उत्तराखंड का पिथौरागढ़ जिला इन दिनों एक खास वजह से चर्चा में है. दरअसल वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का मानना है कि ये इलाका भारत का पहला यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क बनने की क्षमता रखता है. अगर ऐसा होता है तो ये सिर्फ पिथौरागढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए बड़ी कामयाबी होगी. मगर सवाल ये है कि आखिर यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क होता क्या है. इसके अलावा पिथौरागढ़ में ऐसा क्या खास है और इससे स्थानीय लोगों को क्या फायदा होगा? आइए आसान भाषा में समझते हैं.
दरअसल यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क किसी ऐसे इलाके को कहा जाता है, जहां करोड़ों या अरबों साल पुराने भूवैज्ञानिक अवशेष, चट्टानें, पहाड़, गुफाएं, जीवाश्म, नदियां या अन्य प्राकृतिक धरोहर मौजूद हों. मगर इसमें भी सिर्फ भूवैज्ञानिक महत्व होना ही काफी नहीं है. ऐसे क्षेत्र में जैव विविधता, स्थानीय संस्कृति, इतिहास, पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति संरक्षण के साथ-साथ टिकाऊ पर्यटन (सस्टेनेबल टूरिज्म) को भी बढ़ावा दिया जाता है. यानी जियोपार्क सिर्फ पत्थरों या पहाड़ों का संग्रह नहीं होता, बल्कि यह प्रकृति, संस्कृति और लोगों के विकास को एक साथ जोड़ने वाला मॉडल भी है.
दिल्ली विश्वविद्यालय के राम लाल आनंद कॉलेज के रिसर्चरों का मानना है कि पिथौरागढ़ और इसके आसपास के बेरीनाग, गंगोलीहाट और चौकोड़ी जैसे क्षेत्रों में कई दुर्लभ भूवैज्ञानिक धरोहर मौजूद हैं. उन्होंने बताया कि यहां ऊंचे हिमालयी पर्वत, ग्लेशियर, नदियां, गुफाएं, दुर्लभ खनिज और करोड़ों साल पुराने जीवाश्म पाए जाते हैं. यही वजह है कि वैज्ञानिक इस पूरे क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण मानते हैं.
पिथौरागढ़ की सबसे अनोखी पहचान यहां मिलने वाले स्ट्रोमैटोलाइट (Stromatolite) जीवाश्म हैं. ये धरती पर जीवन के सबसे पुराने सबूतों में गिने जाते हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक इनकी उम्र करीब 3.4 से 4 अरब साल तक हो सकती है. ये जीवाश्म प्राचीन सूक्ष्म जीवों यानी सायनोबैक्टीरिया (ब्लू-ग्रीन एल्गी) द्वारा बनाए गए थे. इन्हीं सूक्ष्म जीवों ने सबसे पहले फोटोसिंथेसिस यानी प्रकाश संश्लेषण शुरू किया और वातावरण में ऑक्सीजन छोड़नी शुरू की. माना जाता है कि इसी प्रक्रिया ने धीरे-धीरे पृथ्वी को जटिल जीवों के रहने लायक बनाया. यही कारण है कि स्ट्रोमैटोलाइट को पृथ्वी पर जीवन के शुरुआती इतिहास को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
दुनिया के कई देशों में यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि भारत में अभी तक एक भी यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क नहीं है. अगर पिथौरागढ़ को यह दर्जा मिलता है, तो यह भारत का पहला ऐसा क्षेत्र होगा जिसे वैश्विक स्तर पर इस पहचान के साथ मान्यता मिलेगी.
जियोपार्क बनने का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय लोगों को मिल सकता है. ऐसे क्षेत्रों में देश-विदेश से पर्यटक और शोधकर्ता आते हैं. इससे होटल, होम-स्टे, लोकल गाइड, हैंडीक्राफ्ट, ट्रांसपोर्ट और स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ती है. यानी रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं. साथ ही इलाके की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने पर भी ज्यादा ध्यान दिया जाता है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इसका लाभ उठा सकें.
नहीं. यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क का उद्देश्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं होता. इसका मकसद लोगों को पृथ्वी के इतिहास के बारे में जागरूक करना, वैज्ञानिक शिक्षा को बढ़ावा देना, पर्यावरण संरक्षण करना और स्थानीय समुदाय को विकास की प्रक्रिया में शामिल करना भी होता है. यानी विकास और प्रकृति संरक्षण, दोनों साथ-साथ चलते हैं.
फिलहाल शोधकर्ता और एक्सपर्ट्स पिथौरागढ़ की भूवैज्ञानिक विरासत का डॉक्यूमेंटेशन कर रहे हैं. साथ ही स्थानीय लोगों और छात्रों को भी इस महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है. अगर सभी जरूरी मानकों पर यह क्षेत्र खरा उतरता है और यूनेस्को की प्रक्रिया पूरी होती है, तो आने वाले समय में पिथौरागढ़ भारत का पहला यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क बन सकता है.
सवाल: यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क क्या होता है?
जवाब: यह ऐसा क्षेत्र होता है जहां भूवैज्ञानिक धरोहर, जैव विविधता, संस्कृति और स्थानीय विरासत को संरक्षण और टिकाऊ विकास के साथ जोड़ा जाता है.
सवाल: पिथौरागढ़ क्यों चर्चा में है?
जवाब: यहां करोड़ों साल पुराने स्ट्रोमैटोलाइट जीवाश्म, दुर्लभ चट्टानें, गुफाएं, ग्लेशियर और अन्य भूवैज्ञानिक धरोहर मौजूद हैं. इसलिए इसे यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क बनाने की संभावना जताई जा रही है.
सवाल: स्ट्रोमैटोलाइट क्या हैं?
जवाब: ये प्राचीन सूक्ष्म जीवों द्वारा बने जीवाश्म हैं, जिन्हें पृथ्वी पर जीवन के सबसे पुराने प्रमाणों में माना जाता है।
सवाल: क्या भारत में अभी कोई यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क है?
जवाब: नहीं. अभी भारत के पास यूनेस्को की मान्यता प्राप्त एक भी ग्लोबल जियोपार्क नहीं है.
सवाल: जियोपार्क बनने से स्थानीय लोगों को क्या फायदा होगा?
जवाब: पर्यटन बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर बनेंगे, स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलेगा और प्राकृतिक व सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में मदद मिलेगी.
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