ईरानी राजनयिक ने कहा कि अपराधों को सामान्य मान लेने से किसी की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती.
चंदन कुमार जजवाड़े
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ईरान के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई पर कुछ यूरोपीय नेताओं की चुप्पी के बीच जर्मनी में ईरान के राजनयिक ने कहा है कि व्हाइट हाउस के कथित अपराधों को सामान्य मान लेना किसी की सुरक्षा की गारंटी नहीं है.
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, गुरुवार को जारी एक संदेश में माजिद नीली ने कहा कि अमेरिका ने चीन-तुर्कमेनिस्तान-ईरान रेल कॉरिडोर पर स्थित अघ-तप्पेह-खान पुल को निशाना बनाया.
उन्होंने कहा कि यह पुल महज़ एक रेलवे ढांचा नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय परिवहन और व्यापार मार्ग का अहम हिस्सा है.
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यूरोप के कुछ नेताओं को संबोधित करते हुए माजिद नीली ने कहा कि अगर ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर पर अमेरिका के इस कथित हमले की आज जवाबदेही तय नहीं होती है और न ही इसकी निंदा होती है, तो भविष्य में ऐसे अन्य कॉरिडोर को भी आसानी से निशाना बनाया जा सकता है, जिनका लाभ यूरोपीय देश भी उठाते हैं.
उन्होंने कहा कि अपराधों को सामान्य मान लेने से किसी की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती.
अमेरिका के ताबड़तोड़ हमले, ईरान का दावा बुशहर का न्यूक्लियार पॉवर प्लांट भी निशाने पर
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यूक्रेन की सेना ने रूस के कब्ज़े वाले क्राइमिया के आसपास अपने हमले तेज कर दिए हैं. क्राइमिया को रूस से जोड़ने वाले ज़मीनी रास्ते पर हमलों के बाद अब यूक्रेन समुद्री सप्लाई मार्गों को भी निशाना बना रहा है.
यूक्रेन की ड्रोन फ़ोर्स के कमांडर रॉबर्ट ब्रोवदी का कहना है कि पिछले चार दिनों में आज़ोव सागर में कम से कम 25 जहाजों को निशाना बनाया गया और उनमें आग लग गई. आज़ोव सी, केर्च के ज़रिए ब्लैक सी से जुड़ा हुआ है.
इतने कम समय में हुए ये नुक़सान रूस की नौसैनिक क्षमता के लिए बड़ा झटका माने जा रहे हैं. साथ ही, ये राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के ईंधन की सप्लाई बनाए रखने के दावे पर भी असर डाल सकते हैं.
ये हमले यूक्रेन के उस अभियान का नया चरण माने जा रहे हैं, जिसे उसने "लॉजिस्टिक्स लॉकडाउन" नाम दिया है.इस अभियान का मक़सद रूस के क़ब्जे वाले क्राइमिया से जुड़ी सप्लाई और परिवहन मार्गों को बाधित करना है.
यूक्रेन की सेना का दावा है कि अब तक 36 जहाज़ों को निशाना बनाया गया है और इनमें से ज़्यादातर रूस के तथाकथित "शैडो फ्लीट" का हिस्सा हैं, जिसमें व्यावसायिक तेल टैंकर शामिल हैं.
हालांकि, जहाज़ों की सटीक संख्या स्पष्ट नहीं है, क्योंकि कुछ जहाज़ों पर एक से अधिक बार हमला हुआ हो सकता है और सभी हमलों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि भी नहीं हुई है.
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अमेरिका और ईरान के बीच गुरुवार को भी हमलों का सिलसिला जारी रहा. इसी दौरान पर्यवेक्षकों ने बताया कि होर्मुज़ स्ट्रेट से गुज़रने वाले जहाज़ों की संख्या में काफ़ी गिरावट आई है.
अमेरिका का कहना है कि उसने होर्मुज़ के पास स्थित कुछ ठिकानों सहित 90 सैन्य लक्ष्यों पर हमला किया. वहीं, ईरान का दावा है कि पिछले दो दिनों में अमेरिकी हमलों में 14 आम लोगों की मौत हुई है.
ईरान की सरकारी मीडिया ने यह भी बताया कि बुशहर न्यूक्लियर प्लांट के आसपास के कुछ ठिकानों पर भी हमला हुआ है. यह जानकारी प्रांत के उप-गवर्नर के हवाले से दी गई. हालांकि, अमेरिका ने इन ताज़ा हमलों पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
ईरान ने कहा कि जवाबी कार्रवाई में उसने कुवैत, बहरीन और क़तर में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया. बाद में गुरुवार को, सरकारी समर्थन वाले मीडिया के अनुसार, ईरान ने कुवैत, जॉर्डन और इराक़ में भी कई जगहों पर और हमले किए.
इसी बीच, ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली ख़ामेनेई को छह दिनों तक चले अंतिम संस्कार कार्यक्रमों के बाद सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया.
उत्तर-पूर्वी ईरान के मशहद शहर की सड़कों पर बड़ी संख्या में लोग ईरानी झंडे लहराते हुए जुटे. कुछ लोगों के हाथों में ऐसे पोस्टर भी थे, जिनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जान से मारने की धमकियाँ लिखी हुई थीं.
आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की 28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल के ईरान पर किए गए शुरुआती हमलों में मौत हो गई थी.
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फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप के क्वार्टर फ़ाइनल मुक़ाबले में मोरक्को को हराकर फ़्रांस सेमीफ़ाइनल में पहुंच गया है. मंगलवार को सेमीफ़ाइनल में फ़्रांस का मुक़ाबला स्पेन या बेल्जियम से होगा.
फ्रांस ने मोरक्को के ख़िलाफ़ 2-0 से यह मैच जीता है.
फ़्रांस के लिए एम्बापे ने इस विश्व कप में अपना आठवां गोल किया. मैच की शुरुआत में एम्बापे के पेनल्टी चूकने के बावजूद फ़्रांस ने शानदार खेल दिखाया और सेमीफ़ाइनल में जगह बना ली.
एम्बापे ने 60वें मिनट में शानदार वापसी करते हुए पेनल्टी एरिया के किनारे से बेहतरीन कर्लिंग शॉट लगाया और फ़्रांस को बढ़त दिला दी.
इसके छह मिनट बाद उस्मान डेम्बेले ने एक और गोल दाग़कर फ़्रांस को 2-0 की बढ़त दिला दी.
विश्व कप में आठ गोल करने के बाद एम्बापे अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी की बराबरी पर पहुंच गए.
विश्व कप इतिहास के सबसे ज़्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बनने की दौड़ भी रोमांचक बनी हुई है.
27 साल के एम्बापे के नाम अब विश्व कप में 20 गोल हैं, जबकि 39 साल के मेसी के नाम रिकॉर्ड 21 गोल दर्ज हैं.
दो बार का विश्व चैंपियन फ्रांस, जिसे साल 2022 विश्व कप फाइनल में अर्जेंटीना ने पेनल्टी शूटआउट में हराया था.
अब मंगलवार को डलास में होने वाले सेमीफाइनल में स्पेन या बेल्जियम से भिड़ेगा.
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