इस्लामाबाद: पाकिस्तान हमेशा की तरह एक बार फिर आतंकियों को खुला मंच थमाने में लग गया है. कैसूर में आयोजित लश्कर-ए-तैयबा के ‘यौम-ए-तकबीर’ जलसे में आतंकवादी खुलेआम भारत के खिलाफ जहर उगलते दिखे और सुरक्षा देने वाली थी खुद पाकिस्तानी फौज. ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुनिया की नजरों में बुरी तरह घिरा पाकिस्तान अब एक नए स्तर पर पहुंच गया है. अब वहां आतंकी संगठन सरेआम अपनी सभाएं कर रहे हैं और इन सभाओं में उन्हें पूरी सरकारी सुरक्षा भी दी जा रही है. पंजाब प्रांत के कैसूर इलाके में हुए इस जलसे ने पाकिस्तान के चेहरे से नकाब हटा दिया है.
इस जलसे की सबसे चौंकाने वाली बात रही लश्कर के उप कमांडर सैफुल्लाह कसूरी का भाषण, जिसमें उसने पूरे 20 मिनट तक भारत के खिलाफ नफरत फैलाने वाली बातें कीं. कसूरी ने ऑपरेशन सिंदूर में मारे गए आतंकियों को ‘शहीद’ बताते हुए उन्हें ‘सलाम’ किया और पहलगाम हमले में खुद को ‘फंसाया गया’ बताकर भावनात्मक जाल फैलाने की कोशिश की. हैरत की बात यह रही कि कसूरी ने दावा किया कि पाकिस्तानी हैकरों ने भारत की 70% बिजली ग्रिड काट दी थी, और इस पर भीड़ ने जमकर तालियां बजाईं.
हालांकि पाकिस्तानी पब्लिक यह भूल गई कि आज की दुनिया सिर्फ तालियों से नहीं, सबूतों से चलती है. इस जलसे में हाफिज सईद का बेटा तल्हा सईद भी मौजूद था. वही हाफिज सईद जिसे संयुक्त राष्ट्र ने आतंकवादी घोषित कर रखा है. सूत्रों के मुताबिक, इन सभाओं का असली मकसद पाकिस्तान की आम जनता से चंदा वसूलना और नई भर्तियां करना है. यह कोई आम कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था जिसे पाकिस्तानी फौज और आईएसआई ने समर्थन दिया. सुरक्षा इंतज़ाम ऐसे थे मानो यह कोई सरकारी VIP कार्यक्रम हो. विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की यह ‘अघोषित नीति’-जिसमें आतंकियों को जनसमर्थन दिलवाया जा रहा है, उसके अंदरूनी हालात की हताशा को दर्शाती है. यह न सिर्फ क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है, बल्कि भारत के लिए सीधा सुरक्षा संकट भी.