फिलीपींस में गंभीर समस्या. (Photo/Meta AI)
Philippines Heat: दुनिया भर में बढ़ते तापमान का असर दिखने लगा है, मगर फिलीपींस जैसे देशों में यह समस्या और भी गंभीर हो गई है. यहां की तेज गर्मी ने खासकर गरीब लोगों, जैसे किसान और मछुआरों की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है. Greenpeace Philippines की एक रिपोर्ट Here Comes the Sun के मुताबिक, तेज होती गर्मी ने लाखों लोगों को ‘क्लाइमेट पॉवर्टी ट्रैप’ में धकेल दिया है. यानी वे लोग जो पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर हैं, अब जलवायु परिवर्तन के कारण और ज्यादा गरीब होते जा रहे हैं. रिपोर्ट बताती है कि बढ़ते तापमान से स्वास्थ्य, रोजगार और समाज तीनों पर गहरा असर पड़ रहा है.
रिपोर्ट में ‘हीट स्ट्रेस’ को सबसे खतरनाक असर बताया गया है. यह स्थिति तब होती है जब ज्यादा गर्मी और नमी के कारण शरीर खुद को ठंडा नहीं रख पाता. इसका असर सिर्फ बीमारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, काम और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ता है. साल 2023-24 में फिलीपींस में गर्मी के कारण 22 से 24 स्कूल दिन प्रभावित हुए और पहली बार देशभर में गर्मी की वजह से क्लास बंद करनी पड़ी. इससे साफ है कि यह समस्या अब हर क्षेत्र को प्रभावित कर रही है.
Greenpeace और PAGASA के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 30 सालों में फिलीपींस का औसत तापमान 0.6 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है. वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो 2030 तक देश की जीडीपी में 7.6 प्रतिशत और 2040 तक 13.6 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है. 2030 तक करीब 1.1 करोड़ लोग 42 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान झेलेंगे, जो 2050 तक बढ़कर 7.4 करोड़ हो सकते हैं. इससे पीएचपी 870 बिलियन करीब 3-5 प्रतिशत जीडीपी तक का आर्थिक नुकसान हो सकता है. किसानों की फसलें घट रही हैं, क्योंकि गर्मी और पानी की कमी फसलों को नुकसान पहुंचा रही है. वहीं, मछुआरे बताते हैं कि गर्म समुद्र और बदलते मौसम के कारण मछलियां गहरे पानी में चली जाती हैं, जिससे उनकी पकड़ कम हो रही है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि फिलीपींस के 2.3 मिलियन मछुआरों में से 1.9 मिलियन छोटे स्तर पर काम करते हैं, और इनमें गरीबी दर 27.4 प्रतिशत से 30.6 प्रतिशत के बीच है, जो राष्ट्रीय औसत से लगभग दोगुनी है. मई 2026 में हुई स्टडी में पाया गया कि तेज गर्मी के कारण मछुआरों को जल्दी काम खत्म करना पड़ता है, जिससे उनकी कमाई घट रही है. साथ ही हीट स्ट्रोक, हाई ब्लड प्रेशर, अस्थमा और त्वचा रोग के मामले बढ़ रहे हैं. रिपोर्ट बताती है कि सरकार को क्लाइमेट जस्टिस पर आधारित कदम उठाने चाहिए. जैसे हीट एक्शन प्लान बढ़ाना, अर्ली वार्निंग सिस्टम मजबूत करना, कूलिंग सेंटर और साफ पानी उपलब्ध कराना, और प्रभावित परिवारों को सामाजिक सुरक्षा देना. शायद तभी इस बढ़ती गर्मी के संकट से लोगों को बचाया जा सकता है.
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नंदन सिंह ने पत्रकारिता में करियर की शुरुआत साल 2015 में ईनाडु डिजिटल यानी ईटीवी (हैदराबाद) से की. यहां इन्होंने बतौर कॉपी राइटर करीब 10 महीनों तक काम किया. सीखने का सिलसिला आगे बढ़ा और फिर राजस्थान पत्रिका (वाराणसी) में काम करने का मौका मिला. यहां कॉपी एडिटर रहते हुए खबरों को नई धार देना सीखा. नंदन … और पढ़े
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