बर्गर, बैरिकेड और विजेता दहिया का निष्कासन! जानिए कॉकरोच जनता पार्टी में पहली टूट की पूरी इनसाइड स्टोरी – Aaj Tak News

Feedback
सड़कों पर पुलिस के आंसू गैस के गोले, जंतर-मंतर पर ढोल की थाप, ‘चलो संसद’ के नारे और बैकग्राउंड में गूंजता छात्रों का आक्रोश… नीट (NEET) और पेपर लीक विवाद के बीच पिछले कुछ हफ्तों में जिस ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने सोशल मीडिया से लेकर दिल्ली की सड़कों तक हलचल मचाई, उसी पार्टी में अब पहली बड़ी और अनपेक्षित टूट सामने आ गई है.
जो आंदोलन एक डिजिटल व्यंग्य से शुरू होकर देश का सबसे बड़ा युवा विरोध प्रदर्शन बन गया था, उसके शीर्ष नेतृत्व में दरार पड़ चुकी है. लेकिन यह दरार क्यों पड़ी? किसने किससे नाता तोड़ा? और जंतर-मंतर के नारों के बीच ‘बर्गर’ कहां से आ गया? आइए समझते हैं CJP के जन्म से लेकर इस पहली बड़ी टूट की पूरी ‘कुंडली’.
कैसे शुरू हुआ CJP का सफर और कौन-कौन जुड़ा?
इस आंदोलन की नींव किसी पारंपरिक राजनीतिक कार्यालय में नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया में पड़ी थी. शुरुआती दौर में महाराष्ट्र के एक्टिविस्ट अभिजीत दिपके ने पेपर लीक और परीक्षाओं में हो रही धांधली पर व्यंग्य कसने के लिए X (ट्विटर) पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी‘ (CJP) नाम से एक पैरोडी/सटायर अकाउंट बनाया. मकसद व्यवस्था को आईना दिखाना था.
फिर देखते ही देखते इस डिजिटल कैम्पेन से देश भर के युवा, पत्रकार और छात्र नेता जुड़ने लगे. सौरव दास और आशुतोष रांका जैसे चेहरे पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और रणनीतिकार के रूप में सामने आए. 
विजेता दहिया की एंट्री
फिर हरियाणा के युवा नेता और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर विजेता दहिया इस आंदोलन से जुड़े और अपनी आक्रामक बयानबाजी व युवाओं को जुटाने की क्षमता के कारण जल्द ही CJP के प्रमुख प्रवक्ताओं में शामिल हो गए. कुछ ही हफ्तों में CJP एक ‘मीम’ से बदलकर हजारों छात्रों का एक सशक्त नागरिक आंदोलन बन गया.
फिर क्या हुआ? 
21-22 जुलाई 2026 को CJP ने संसद घेराव यानी ‘चलो संसद’ मार्च का आह्वान किया. जंतर-मंतर पर हजारों की संख्या में छात्र उमड़ पड़े. स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब पुलिस ने बैरिकेडिंग की और प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन व आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया.
इस दौरान 150 से अधिक छात्र घायल हुए और कई को हिरासत में लिया गया. एक तरफ जहां छात्र सड़कों पर लाठियां खा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ CJP के अंदर एक बड़ा तूफान आकार ले रहा था.
कैसे शुरू हुई कंट्रोवर्सी?  
इस पूरी टूट की वजह बना एक वायरल वीडियो और आंदोलन की टाइमिंग. जब जंतर-मंतर पर पुलिस और छात्रों के बीच झड़प हो रही थी, ठीक उसी समय विजेता दहिया का एक पास के मॉल स्थित ‘बर्गर किंग’ आउटलेट में बैठकर आराम से बर्गर खाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा था. सड़कों पर संघर्ष कर रहे छात्रों और CJP के कार्यकर्ताओं ने इसे आंदोलन और घायल छात्रों के साथ संवेदनहीनता और विश्वासघात माना.
वीडियो वायरल होने के बाद विजेता दहिया ने बैकफुट पर जाने के बजाय एक और वीडियो जारी किया और आक्रामक अंदाज में कहा, ‘ यस, आई व‍िल ईट द बर्गर!’ उनका तर्क था कि वे पिछले डेढ़ महीने से बिना सोए दिन-रात काम कर रहे थे और खाना खाना कोई अपराध नहीं है.
अभ‍िजीत दीपके ने ल‍िया एक्शन
विजेता दहिया के इस रुख और वायरल वीडियो के बाद CJP के केंद्रीय नेतृत्व ने बिना देर किए बड़ा एक्शन लिया. पार्टी संस्थापक अभिजीत दिपके और मुख्य प्रवक्ता सौरव दास की ओर से एक आधिकारिक प्रेस नोट जारी कर विजेता दहिया को CJP के मुख्य प्रवक्ता पद और प्राथमिक सदस्यता से तुरंत प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया.
CJP नेतृत्व ने साफ किया कि आंदोलन छात्रों के खून-पसीने पर टिका है और किसी भी नेता का गैर-जिम्मेदाराना या संवेदनहीन व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इस घटना और हिंसा के बाद अभिजीत दिपके ने बड़ा फैसला लेते हुए ऐलान किया कि अब आगे कोई संसद मार्च नहीं होगा, क्योंकि हम युवाओं को पुलिस की लाठियों के आगे चोटिल होने के लिए नहीं छोड़ सकते.
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News