पुतिन की यात्रा: कारोबारी घाटा पाटना चाहता है भारत , रूस की चाह एसयू-57 बेचना – Jagran

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राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा से पहले, दोनों देश व्यापार और रक्षा सहयोग पर चर्चा कर रहे हैं। भारत का मुख्य लक्ष्य व्यापार घाटे को कम करना है, जबकि र …और पढ़ें
भारत-रूस शिखर सम्मेलन पर जोर। फाइल फोटो
जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की गुरुवार को होने वाली भारत यात्रा से पहले दोनों देशों के विदेश, रक्षा और वाणिज्य मंत्रालयों के अधिकारी लगातार रणनीतिक चर्चा में जुटे हैं।
पांच दिसंबर को होने वाले 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में भारत का मुख्य जोर तेजी से बढ़ते व्यापार घाटे को घटाने पर होगा, जबकि रूस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान सुखोई-57 और एस-400 मिसाइल सिस्टम की नई खेप की बिक्री को प्राथमिकता देगा। वहीं भारत की अपेक्षा होगी कि रूस से सुखोई-57 की खरीद के साथ उसकी तकनीक हस्तांतरण पर भी बात हो।
रूस ने छोटे परमाणु रिएक्टरों के लिए प्रौद्योगिकी देने का भी संकेत दिया है। बता दें कि पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के परमाणु क्षेत्र को प्राइवेट सेक्टर के लिए खोलने की घोषणा की थी। रूस इस मौके का फायदा उठाना चाहता है।
रूस, भारत के साथ अपने तेल कारोबार को ऐसी ‘अभेद्य संरचना’ देने पर जोर दे रहा है जिस पर अमेरिका या यूरोपीय देशों का कोई प्रभाव न पड़े। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने संकेत दिया कि दोनों देश ऐसी व्यवस्था पर बात कर रहे हैं जिससे भारत-रूस ऊर्जा व्यापार पर किसी तीसरे देश का दबाव बेअसर हो जाए।
पेस्कोव ने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार तभी फलदायी है जब दोनों देशों को लाभ मिले और इसे विदेशी दबाव से सुरक्षित रखना जरूरी है। अगर हम इस द्विपक्षीय व्यापार से कमाई कर रहे हैं, तो इसे जारी रखना होगा। उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया लेकिन उनका संकेत अमेरिका व यूरोपीय देशों की तरफ था जो भारत पर लगातार रूस के साथ कारोबार नहीं करने का दबाव बना रहे हैं।
भारत में छोटे परमाणु संयंत्र बाजार पर रूस की नजर दरअसल, अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा रूस से भारत के तेल आयात पर बढ़ते दबाव तथा शुल्कों ने मास्को को नई सुरक्षा व्यवस्था पर जोर देने के लिए प्रेरित किया है। इस बीच रूस की रणनीतिक पेशकश में सुखोई-57, एस-400 की नई खेप और भारत की नई ‘छोटे परमाणु संयंत्र’ परियोजना में तकनीकी सहायता प्रमुख बिंदु हैं।
पेस्कोव ने बताया कि राष्ट्रपति पुतिन की यात्रा के एजेंडे में आर्थिक संबंधों के साथ रक्षा सहयोग संबंध भी काफी महत्वपूर्ण रहेगा। रूसी पक्ष की तरफ से भारत को अत्याधुनिक सुखोई-57 लड़ाकू विमानों की बिक्री के साथ ही एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की नई खेप की आपूर्ति का प्रस्ताव रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि, ‘छोटे परमाणु संयंत्र बनाने की भारत की नई घोषणा में रूस पूरी तरह से मदद कर सकता है। रूस पहले से ही भारत को परमाणु ऊर्जा संयंत्र की प्रौद्योगिकी उपलब्ध कराता रहा है।’व्यापार घाटा पाटने पर भी होगा मंथन उधर भारत व्यापार घाटे को लेकर चिंतिंत है, जो 2025 में 68.7 अरब डालर तक पहुंच चुका है, जबकि भारत का निर्यात मात्र 4.8 अरब डालर है।
तेल आयात इसका सबसे बड़ा कारण है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन शुक्रवार को 150 भारतीय-रूसी उद्यमियों को संयुक्त रूप से संबोधित करेंगे, जिसमें व्यापार संतुलन प्रमुख विषय होगा।
भारतीय विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि रूस के साथ व्यापार घाटा हमारे लिए चिंता का कारण है और इसे पाटने के लिए आपसी कारोबार को बढ़ाने की बात हो रही है। क्रेमिलन प्रवक्ता ने यह स्वीकार किया कि इस बारे में भारत की चिंता जायज है। इस बारे में शीर्ष स्तरीय बैठक में बात होगी।
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