नार्को-आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक रणनीति बनाने के लिए भारत की पहल – Hindustan

नार्को-आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी से निपटने के लिए भारत ने वैश्विक स्तर पर साझा रणनीति विकसित करने की पहल की है। विभिन्न देशों के कानूनों में समानता लाना, अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट्स के खिलाफ कार्रवाई को प्रभावी बनाना और नशीले पदार्थों से होने वाली अवैध कमाई के जरिए आतंकवाद को मिलने वाली आर्थिक मदद पर रोक लगाने के लिए वैश्विक एजेंसियों से संपर्क साधा गया है। भारत का मानना है कि मादक पदार्थों की तस्करी अब केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के वित्तपोषण और युवाओं के भविष्य से जुड़ी गंभीर चुनौती बन चुकी है। अलग-अलग देशों के कानूनों और प्रवर्तन व्यवस्थाओं में अंतर का फायदा उठाकर अंतरराष्ट्रीय गिरोह अपनी गतिविधियां जारी रखते हैं। ऐसे में इनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए देशों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग आवश्यक है। सूत्रों ने कहा कई देशों से इस संबंध में संपर्क किया गया है। इनमें अमेरिका और यूरोपीय देश भी शामिल हैं। अफगानिस्तान, म्यांमार, श्रीलंका आदि देशों को भी ड्रग विरोधी मुहिम में शामिल करने का प्रयास किया जा रहा।
अंतरराष्ट्रीय कानूनों में समानता पर जोर
भारत की प्रस्तावित रणनीति में प्रतिबंधित सिंथेटिक ड्रग्स की साझा परिभाषा, तस्करी और अवैध वित्तीय लेनदेन के खिलाफ प्रभावी कानूनी प्रावधान, वांछित अपराधियों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को तेज करना तथा जांच एजेंसियों के बीच खुफिया सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान जैसे उपाय शामिल हैं। पहल का व्यापक उद्देश्य उन कानूनी और प्रशासनिक खामियों को दूर करना है, जिनका लाभ उठाकर तस्कर एक देश में अपराध करने के बाद दूसरे देश में शरण ले लेते हैं। भारत की रणनीति अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से ऐसे नेटवर्क के वित्तीय और संगठनात्मक ढांचे को कमजोर करने पर केंद्रित है।
घरेलू स्तर पर भी बहुआयामी रणनीति
अधिकारियों ने कहा कि भारत में मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई का दायरा केवल नशीले पदार्थों की जब्ती तक सीमित नहीं है। इसमें तस्करी के पूरे नेटवर्क की पहचान, अवैध कमाई पर कार्रवाई, डिजिटल माध्यमों से होने वाले अपराधों की निगरानी, युवाओं में जागरूकता और नशे की लत से प्रभावित लोगों के पुनर्वास को भी महत्व दिया जाता है।
शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता पर जोर
डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल से होने वाली तस्करी पर नियंत्रण, सिंथेटिक ड्रग्स के निर्माण में प्रयुक्त रसायनों के अवैध इस्तेमाल को रोकना तथा शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाना इस दिशा के प्रमुख उपाय हैं। इसके साथ ही नशामुक्ति केंद्रों की क्षमता बढ़ाने और सुरक्षा एजेंसियों को आधुनिक तकनीक से लैस करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया जा रहा है।
हिन्दुस्तान भारत का एक प्रतिष्ठित हिंदी समाचार-पत्र है, जिसकी स्थापना 1936 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी। स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को समेटे यह प्रकाशन आज भारत के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले हिंदी समाचार-पत्रों में दूसरे स्थान पर है। WAN-IFRA के अनुसार, 2016 में ‘हिन्दुस्तान’ विश्व के शीर्ष 13 सर्वाधिक प्रसारित अखबारों में शामिल था। हर रोज 5 राज्‍यों सह‍ित देश की राजधानी द‍िल्‍ली और एनसीआर (नोएडा, गाज‍ियाबाद, गुरुग्राम) में 23 संस्‍करण प्रकाश‍ित होते हैं। ‘पाठक सर्वोपर‍ि’ हिन्दुस्तान की संपादकीय नीति है। समय पर, शोध और गहन खोजबीन के बाद व‍िस्‍तार से न्‍यूज र‍िपोर्ट प्रकाश‍ित की जाती है। हर खबर में सभी पक्षों और दृष्टिकोणों को संतुलित रूप से पेश किया जाता है।
आरएसएसविज्ञापन र॓टहमार॓ साथ काम करेंहमारे बारे मेंसंपर्क करेंगोपनीयतासाइट जानकारी
Advertise with usAbout usCareers Privacy Contact usSitemapCode Of Ethics
Partner sites: Hindustan TimesMintHT TechShineHT AutoHealthshotsHT SmartcastFAB Play

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News