फरीदाबाद मंडल, सरसमल। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए वर्ष 2002 की मतदाता सूची लोगों के लिए चुनौती बन रहा है। इसका बन्दोबस्त करने के लिए लोग भटक रहे हैं। कॉमन सर्विस सेंटर जाकर चुनाव आयोग की वेबसाइट से सूची अपलोड करवानी पड़ रही है। खासतौर से गांव और कॉलोनियों के लोग ज्यादा परेशान हैं। विपक्षी राजनीतिक दल भी सवाल खड़े करने लगा है। एसआईआर प्रक्रिया में कई महिलाओं को अपने मायके की वर्ष 2002 की मतदाता सूची खोजनी पड़ रही है। शादी के बाद दूसरे शहर या जिले में रह रहीं महिलाओं के सामने दस्तावेज जुटाना बड़ी चुनौती बन गया है। सेक्टर-22 निवासी सीमा देवी ने बताया कि उनके माता-पिता का घर अब दूसरे राज्य में है। वहां से पुरानी मतदाता सूची की प्रति मंगवाने के लिए रिश्तेदारों की मदद लेनी पड़ रही है। इसी तरह पर्वती देवी और सुनीता का कहना है कि परिवार के दूसरे काम छोड़कर उन्हें पुराने रिकॉर्ड तलाशने पड़ रहे हैं। कई महिलाएं फोन और सोशल मीडिया के जरिए अपने मायके वालों से संपर्क कर सूची ढूंढ़ने में लगी हैं。
कई इलाकों में बीएलओ मतदाताओं को फार्म तो दे रहे हैं, लेकिन वर्ष 2002 की मतदाता सूची की प्रति उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। कुछ बीएलओ के पास संबंधित बूथों की पीडीएफ कॉपी है, जिसे वे लोगों को दे रहे हैं। हालांकि काफी जगह में ऐसे बूथ हैं, जिनकी पुरानी सूची उनके पास भी नहीं है। इससे लोग खुद इंटरनेट, परिचितों और राजनीतिक दलों के माध्यम से रिकॉर्ड जुटाने का प्रयास कर रहे हैं। मतदाताओं का कहना है कि जब प्रशासन ने दस्तावेज मांगे हैं तो उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी प्रशासन की होनी चाहिए।
कई परिवारों में इस बात को लेकर चिंता है कि यदि निर्धारित दस्तावेज समय पर जमा नहीं हुए तो उनका नाम मतदाता सूची से हट सकता है। एनआईटी निवासी राजेश कुमार ने बताया कि पहले से तय पारिवारिक कार्यक्रम और गर्मी की छुट्टियों की योजनाएं छोड़कर अब दस्तावेज जुटाने पड़ रहे हैं। बल्लभगढ़ निवासी महेश शर्मा का कहना है कि लोगों को प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं मिल रही, जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है। बुजुर्ग और कम पढ़े-लिखे मतदाता सबसे अधिक परेशान हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि कौन-सा दस्तावेज पर्याप्त माना जाएगा।
कांग्रेस नेताओं ने भी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस नेता रोहित नागर का आरोप है कि वर्ष 2025 की मतदाता सूची उपलब्ध नहीं होने से राजनीतिक दलों को भी वास्तविक स्थिति का पता नहीं चल पा रहा। उनका आरोप है कि तिगांव विधानसभा क्षेत्र की एक सूची में एक ही महिला की फोटो अलग-अलग नामों के साथ कई स्थानों पर दर्ज मिली। उनका कहना है कि यदि पूरी सूची उपलब्ध कराई जाए तो अन्य त्रुटियों की भी जांच की जा सकती है। विपक्ष का आरोप है कि पारदर्शिता के लिए सभी संबंधित सूचियां सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
मतदाताओं का कहना है कि एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना है, लेकिन प्रक्रिया इतनी जटिल नहीं होनी चाहिए कि आम लोगों को रिकॉर्ड जुटाने के लिए भटकना पड़े। लोगों ने मांग की है कि प्रशासन पुराने रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध कराए और सहायता केंद्र स्थापित करे। सामाजिक संगठनों का कहना है कि दस्तावेजों की अनुपलब्धता के कारण किसी पात्र मतदाता को परेशानी नहीं होनी चाहिए। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर प्रक्रिया को सरल बनाएगा, ताकि मतदाताओं की चिंता कम हो सके।
नूंह। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में लापरवाही बरतने पर एक बीएलओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की सिफारिश की गई है। जांच में घर-घर सत्यापन, गणना प्रपत्र वितरण और संग्रहण कार्य में अनियमितताएं सामने आईं। मामले को गंभीर मानते हुए निर्वाचन अधिकारियों ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
सरकारी प्रवक्ता के अनुसार विधानसभा क्षेत्र-79 नूंह के बूथ नंबर-185 पर तैनात बीएलओ सुनील कुमार, जेबीटी, राजकीय माध्यमिक विद्यालय बिरसीका के कार्यों की समीक्षा के दौरान कई कमियां पाई गईं। एसडीएम एवं निर्वाचक पंजीयन अधिकारी आदित्य विक्रम ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-32 के तहत उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की सिफारिश की है।
जांच में पाया गया कि संबंधित बीएलओ निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार घर-घर जाकर मतदाताओं के सत्यापन कार्य में अपेक्षित गंभीरता नहीं बरत रहे थे। निर्धारित समय सीमा के भीतर गणना प्रपत्रों के वितरण और संग्रहण का कार्य भी संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके अलावा वे समीक्षा बैठकों में अनुपस्थित रहे और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी की ओर से जारी निर्देशों का भी पालन नहीं किया।
प्रवक्ता के अनुसार संबंधित कर्मचारी को कई बार निर्देश और नोटिस जारी किए गए, लेकिन इसके बावजूद कार्य में सुधार नहीं हुआ। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार की लापरवाही से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की प्रक्रिया तथा मतदाता सूची की शुद्धता और विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
एसडीएम ने कहा कि निर्वाचन कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील जिम्मेदारी है। इसमें किसी भी प्रकार की उदासीनता या कर्तव्यहीनता को स्वीकार नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एसआईआर को लेकर नियमित निरीक्षण।किया जा रहा है। जहां बीएलओ और मतदाता को दिक्कत आ रही है, उसे दूर किया जा रहा है।
-डॉ. हनी बंसल, एसडीएम, फरीदाबाद
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