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एक टैंक… दो लोग… और कुछ मिनटों में खत्म हो गई दो जिंदगियां. ग्रेटर नोएडा की एक पॉश हाउसिंग सोसायटी में शनिवार देर रात जो हुआ, उसने लोगों को झकझोर दिया. एक कर्मचारी एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) टैंक की सफाई करने के लिए अंदर उतरा. जब वह काफी देर तक बाहर नहीं आया तो उसे बचाने के लिए सिक्योरिटी गार्ड भी टैंक में उतर गया. लेकिन वह भी वापस नहीं लौट सका. जब तक पुलिस और फायर सर्विस की टीम पहुंची, तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
घटना ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 स्थित एल्डिको सोसायटी की है. पुलिस के मुताबिक, 25 और 26 जुलाई की दरमियानी रात सोसायटी में एसटीपी टैंक की सफाई का काम चल रहा था. करीब 40 वर्षीय शशिकांत शर्मा टैंक के अंदर सफाई के लिए उतरे. वे राजस्थान के करौली जिले के रहने वाले थे.
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कुछ समय बीत गया, लेकिन वह बाहर नहीं आए. बाहर मौजूद लोगों को लगा कि शायद अंदर कोई दिक्कत हो गई है. उन्हें बचाने के लिए 22 वर्षीय सिक्योरिटी गार्ड आकाश बिना किसी देरी के टैंक में उतर गया. आकाश उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद का रहने वाला था. लेकिन कुछ ही देर बाद आकाश भी बाहर नहीं निकला.
दोनों के टैंक के अंदर फंसे होने की सूचना मिलते ही नॉलेज पार्क थाना पुलिस और फायर सर्विस की टीम मौके पर पहुंची. रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. काफी मशक्कत के बाद दोनों को बाहर निकाला गया और तुरंत अस्पताल ले जाया गया. लेकिन डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया.
आशंका है कि टैंक के अंदर मौजूद जहरीली गैस या ऑक्सीजन की कमी के कारण दोनों बेहोश हो गए. हालांकि मौत की सटीक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही सामने आएगी. पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है.
सवाल है कि क्या टैंक में किसी कर्मचारी को उतारने से पहले गैस की जांच की गई थी?क्या वहां ऑक्सीजन सिलेंडर, सेफ्टी हार्नेस, गैस डिटेक्टर या कोई आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी? और सबसे बड़ा सवाल… अगर एक व्यक्ति अंदर बेहोश हो गया था, तो दूसरे को बिना सुरक्षा उपकरणों के उसी टैंक में क्यों उतरना पड़ा?
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