CJI Suryakant: देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत बुधवार (27 मई) को एक ऐसी याचिका पर सुनवाई कर रहे थे जिसमें कई तरह के मामलों के लिए वर्चुअल सुनवाई और केवल अधिसूचित मुख्य मामलों की सुनवाई के लिए ही लिए फिजिकल सुनवाई करने की मांग की गई थी। इस याचिका की सुनवाई करते हुए CJI ने तो पहले इस याचिका की सराहना की फिर दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते तापमान, लू और भीषण गर्मी पर चिंता जताते हुए कहा कि हम इस पर कोई आदेश जारी नहीं कर सकते।
कोर्ट रूम में CJI सूर्यकांत ने कहा, “दिल्ली का तापमान 50 डिग्री तक पहुंच रहा है, ऐसे में वरिष्ठ सदस्यों के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट से आना शायद ठीक न हो। सबसे अच्छा तरीका ऑनलाइन है। लेकिन हम इस तरह का कोई आदेश (mandamus) जारी नहीं कर सकते। यह पूरी तरह से वकीलों के अपने विवेक पर निर्भर है।”
इसके बाद उस याचिका पर CJI ने एक आदेश जारी किया। आदेश में उन्होंने लिखा, “हम उस याचिका की सराहना करते हैं, जिसमें वर्चुअल सुनवाई की मांग की गई है। हालांकि, इस कोर्ट के लिए यह उचित नहीं होगा कि वह कोई ऐसा न्यायिक आदेश जारी करे, जिसमें वकीलों को केवल ऑनलाइन ही पेश होने का निर्देश दिया जाए। हम कोई निर्देश जारी नहीं कर रहे हैं… लेकिन हमारे दो प्रशासनिक सर्कुलर के माध्यम से एक विनम्र अपील की गई है, और हम उन सभी का स्वागत करते हैं जो कोर्ट की कार्यवाही में ऑनलाइन शामिल होने का फैसला करते हैं।”
बार एंड बेंच के मुताबिक, इस दौरान याचिकाकर्ता वकील ने CJI से कहा, “हर दिन, सभी जेलों से लगभग 230 बसें कैदियों को कोर्ट की सुनवाई में शामिल होने के लिए लाती हैं। उन्हें कोर्ट की सुनवाई में शामिल होने के लिए हर दिन आना पड़ता है। अगर जेल अधिकारी उन्हें वर्चुअल सुनवाई के ज़रिए पेश करें, तो इससे बहुत बचत होगी।” इस पर CJI ने पूछा कि क्या आप कोई खास उदाहरण दे सकते हैं?
इसके जवाब में वकील ने कहा, “माई लॉर्ड, 14 दिन की न्यायिक हिरासत के मामलों में, जब भी न्यायिक हिरासत बढ़ाने का मामला आता है, तो कैदियों को हर बार अदालत में पेश होना पड़ता है। उस दौरान भी, माई लॉर्ड, अगर तीन महीने के लिए यह निर्देश दिया जाए कि उन्हें शारीरिक रूप से पेश न किया जाए, तो बहुत बचत हो सकती है।” इस पर CJI ने कहा, “हम डेटा की जाँच करेंगे फिर कोई फ़ैसला लेंगे।” दरअसल, याचिकाकर्ता वकील ने अपनी अर्जी में सुप्रीम कोर्ट से देशभर की अदालतों में ऑनलाइन सुनवाई करने का आदेश पारित करने की गुहार लगाई थी ताकि मौजूदा ईरान संघर्ष के बीच उपजे ईंधन संकट से निबटा जा सके और ईंधन की बचत की जा सके।
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प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- ‘मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन’ रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम ‘मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन’ है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
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