फांसी के लिए दिए दो जहरीले इंजेक्शन, फिर भी जिंदा रही सजा-ए-मौत पाने वाली महिला… जानें पूरा मामला – Bharat24live

Yuvraj Singh
Date: 01-10-26 23:49
अमेरिका के टेनेसी में मौत की सजा से जुड़ी एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने वहां की फांसी की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 50 वर्षीय क्रिस्टा पाइक को 1995 में हुई हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी. 30 सितंबर 2026 को उसे नाशविले की रिवरबेंड मैक्सिमम सिक्योरिटी इंस्टीट्यूशन में लीथल इंजेक्शन के जरिए मौत देने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन दो डोज दिए जाने के बाद भी उसकी सांसें चलती रहीं.
अगर यह प्रक्रिया पूरी हो जाती तो 200 साल से भी अधिक समय बाद टेनेसी में किसी महिला को दी जाने वाली यह पहली फांसी होती. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. प्रक्रिया के दौरान पाइक के जिंदा होने की बात सामने आने के बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. मीडिया के प्रत्यक्षदर्शियों ने भी डेथ चैंबर के अंदर से उसके खर्राटों की आवाज सुनने की बात कही.
फांसी से कुछ घंटे पहले अदालत पहुंचा मामला
क्रिस्टा पाइक की मौत की सजा 30 सितंबर को स्थानीय समय के मुताबिक सुबह 10 बजे निर्धारित की गई थी. हालांकि, प्रक्रिया शुरू होने से कुछ घंटे पहले ही उसका मामला एक बार फिर अदालत पहुंच गया. छठे सर्किट की अमेरिकी अपीली अदालत ने आखिरी समय में फांसी पर अस्थायी रोक लगा दी.
पाइक के वकीलों की ओर से उसके बचपन में कथित गंभीर यौन शोषण, मानसिक स्वास्थ्य और इन परिस्थितियों को सजा तय करते समय पर्याप्त रूप से ध्यान में नहीं रखे जाने जैसे मुद्दे उठाए गए. इसके बाद टेनेसी प्रशासन ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. सुप्रीम कोर्ट ने रोक हटा दी और राज्य को मौत की सजा की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति मिल गई.
इससे पहले 28 सितंबर को टेनेसी के गवर्नर बिल ली ने भी पाइक की मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की अपील खारिज कर दी थी. गवर्नर ने कहा था कि उन्होंने मामले और पाइक की अपील पर गंभीरता से विचार किया है, लेकिन पूरी समीक्षा के बाद उन्होंने राज्य की अदालत द्वारा सुनाई गई सजा में हस्तक्षेप नहीं करने का फैसला लिया.
शाम 7:26 बजे शुरू हुई मौत की सजा की प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट से रास्ता साफ होने के बाद टेनेसी में शाम के समय मृत्युदंड की प्रक्रिया शुरू की गई. क्रिस्टा पाइक को रिवरबेंड मैक्सिमम सिक्योरिटी इंस्टीट्यूशन के डेथ चैंबर में ले जाया गया. वहां वह अपनी आध्यात्मिक सलाहकार के साथ थी. आखिरी समय में उसने बातचीत की और आध्यात्मिक गीत भी गाए.
हालांकि, इस दौरान पाइक ने अपने हाथ और नसों में दर्द की शिकायत की. उसे पैर पटकते हुए भी देखा गया. उसने अपने वकीलों से यह भी कहा था कि उसकी बांह की नस ऐसी महसूस हो रही है, जैसे वह फटने वाली हो.
इसके बाद उसे पेंटोबार्बिटल की पहली डोज दी गई. राज्य के प्रोटोकॉल के तहत दूसरी डोज भी दी गई, लेकिन इसके बावजूद उसकी मौत नहीं हुई. पाइक की वकील केली ग्लीसन के मुताबिक, उन्हें डेथ चैंबर में मौजूद दूसरी वकील रैंडी स्पाइवी से जानकारी मिली कि पाइक अभी भी जिंदा है और खर्राटे ले रही है. इसके बाद उसे इलाज के लिए पास के अस्पताल ले जाया गया.
करीब एक घंटे तक चलता रहा सस्पेंस
घटना के दौरान मौजूद मीडिया के प्रत्यक्षदर्शियों ने भी डेथ चैंबर की स्थिति के बारे में जानकारी दी. उनके मुताबिक शाम 7:26 बजे तक पर्दे खुले हुए थे और पाइक अपनी आध्यात्मिक सलाहकार के साथ गाने गा रही थी. करीब 7:46 बजे मृत्युदंड की प्रक्रिया शुरू हुई और जेल अधिकारियों ने मीडिया रूम के पर्दे बंद कर दिए.
करीब तीन मिनट बाद पर्दे दोबारा खोले गए. इसी दौरान पाइक के तेज खर्राटे लेने की आवाज सुनाई दी. इसके बाद रात करीब 8:06 बजे पर्दे फिर बंद कर दिए गए. पर्दे बंद होने के बाद भी कुछ समय तक माइक्रोफोन के जरिए उसके खर्राटों की आवाज सुनाई देती रही.
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक करीब एक घंटे तक यह स्पष्ट नहीं हो सका कि पाइक की मौत हुई है या वह अभी भी जिंदा है. आखिरकार उसे अस्पताल ले जाने की जानकारी सामने आई और इस पूरी प्रक्रिया ने टेनेसी की मृत्युदंड व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी.
गवर्नर ने रोकी 2026 की बाकी फांसी
इस घटना के बाद टेनेसी के गवर्नर बिल ली ने बड़ा फैसला लिया. उन्होंने 2026 में राज्य में निर्धारित बाकी सभी मृत्युदंड की प्रक्रियाओं को रोकने और क्रिस्टा पाइक के मामले की दोबारा समीक्षा कराने का ऐलान किया.
गवर्नर ने कहा कि टेनेसी के लोग उम्मीद करते हैं कि मृत्युदंड की प्रक्रिया न केवल कानूनी और संवैधानिक तरीके से पूरी हो, बल्कि यह प्रभावी तरीके से भी की जाए. क्रिस्टा पाइक की फांसी के दौरान सामने आई परिस्थितियों ने इसी प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं.
आखिर किस मामले में सुनाई गई थी मौत की सजा?
क्रिस्टा पाइक का मामला करीब तीन दशक पुराना है. 12 जनवरी 1995 को जब यह अपराध हुआ था, तब पाइक की उम्र 18 साल थी. वह नॉक्सविले में पढ़ती थी और 19 वर्षीय कोलीन स्लेमर को जानती थी.
मामले के मुताबिक पाइक को शक था कि स्लेमर उसके बॉयफ्रेंड टेडारिल शिप के करीब आ रही है. इसी कथित जलन और रंजिश के बीच पाइक, शिप और उनकी एक अन्य साथी शडोला पीटरसन स्लेमर को एक सुनसान इलाके में ले गए. वहां स्लेमर पर हमला किया गया. उसे बुरी तरह पीटा गया और उसके शरीर पर धारदार हथियार से चोटें की गईं. उसके सीने पर शैतानी प्रतीक भी बनाया गया था. इसके बाद तीनों पर मिलकर उसकी हत्या करने का आरोप लगा.
तीनों को मिली अलग-अलग सजा
साल 1996 में क्रिस्टा पाइक को हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया और मौत की सजा सुनाई गई. अपराध के समय वह 18 साल की थी. इस मामले में पाइक अकेली आरोपी नहीं थी. टेडारिल शिप की उम्र अपराध के समय 17 साल थी, इसलिए उसे मौत की सजा नहीं दी गई और बाद में उम्रकैद की सजा मिली. वहीं दूसरी आरोपी शडोला पीटरसन को भी मौत की सजा नहीं सुनाई गई.
इसी वजह से क्रिस्टा पाइक का मामला वर्षों से कानूनी बहस का विषय रहा है. एक ही अपराध में शामिल आरोपियों को अलग-अलग सजा मिलने और पाइक के बचपन में कथित शोषण तथा मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं को लेकर उसके वकील लगातार सवाल उठाते रहे हैं. अब 30 सितंबर की असफल मृत्युदंड प्रक्रिया ने इस पुराने मामले को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है.
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