे रही है। अब जबकि प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल ली है, तो सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि आखिर कैसे वह इन चुनौतियों से निपटते हैं।

उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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