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पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने दावा किया है कि राजनीति में आने के लिए महिलाओं को कई तरह के दबावों से गुजरना पड़ता है. उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों के कुछ नेता महिलाओं को गलत नजर से देखते हैं और उनका शोषण करते हैं. सांसद ने कहा, ‘पटना के हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों को नेताओं को परोसा जाता है.’ पप्पू ने दावा किया कि एक अखबार के स्टिंग ऑपरेशन में भी इस तरह की बातें सामने आई थीं.
पप्पू यादव ने कहा कि यह समस्या सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षण संस्थानों, कॉर्पोरेट सेक्टर और पुलिस व्यवस्था तक फैली हुई है. उन्होंने कहा कि ‘शिक्षकों की नजर छात्राओं पर, कॉर्पोरेट में लड़कियों पर और पुलिस में भी महिलाओं पर गलत नजर रहती है.’
अपने बयान के दौरान पप्पू यादव ने कुछ अश्लील गानों का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि ऐसे गानों को कौन लोग बढ़ावा दे रहे हैं और समाज किस दिशा में जा रहा है. वहीं, महिला आयोग द्वारा नोटिस भेजे जाने पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि जिन लोगों के खुद कई विवादित मामले सामने आ चुके हैं, वे उन्हें नोटिस भेज रहे हैं.
पप्पू यादव ने कहा कि ऐसे नोटिस को उन्होंने ‘रद्दी की टोकरी में फेंक दिया’ है. उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर बोलना बंद नहीं करेंगे. इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्मा गया है.
क्या था पप्पू यादव का बयान?
पप्पू यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में महिला आरक्षण से जुड़े सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि राजनीति में बड़ी संख्या में महिलाएं बिना प्रभावशाली नेताओं के समर्थन के आगे नहीं बढ़ पातीं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के लिए राजनीतिक नेतृत्व की सोच जिम्मेदार है.
उन्होंने कहा कि 90% महिलाओं को नेताओं के रूम से होकर गुजरना पड़ता है. पप्पू ने उस दौरान भ्रूण हत्या, घरेलू हिंसा और महिलाओं के प्रति गलत नजरिए जैसे गंभीर मुद्दों का भी जिक्र किया. उनके इस बयान को कई लोगों ने आपत्तिजनक और महिलाओं का अपमान करने वाला बताया. इसके बाद बिहार महिला आयोग ने उन्हें नोटिस भेजा.
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