पद्म विभूषण लोकगायिका तीजन बाई का निधन, रायपुर AIIMS में ली आखिरी सांस, महाभारत के किस्सों को अपनी आवाज से बन – India.Com

Pandavani singer Teejan Bai: भारत की मशहूर लोक कलाकार और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान डॉ. तीजन बाई अब हमारे बीच नहीं रहीं. रविवार तड़के करीब 3:15 बजे उन्होंने रायपुर के एम्स (AIIMS) अस्पताल में अंतिम सांस ली. तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज और बेजोड़ एक्टिंग के दम पर पारंपरिक पंडवानी लोक कला यानि महाभारत की पारंपरिक कथा गायन शैली को ग्लोबल स्टेज पर पहुंचाया. वे देश की उन चुनिंदा कलाकारों में से थीं, जिन्हें भारत सरकार ने पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे तीनों बड़े नागरिक सम्मानों से नवाजा था. उनके निधन से देश के सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर है.

तीजन बाई पिछले कुछ समय से कई बीमारियों से जूझ रही थीं. साल 2024 में उन्हें पैरालिसिस का अटैक भी आया था. तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें कुछ हफ्ते पहले रायपुर AIIMS में भर्ती कराया गया था. रविवार सुबह अचानक उनकी हालत और क्रिटिकल हो गई. डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका. डॉक्टरों के अनुसार, उन्होंने सुबह 3:15 बजे अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर आते ही सोशल मीडिया पर उनके फैंस, बड़े नेता और कलाकार उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं.

तीजन बाई का जन्म साल 1956 में छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के गनियारी गांव में हुआ था. उनका शुरुआती जीवन बेहद संघर्षपूर्ण रहा. महज 13 साल की उम्र में उन्होंने पंडवानी गाना शुरू कर दिया था. उन्होंने उस दौर में पंडवानी की ‘कापालिक शैली’ को अपनाया, जब इस शैली पर सिर्फ पुरुषों का वर्चस्व माना जाता था. उस समय महिलाएं केवल बैठकर गाती थीं, लेकिन तीजन बाई पहली महिला थीं जिन्होंने खड़े होकर और हाथ में तंबूरा लेकर आक्रामक अंदाज में परफॉर्म करना शुरू किया. इसके लिए उन्हें अपने परिवार और समाज के भारी विरोध का सामना भी करना पड़ा.

तीजन बाई के टैलेंट को सबसे पहले देश के प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने पहचाना. इसके बाद तीजन बाई की कला का सफर कभी नहीं रुका. उन्होंने देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से लेकर दुनिया के कई बड़े नेताओं के सामने लाइव परफॉर्मेंस दी. उन्होंने इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी और जापान जैसे 17 से ज्यादा देशों में छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू बिखेरी. हाथ में तंबूरा लेकर जब वे अपनी कड़क आवाज और लाजवाब एक्टिंग के साथ स्टेज पर उतरती थीं, तो ऑडियंस मंत्रमुग्ध हो जाती थी.
तीजन बाई का कला करियर पांच दशकों से भी ज्यादा लंबा रहा. उन्होंने न केवल इस कला को जिंदा रखा, बल्कि नई पीढ़ी के कलाकारों को भी इंस्पायर किया. उनके ऐतिहासिक योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें कई बड़े अवॉर्ड्स दिए,

तीजन बाई भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन पंडवानी कला को इंटरनेशनल पहचान दिलाने में उनका योगदान हमेशा अमर रहेगा.
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सत्यम, बिहार से हैं. उन्होंने LS College, मुजफ्फरपुर, बिहार से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया से MA In Media Governance में मास्टर्स किया है. मास्टर्स के साथ … और पढ़ें
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