पहलगाम का 'काला चिट्ठा': NIA की चार्जशीट से खुलासा, कैसे पाकिस्तान से आए कॉर्डिनेट्स – ABP News

Pahalgam Attack Whole Story: एक साल पहले जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था. पाकिस्तान की तरफ से हुए इस आतंकी हमले की वजह से 4 दिन तक दोनों देशों के बीच में युद्ध भी चला था. इसी आतंकी हमले से जुड़े कई बड़े खुलासे हम एबीपी न्यूज डिजिटल पर दो भागों में NIA की चार्जशीट और सूत्रों से मिली जानकारी और सबूतों के आधार पर करेंगे. 
इसका स्क्रीनशॉट लेकर आतंकी बिलाल अफजल उर्फ फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान ने अपने फोन में इंस्टॉल्ड अल्पाइन क्वेस्ट ऐप में सेव कर लिया. इस समय आतंकी बिलाल अफजल उर्फ फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान के फोन पर कॉर्डिनेट्स आए थे, उस समय उसके साथ दो और आतंकी हबीब ताहिर और हनन जफर उर्फ हमजा अफगानी भी थे. साथ ही ये तीनोंं आतंकी बैसरान पार्क से 6 किलोमीटर दूर किसी जंगल में थे.
कैसे हमले को दिया था आतंकियों ने अंजाम
2 दिनों तक इन तीनोंं आतंकियों ने हमले की रूपरेखा बनायी और 19 अप्रैल और 20 अप्रैल को बरसात होने की वजह से 21 अप्रैल को ये तीनोंं आतंकी बैसरन पार्क से कुछ मीटर दूर परवेज अहमद की धोक पर पहुचें. जहां बशीर अहमद जोथड़ से इन तीनोंं आतंकियों ने बात की. खाना खिलाने के लिए कहा और बशीर अहमद जोथड़ ने अपने भांजे परवेज अहमद से इन तीनोंं आतंकियों को मिलवाया. परवेज इन तीनोंं आतंकियों को अपनी धोक में ले गया. जहां परवेज की पत्नी ने तीनोंं आतंकियों को टमाटर-चावल खिलाए और खाना खाने के बाद तीनोंं आतंकियों ने परवेज और बशीर से आसपास की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में पूछा, अमरनाथ यात्रा के बारे में जानकारी ली.
जहां इन तीनोंं के पास ऑटोमैटिक राइफल थी. जिसे इन्होंने शाल में छुपा रखा था. थोड़ी देर रेकी करके ये तीनों आतंकी एक जगह बैठ गए और कुछ देर बाद बैसरन पार्क में पोनी राइडर का काम करने वाले परवेज अहमद और बशीर अहमद जोथड़ जिन्होंने एक दिन पहले इन तीनोंं आतंकियों को खाना खिलाया था, उनसे फिर से तीनोंं आतंकीयो की बैसरन पार्क में मुलाकात हुई और आपस में कुछ बातचीत की गई.
कुछ घंटे इंतज़ार करने के बाद तक़रीबन दो बजे के आसपास तीनोंं आतंकियों ने बैसरन पार्क में मौजूद पर्यटकों से एक एक करके बंदूक की नोक पर कलमा पढ़वाना शुरू किया. जिसने पढ़ लिया उसे जाने दिया गया और जो नहीं पढ़ पाया उसे मार दिया गया. कुल मिलाकर हबीबुल्लाह उर्फ सैफुल्लाह साजिद जट्ट के आदेश पर बिलाल अफजल उर्फ फैसल जट्ट, हबीब ताहिर और हनन जफर उर्फ हमजा अफगानी ने 26 मासूमों की जान, इस आतंकी हमले में ली थी. इसमें में 11 की हत्या अकेले आतंकी बिलाल अफजल उर्फ फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान ने अपनी एम-4 राइफल से ली थी.
 
पहले भी कई हमलों को अंजाम दे चुका है अफजल उर्फ फैसल जट्ट
यह पहला मौका नहीं था जब पाकिस्तान के शेखपुरा में रहने वाले बिलाल अफजल उर्फ फैसल जट्ट ने हबीबुल्लाह उर्फ सैफुल्लाह साजिद के आदेश पर किसी आतंकी हमले को अंजाम दिया हो. पहलगाम में आतंकी हमले से पहले इस आतंकी ने ठीक एक साल पहले 9 जून 2024 को शिव खोरी जा रहे हिंदू श्रद्धालुओं की बस पर रायसी में हमला कर दिया था.
जिसमें 9 हिंदू श्रद्धालुओं की मौत हुई थी और 41 घायल हुए थे. साथ ही गंगानगीर में APCO की कंस्ट्रक्शन साईट Z-मोड़ टनल पर भी इस आतंकी ने अन्य साथियों के साथ मिलकर हमला किया था. इसमें 7 कर्मचारियों की मौत हुई थी. साल 2023 से जम्मू कश्मीर में ऐक्टिव पाकिस्तान के शेखपुरा में रहने वाले बिलाल अफजल उर्फ फैसल जट्ट ने पहला आतंकी हमला पुंछ में सेना के वाहन पर हमला करके किया था. इसमें 4 जवान शहीद हो गए थे.
 
साथ ही सुरनकोट में भारतीय वायुसेना के कॉन्वॉय भी हुए आतंकी हमले में बिलाल अफजल उर्फ फैसल जट्ट शामिल था. इसकी बाकायदा वीडियो भी आतंकियों ने बनायी थी. इसी तरह 22 अक्टूबर 2024 को कश्मीर के गुलमर्ग के बूटा पथरी इलाके में हुए आतंकी हमले में भी बिलाल अफजल उर्फ फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शामिल था. 
पहलगाम में आतंकी हमला करने के बाद ये तीनोंं आतंकी बिलाल अफजल उर्फ फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर और हनन जफर उर्फ हमजा अफगानी भाग गए थे. जिन्हें जम्मू कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना और खुफिया एजेंसियां ढूंढ़ती रही. वही दूसरी ओर आतंकी हमले की जांच की कमान नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (NIA) को मिली. इसने सबसे पहले आतंकी हमले की साइट बैसरन पार्क का निरीक्षण किया. फॉरेंसिक टीम ने DNA सैंपल्स, गोलियों के खोखे इकट्ठा किए.
सेंट्रल फॉरेंसिक लैब्स को भेजे. जांच का दायरा बढ़ाते हुए NIA ने सबसे पहले हमले के दिन बैसरन पार्क में मौजूद सभी लोगो को पूछताछ के लिए बुलाया. इसमें एक चश्मदीद जिसे आतंकियों ने कलमा पढ़वा कर छोड़ दिया था. उसने NIA को बताया कि आतंकी हमले के दिन परवेज और बशीर दोनों हमले में शामिल तीन आतंकियों से बात कर रहे थे. साथ ही हमले के एक दिन पहले इस चश्मदीद ने बशीर अहमद जोथड़ को तीन आतंकियों को इशारा करके परवेज़ की धोक की तरफ ले जाते हुए देखा था.
कैसे कैसे दिया था सेना ऑपरेशन को अंजाम
जिसके बाद बशीर और परवेजकी धोक पर जब एनआईए की टीम पहुचीं तो वो खाली थी. दोनों भाग चुके थे. ऐसे में एनआईए की दो टीमें बशीर अहमद जोथड़ और परवेज अहमद को पकड़ने निकली, बशीर अहमद जोथड़ बैसरन घाटी से 35 किलोमीटर दूर अनंतनाग के खैयार गांव में अपने घर में छुपा हुआ था. परवेज अहमद अपनी पत्नी के साथ पहलगाम के बटकोट गांव में बैसरन घाटी से 6 किलोमीटर दूर छुपा हुआ था.

दोनों ने एनआईए के सामने पूछताछ में बताया कि उन्हें आतंकी हमले के बाद आशंका थी कि उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है. इसी वजह से दोनों बैसरन घाटी छोड़ कर चले गए थे. साथ ही इन दोनों ने बैसरन में आतंकी हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों को कंबल, त्रिपाल देने की बात कबूली थी. साथ ही परवेज ने पूछताछ में ये भी बताया की आतंकी हमले को अंजाम देने वाले तीनोंं आतंकी आपस में बातचीत के दौरान साजिद जट्ट उर्फ अली का नाम ले रहे थे.
पहलगाम में आतंकी हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों को ढूंढने के लिए सेना, पुलिस और खुफिया एजेंसी लागतार 22 अप्रैल से टेक्निकल इंटेलिजेंस और गुप्तचरों के सहारे लगी हुई थी. सूत्रों के मुताबिक खुफिया एजेंसी के पास सिर्फ एक लीड थी, वो था पहलगाम में हमले के दिन बैसरन घाटी में एक्टिव एक वॉकी टॉकी जो हमले के दिन तो ट्रैक हुआ था, लेकिन उसके बाद से बंद था.
ऐसे तीनों आतंकियों को मौत के घाट उतारा
हालांकि 23 जुलाई को ये बंद पड़ा वॉकी टॉकी फिर से एक्टिव हुआ और इस बार इसकी लोकेशन थी. बैसरन घाटी से 100 किलोमीटर दूर दागवान घाटी. जैसे ही ये जानकारी खुफिया एजेंसियों को लगी. उन्होंने सबसे पहले जानकारी भारतीय सेना और जम्मू कश्मीर पुलिस के साथ साझा की. जहां एक तरफ भारतीय सेना, जम्मू कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने मिलकर लोकेशन पर पांच लेयर का कॉर्डन लगाया, तो खुफिया विभाग के गुप्तचरों ने जानकारी दी कि तीन आतंकी दागवान घाटी में हथियार के साथ मौजूद है. जानकारी और कॉर्डन पुख्ता होते ही 28 जुलाई को भारतीय सेना ने पहलगाम में नरसंहार करने वाले तीनों आतंकियों को मार दिया.
इन तीनों आतंकियों के पास से सेना को 1 एम-4 राइफल, 2 एके-47, दो मोबाइल फोन और कई गोलियां बरामद हुई थी. जब इन बरामद सामग्रियों को एनआईए के हवाले किया गया और फिर सेंट्रल फॉरेंसिक लैब में भेजा गया, तो सामने आया कि तीनोंं आतंकियों के पास से जो एम-4 राइफल और एके-47 मिली थी. उनका ही प्रयोग पहलगाम में आतंकी हमले को अंजाम देने के लिए किया गया था.
साथ ही मारे गए तीनों आतंकियों की शिनाख्त बशीर अहमद जोथड़, परवेज अहमद ने भी की थी. इसके अलावा सेंट्रल फॉरेंसिक लेबोरेटरी की जांच में ये भी सामने आया की आतंकियों के पास से बरामद 1 एम-4 राइफल और 1 एके-47 का इस्तेमाल पहलगाम हमले से पहले 6 अन्य आतंकी हमलों में हो चुका था. इसके रायसी आतंकी हमला, डीकेजी आतंकी हमला, एयरफोर्स कॉन्वॉय आतंकी हमला, गगनगीर आतंकी हमला, जेड मोड़ टनर आतंकी हमला शामिल था.
(अगले पार्ट में पढ़िए कैसे एनआईए ने इन तीनोंं आतंकियों और उनको हमले का आदेश देने वाले आतंकी हबीबुल्लाह उर्फ साजिद के कनेक्शन का सबूतों के साथ खुलासा किया. साथ ही एनआईए की चार्जशीट से इतर देखिए पहली बार हमले का आदेश देने वाले हबीबुल्लाह उर्फ साजिद जट्ट की तस्वीर और हमले के पाकिस्तान कनेक्शन के अन्य सबूत.)
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Source: IOCL
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