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पश्चिम बंगाल की सियासत में 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद बड़ा बदलाव देखने को मिला है. इसका असर अब राज्य के सबसे बड़े त्योहार दुर्गा पूजा पर भी साफ दिखाई दे रहा है. लंबे समय तक जिन पूजा पंडालों में तृणमूल कांग्रेस का प्रभाव नजर आता था, वहां अब राजनीतिक तस्वीर बदलती दिख रही है. कई पूजा समितियां अब पहले से अलग रुख अपनाते हुए BJP नेताओं को भी आमंत्रित कर रही हैं. पहले जो समितियां TMC नेताओं के बिना प्रशासनिक कामों में आगे नहीं बढ़ती थीं, अब उनमें दूरी और नए जुड़ाव दोनों देखने को मिल रहे हैं. कुल मिलाकर, दुर्गा पूजा पंडालों में राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं.
बंगाल में BJP ने 207 सीटों के साथ 18वीं विधानसभा में सरकार बनाई, जिसके बाद कई पुराने राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं. कोलकाता की प्रमुख पूजा समितियां, जो पहले TMC नेताओं के करीब रहती थीं, अब BJP नेताओं को जोड़ने की ओर बढ़ रही हैं. समितियों का कहना है कि बदलते समय के साथ तालमेल बैठाना जरूरी है.
मामला नंबर 1: चोरबागान सर्वजनिन
कोलकाता की प्रसिद्ध चोरबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा में पहले ममता बनर्जी की तस्वीरें और TMC के झंडे दिखाई देते थे. इस बार माहौल बदल गया है और पंडाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के बड़े पोस्टर लगाए गए हैं. समिति के सचिव जयंत बनर्जी ने बतया कि पहले प्रशासनिक मंजूरी और अन्य कामों में सुविधा के लिए TMC नेताओं से जुड़ाव रखा जाता था, लेकिन अब वे BJP नेताओं को भी साथ जोड़ना चाहते हैं. उनका कहना है कि इससे पूजा और भी भव्य तरीके से आयोजित होगी.
मामला नंबर 2: दर्जीपाड़ा सर्वजनिन
उत्तर कोलकाता की 86 साल पुरानी दर्जीपाड़ा सर्वजनिन पूजा समिति ने नई सरकार से सहयोग की उम्मीद जताई है. आयोजकों का कहना है कि हर साल यह चर्चा रहती है कि किन पूजा समितियों को बेहतर माना जाए और किन्हें कम महत्व मिले. उन्होंने मांग की है कि नई सरकार सभी पूजा समितियों को समान रूप से देखे. साथ ही उम्मीद जताई गई है कि पहले की तरह सरकारी अनुदान भी जारी रहेगा.
मामला नंबर 3: अहिरीटोला सर्वजनिन
अहिरीटोला सर्वजनिन में इस बार पंडाल को खास तौर पर सजाया गया है. यहां शुभेंदु अधिकारी की तस्वीरें और BJP के कमल लगाए गए हैं. समिति ने इस बार नई विधायक पूर्णिमा घोष को भी आमंत्रित किया है और पहले TMC से जुड़े नेताओं की जगह अब BJP से जुड़ाव बढ़ता दिख रहा है. आयोजकों का मानना है कि नई सरकार में दुर्गा पूजा और ज्यादा भव्य रूप ले सकती है.
मामला नंबर 4: संतोष मित्रा स्क्वायर
संतोष मित्रा स्क्वायर कोलकाता की उन चुनिंदा बड़ी पूजा समितियों में रहा है, जहां पहले भी TMC का प्रभाव सीमित रहा है. यहां के प्रमुख आयोजक और BJP विधायक सजल घोष लंबे समय से इस पूजा से जुड़े हैं. उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा हमेशा जनता के सहयोग से चलती है और आगे भी चलती रहेगी. उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी समिति को परेशानी होती है तो वे मदद के लिए तैयार रहेंगे.
सरकारी अनुदान पर उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा बहुत पहले से होती आई है और आगे भी जारी रहेगी. उनके अनुसार, क्लबों पर खर्च होने वाले बड़े बजट का उपयोग जनहित के कामों में भी किया जा सकता है.
कुल मिलाकर, बंगाल की दुर्गा पूजा अब सिर्फ आस्था का पर्व नहीं रह गई है, बल्कि बदलते राजनीतिक समीकरणों का भी प्रतिबिंब बनती दिख रही है. कई पूजा समितियां अब नए राजनीतिक माहौल के साथ तालमेल बैठाते हुए आगे बढ़ रही हैं और आने वाले समय में इस बदलाव का असर और साफ नजर आने की उम्मीद है.
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