कोलकाता की प्रेसिडेंसी जेल में बंद आतंकी आफताब अहमद अंसारी की बैरक से 31 हजार रुपये नकद और मोबाइल फोन मिलने से जांच अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है।
प्रेसिडेंसी जेल (सोशल मीडिया)
आतंकी आफताब अंसारी की बैरक से 31 हजार नकद मिले।
मोबाइल और हाई-टेक उपकरण भी बरामद, फोरेंसिक जांच जारी।
जेल सुरक्षा और अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल।
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। कोलकाता स्थित अमेरिकी सूचना केंद्र पर हमले के दोषी आतंकी आफताब अहमद अंसारी की बैरक के भीतर सक्रिय नेटवर्क की जांच अब केवल मोबाइल और इंटरनेट उपकरणों तक सीमित नहीं रह गई है। उसके पास मिले 31 हजार रुपये नकद ने जांच अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है।
2002 से जेल में बंद आफताब तक नियमित रूप से पैसे कौन पहुंचा रहा था और क्या इस रकम का संबंध उसके कथित नेटवर्क से है, इसकी पड़ताल की जा रही है। साथ ही, उसके पास लगातार मोबाइल और इंटरनेट उपकरण पहुंचने के पीछे जेलकर्मियों की संभावित भूमिका की भी जांच हो रही है।
बता दें कि गत दिनों प्रेसिडेंसी जेल में अंसारी की बैरक से छापेमारी के दौरान आईफोन समेत तीन स्मार्ट मोबाइल फोन, हाई-टेक उपकरण और नकदी बरामद हुए थे। आफताब की बैरक से बरामद इलेक्ट्रानिक उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।
मोबाइल में वाट्सएप और टेलीग्राम समेत कई संचार एप मिले हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि आफताब ने पाकिस्तान के किसी नंबर पर संपर्क किया था या नहीं। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि जेल में रहते हुए आफताब किन लोगों से मिलता था और किन कैदियों के साथ उसका नियमित संपर्क था।
आफताब के पास से लगातार प्रतिबंधित सामान पहुंचने की घटना ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ पहले से चल रही सीआइडी जांच पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मई में प्रेसिडेंसी जेल से 23 मोबाइल बरामद होने के बाद जेल के दो वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित किया गया था और कैदियों तक मोबाइल पहुंचने के नेटवर्क की जांच सीआइडी को सौंपी गई थी।
इसके बावजूद आफताब की बैरक से आधुनिक संचार उपकरणों की बरामदगी से संकेत मिलते हैं कि अवैध मोबाइल नेटवर्क पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग सका है। कारा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि कड़ी सुरक्षा वाले आफताब की बैरक तक मोबाइल, राउटर और अन्य उपकरण कैसे पहुंचे।